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राजनाथ सिंह का ASEAN देशों से रक्षा सहयोग बढ़ाने पर जोर

ASEAN देशों के साथ भारत के संबंध व्यापार, कूटनीति, समुद्री संपर्क और सुरक्षा सहित कई क्षेत्रों तक फैले हुए हैं। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री मार्गों की सुरक्षा, साइबर खतरों और नई तकनीकों से जुड़ी चुनौतियां किसी एक देश तक सीमित नहीं रहतीं। ऐसे में सूचनाओं का जिम्मेदारी से आदान-प्रदान और संयुक्त शोध क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने...

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  • October 14, 2026 1:20 pm IST, Published 59 minutes ago

दिल्ली में आयोजित ASEAN-इंडिया डिफेंस थिंक टैंक फोरम को संबोधित करते हुए केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के बीच रक्षा सहयोग को अधिक व्यावहारिक और प्रभावी बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में समुद्री सुरक्षा, साइबर खतरों, नई तकनीकों और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में साझा प्रयासों की आवश्यकता बढ़ गई है। भारत और ASEAN देशों के बीच अनुसंधान, विशेषज्ञों के आदान-प्रदान और संयुक्त परियोजनाओं को बढ़ावा देकर क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत किया जा सकता है।

राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में सुझाव दिया कि भारत और ASEAN देशों को रक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर एक साझा शोध एजेंडा तैयार करना चाहिए। इसमें समुद्री सुरक्षा, साइबर हमलों से पैदा होने वाली चुनौतियां, उभरती तकनीकें, आपदा के दौरान राहत एवं बचाव कार्य और रक्षा उद्योग में सहयोग जैसे मुद्दे शामिल किए जा सकते हैं। उनके मुताबिक, संयुक्त अनुसंधान से क्षेत्र के देशों को अपनी सुरक्षा संबंधी चुनौतियों को बेहतर ढंग से समझने और उनके लिए व्यावहारिक समाधान विकसित करने में मदद मिलेगी।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शोधकर्ताओं, विशेषज्ञों और शिक्षाविदों के बीच नियमित संपर्क बढ़ाने की आवश्यकता भी रेखांकित की। उन्होंने फेलोशिप कार्यक्रमों, एक-दूसरे के संस्थानों में शैक्षणिक यात्राओं और संयुक्त प्रकाशनों के माध्यम से सहयोग बढ़ाने का सुझाव दिया। इसमें युवा शोधकर्ताओं को भी शामिल करने पर जोर दिया गया, ताकि नई पीढ़ी के विशेषज्ञ क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े विषयों पर मिलकर काम कर सकें। इस तरह के कार्यक्रम विभिन्न देशों के बीच ज्ञान साझा करने और एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने का अवसर प्रदान कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि केवल चर्चाओं तक सीमित रहने के बजाय कुछ ऐसी प्रायोगिक परियोजनाओं की पहचान की जानी चाहिए, जिनके परिणामों का आकलन किया जा सके। उदाहरण के तौर पर, समुद्री आपदाओं से निपटने के लिए संयुक्त अभ्यास, ड्रोन से जुड़े सुरक्षा खतरों का मुकाबला करने के उपायों पर अध्ययन और समुद्री क्षेत्र में सुरक्षित सूचना साझा करने से संबंधित शोध परियोजनाएं शुरू की जा सकती हैं। इन पहलों के जरिए संबंधित देशों की तैयारी, तकनीकी क्षमता और आपसी समन्वय को बेहतर बनाने में सहायता मिल सकती है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने औपचारिक बैठकों के अलावा संवाद के दूसरे माध्यमों को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने ट्रैक 1.5 और ट्रैक 2 संवाद को प्रोत्साहित करने का प्रस्ताव रखा। इन प्रक्रियाओं के माध्यम से सरकारी अधिकारियों, नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को विचारों के आदान-प्रदान का अवसर मिलता है। इससे औपचारिक वार्ताओं के बीच भी संपर्क बना रह सकता है और नई चुनौतियों पर लगातार चर्चा की जा सकती है।

भारत और ASEAN देशों के बीच सहयोग की व्यापक क्षेत्रीय अहमियत का उल्लेख करते हुए रक्षा मंत्री ने ऐसे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की आवश्यकता बताई, जहां सभी देशों को अपने फैसले स्वतंत्र रूप से लेने, अपने हितों की रक्षा करने और शांतिपूर्ण ढंग से विकास करने का अवसर मिले। उनके संबोधन में क्षेत्रीय स्थिरता, राष्ट्रीय संप्रभुता और साझा सुरक्षा से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहे। उन्होंने इस दिशा में संवाद और अनुसंधान को ठोस परिणामों से जोड़ने की जरूरत पर बल दिया।

ASEAN देशों के साथ भारत के संबंध व्यापार, कूटनीति, समुद्री संपर्क और सुरक्षा सहित कई क्षेत्रों तक फैले हुए हैं। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री मार्गों की सुरक्षा, साइबर खतरों और नई तकनीकों से जुड़ी चुनौतियां किसी एक देश तक सीमित नहीं रहतीं। ऐसे में सूचनाओं का जिम्मेदारी से आदान-प्रदान और संयुक्त शोध क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने में भूमिका निभा सकते हैं।

राजनाथ सिंह ने उम्मीद जताई कि ASEAN-इंडिया डिफेंस थिंक टैंक फोरम साझा विचारों को व्यावहारिक योजनाओं में बदलने का माध्यम बनेगा। उन्होंने चर्चा से संयुक्त अनुसंधान और फिर ऐसे समाधानों की ओर बढ़ने का आह्वान किया, जिनसे क्षेत्र के लोगों की सुरक्षा और जीवन की गुणवत्ता बेहतर हो सके। अब इस तरह के सुझावों को आगे बढ़ाने में संबंधित देशों की भागीदारी, संस्थागत समन्वय और प्रस्तावित परियोजनाओं के क्रियान्वयन की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

 

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