आसाराम बापू को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है। नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम की मेडिकल आधार पर पैरोल बढ़ाने की मांग अदालत ने खारिज कर दी है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को निर्देश दिया है कि जेल में रहने के दौरान आसाराम की सेहत का उचित ध्यान रखा जाए। उनकी पैरोल की अवधि समाप्त होने के बाद उन्हें 27 अक्टूबर को शाम पांच बजे तक संबंधित जेल में सरेंडर करना होगा।
आसाराम ने अपनी खराब सेहत का हवाला देते हुए अदालत से पैरोल की अवधि बढ़ाने की अपील की थी। उनके वकील ने सुनवाई के दौरान बताया कि आसाराम मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित अस्पताल में भर्ती हैं और उनका उपचार चल रहा है। इसी आधार पर अदालत से अनुरोध किया गया कि उन्हें कुछ और समय तक जेल से बाहर रहने की अनुमति दी जाए। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल आधार पर पैरोल बढ़ाने की मांग स्वीकार नहीं की।
यह मामला राजस्थान में नाबालिग से दुष्कर्म के अपराध में मिली सजा से जुड़ा है। आसाराम इस मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। उनकी पैरोल को लेकर पहले भी कानूनी प्रक्रिया के विभिन्न चरण सामने आए थे। राजस्थान हाईकोर्ट ने 6 अक्टूबर को उन्हें 20 दिन की पैरोल देने से संबंधित आदेश पर कार्रवाई का निर्देश दिया था। इसके बाद आसाराम जेल से बाहर आए थे। अब पैरोल की अवधि समाप्त होने पर उन्हें वापस जेल लौटना होगा।
पैरोल के दौरान आसाराम मध्य प्रदेश के उज्जैन पहुंचे थे। यहां उनके पंचकर्म उपचार की योजना थी। इसी दौरान उन्होंने सीने में दर्द की शिकायत की, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनके वकील ने अस्पताल में भर्ती होने और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों को आधार बनाकर पैरोल की अवधि बढ़ाने की मांग की थी। लेकिन अदालत ने इन दलीलों के बावजूद पैरोल बढ़ाने से इनकार कर दिया।
इस मामले में पैरोल से जुड़े कानूनी घटनाक्रम के दौरान गुजरात में आसाराम के खिलाफ दर्ज एक अन्य दुष्कर्म मामले में मिली सजा का मुद्दा भी सामने आया था। इसके चलते उनकी रिहाई की प्रक्रिया में अड़चनें आई थीं। बाद में राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को पैरोल संबंधी आदेश का पालन करने के निर्देश दिए। इस घटनाक्रम के बाद आसाराम को निर्धारित अवधि के लिए जेल से बाहर रहने की अनुमति मिली थी।
सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद अब आसाराम को तय समयसीमा के भीतर सरेंडर करना होगा। अदालत ने पैरोल बढ़ाने की अनुमति नहीं दी, लेकिन राजस्थान सरकार को उनके स्वास्थ्य की निगरानी और आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। इस निर्देश का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जेल में रहने के दौरान उनकी स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों का ध्यान रखा जाए।
आसाराम का मामला लंबे समय से कानूनी और सार्वजनिक चर्चा में रहा है। नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में उनकी सजा और अलग-अलग अदालतों में हुई सुनवाई के चलते उनके कानूनी मामलों पर लगातार नजर रही है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पैरोल बढ़ाने की उनकी मांग पर विराम लग गया है। अब निर्धारित समय पर सरेंडर और जेल में उनके स्वास्थ्य की देखभाल से जुड़े निर्देश महत्वपूर्ण होंगे।