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दिल्ली की हवा हुई जहरीली, कई इलाकों में AQI 267 के पार पहुंचा

प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए GRAP के पहले चरण के तहत विभिन्न विभागों को सक्रिय किया गया है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने अंतरराज्यीय समन्वय बैठक आयोजित कर प्रदूषण कम करने के उपायों की समीक्षा की। बैठक में दिल्ली की सीमाओं से आने वाली बसों की जांच, निर्धारित मानकों का उल्लंघन करने वाले वाहनों को वैकल्पिक मार्गों पर भेजने और प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्रों की जांच...

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Gauravshali Bharat News
  • October 23, 2026 10:31 am IST, Published 1 hour ago

नई दिल्ली: दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर एक बार फिर बढ़ने लगा है। राजधानी में लगातार तीसरे दिन हवा की गुणवत्ता खराब श्रेणी में दर्ज की गई। शुक्रवार को दिल्ली का 24 घंटे का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 222 रहा। शहर के कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर इससे भी अधिक दर्ज किया गया। हवा में बढ़ते प्रदूषण के बीच लोगों को सांस लेने में परेशानी और आंखों में जलन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। हालात को देखते हुए दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण नियंत्रण के लिए ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के पहले चरण के तहत उपाय लागू किए गए हैं। संबंधित एजेंसियों को नियमों का पालन सुनिश्चित करने और प्रदूषण के स्रोतों पर निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में वायु गुणवत्ता का स्तर खराब श्रेणी में बना हुआ है। कलिंदी कुंज में AQI 267 दर्ज किया गया, जबकि एम्स के आसपास यह आंकड़ा 255 रहा। इंडिया गेट क्षेत्र में वायु गुणवत्ता सूचकांक 236 रिकॉर्ड किया गया। इन आंकड़ों से पता चलता है कि राजधानी के कई प्रमुख इलाकों में हवा की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों में प्रदूषण का स्तर एक जैसा नहीं है और स्थानीय परिस्थितियों के कारण इसमें अंतर देखा जा सकता है।

दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने का सिलसिला पिछले कुछ दिनों से जारी है। गुरुवार सुबह वायु गुणवत्ता सूचकांक 226 दर्ज किया गया था। इससे पहले बुधवार को दशहरा उत्सव के बाद राजधानी के कई हिस्सों में धुंध दिखाई दी थी। इसी दौरान इस मौसम का पहला खराब वायु गुणवत्ता वाला दिन दर्ज किया गया। इसके बाद से प्रदूषण का स्तर लगातार चिंता का विषय बना हुआ है। मौसम में बदलाव, हवा की गति, वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल और अन्य स्थानीय स्रोत वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं।

AQI के मानकों के अनुसार, 0 से 50 के बीच का स्तर अच्छी हवा को दर्शाता है। 51 से 100 तक हवा संतोषजनक, 101 से 200 तक मध्यम, 201 से 300 तक खराब, 301 से 400 तक बहुत खराब और 401 से 500 तक गंभीर श्रेणी में आता है। इस आधार पर दिल्ली का औसत AQI 222 होने का अर्थ है कि राजधानी की हवा खराब श्रेणी में है। ऐसी परिस्थितियों में बच्चों, बुजुर्गों और सांस या हृदय संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है। प्रदूषण के प्रति संवेदनशील लोगों को बाहर की गतिविधियों के दौरान अपनी सेहत का ध्यान रखना चाहिए।

प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए GRAP के पहले चरण के तहत विभिन्न विभागों को सक्रिय किया गया है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने अंतरराज्यीय समन्वय बैठक आयोजित कर प्रदूषण कम करने के उपायों की समीक्षा की। बैठक में दिल्ली की सीमाओं से आने वाली बसों की जांच, निर्धारित मानकों का उल्लंघन करने वाले वाहनों को वैकल्पिक मार्गों पर भेजने और प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्रों की जांच जैसे विषयों पर चर्चा हुई। इसके अलावा सड़कों पर जमा धूल को नियंत्रित करने और निर्माण स्थलों से निकलने वाले प्रदूषण पर निगरानी बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया गया।

अधिकारियों ने नवंबर से जनवरी के बीच वाहन प्रवेश संबंधी प्रतिबंधों को प्रभावी ढंग से लागू करने की तैयारी करने को कहा है। इसके लिए 1 नवंबर से 31 जनवरी तक संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल और वास्तविक समय में सूचनाओं के आदान-प्रदान पर जोर दिया गया है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के निर्देशों को तय समयसीमा के भीतर लागू करना भी इस रणनीति का हिस्सा है।

राजधानी में प्रदूषण का स्तर आने वाले दिनों में किस दिशा में जाएगा, यह मौसम की परिस्थितियों और नियंत्रण उपायों के प्रभाव पर निर्भर करेगा। फिलहाल, लगातार खराब हवा ने एक बार फिर दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण की चुनौती को सामने ला दिया है। नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन, वाहनों और निर्माण गतिविधियों से होने वाले उत्सर्जन पर निगरानी तथा आम लोगों की सतर्कता वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए अहम साबित हो सकती है।

 

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