नई दिल्ली। सर्दियों की शुरुआत से पहले दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने दिल्ली नगर निगम (MCD) को 31 अक्टूबर तक सड़कों, डिवाइडरों, फुटपाथों और खुले मैदानों में जमा धूल, कूड़ा और निर्माण मलबा हटाने का निर्देश दिया है। साथ ही चेतावनी दी है कि आदेशों के पालन में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और एजेंसियों के खिलाफ मुकदमा चलाने जैसी कार्रवाई की जा सकती है।
प्रदूषण नियंत्रण के उपायों की समीक्षा के लिए सीएक्यूएम और दिल्ली नगर निगम के अधिकारियों के बीच उच्च स्तरीय बैठक हुई। इसमें नरेला, रोहिणी, करोल बाग, पुरानी दिल्ली और शाहदरा समेत एमसीडी के सभी 12 जोनों के उपायुक्त शामिल हुए।
बैठक में अधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में चल रहे सफाई अभियानों और प्रदूषण नियंत्रण के उपायों की जानकारी दी। निगम के अनुसार, सड़कों से धूल हटाने के लिए मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। वहीं, प्रदूषण के हॉटस्पॉट वाले इलाकों में गहरी सफाई के लिए एंटी-स्मॉग गन, जेटिंग मशीनों और स्प्रिंकलर की मदद से पानी का छिड़काव किया जा रहा है।
सीएक्यूएम ने स्पष्ट किया है कि केवल धूल और कूड़ा हटाने से प्रदूषण की समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। इसके लिए उन कारणों पर भी काम करना जरूरी है, जिनसे धूल उड़ती है।
आयोग ने एमसीडी को निर्देश दिया है कि टूटी सड़कों और गड्ढों की जल्द मरम्मत कराई जाए। कच्चे हिस्सों को पक्का किया जाए और धूल उड़ने की आशंका वाले क्षेत्रों में हरियाली विकसित की जाए। इसके अलावा, खुले में कूड़ा जलाने और अवैध तरीके से निर्माण मलबा फेंकने की घटनाओं पर भी कड़ी निगरानी रखने को कहा गया है।
दिल्ली में प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए सीएक्यूएम ने एमसीडी को लोक निर्माण विभाग (PWD), दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA), दिल्ली जल बोर्ड और रेलवे सहित अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ बेहतर तालमेल बनाने का निर्देश दिया है।
आयोग का मानना है कि विभिन्न विभागों के बीच समन्वय के बिना प्रदूषण नियंत्रण के प्रयास प्रभावी नहीं हो सकते। ऐसे में सभी संबंधित एजेंसियों को निर्धारित समयसीमा के भीतर अपने हिस्से की जिम्मेदारी निभानी होगी।
सर्दियों में हवा की गति कम होने और मौसम संबंधी परिस्थितियों के कारण दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषक तत्वों का जमाव बढ़ सकता है। ऐसे में सड़क की धूल, निर्माण मलबा और खुले में कचरा जलाने जैसी गतिविधियां वायु गुणवत्ता को और खराब कर सकती हैं।
सीएक्यूएम की ओर से 31 अक्टूबर की समयसीमा तय किए जाने के बाद अब एमसीडी और अन्य संबंधित एजेंसियों के सामने निर्धारित अवधि में सफाई और मरम्मत कार्य पूरा करने की चुनौती है। इन उपायों की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि निर्देशों को जमीन पर कितनी गंभीरता से लागू किया जाता है।