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देश में 30% मौतें सरकारी रिकॉर्ड से बाहर

 122 जिलों में महिलाओं की 40% से भी कम मौतों का पंजीकरण; ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति चिंताजनक नई दिल्ली। देश में जन्म और मृत्यु के पंजीकरण की व्यवस्था को लेकर एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। आंकड़ों के मुताबिक, भारत में होने वाली करीब 30 प्रतिशत मौतें सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज ही नहीं हो पाती […]

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  • November 4, 2026 8:12 am IST, Published 2 hours ago

 122 जिलों में महिलाओं की 40% से भी कम मौतों का पंजीकरण; ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति चिंताजनक

नई दिल्ली। देश में जन्म और मृत्यु के पंजीकरण की व्यवस्था को लेकर एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। आंकड़ों के मुताबिक, भारत में होने वाली करीब 30 प्रतिशत मौतें सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज ही नहीं हो पाती हैं। सबसे गंभीर स्थिति महिलाओं की मौतों के पंजीकरण को लेकर है। देश के 707 जिलों में से 122 जिलों में महिलाओं की 40 प्रतिशत से भी कम मौतें दर्ज की गई हैं। इससे सरकारी आंकड़ों की विश्वसनीयता और मृत्यु पंजीकरण व्यवस्था की पहुंच पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, देशभर में 84,390 मौतों के आंकड़ों के विश्लेषण में यह स्थिति सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार, कई राज्यों और जिलों में महिलाओं की मृत्यु का पंजीकरण बेहद कम है। इसका सबसे चिंताजनक उदाहरण अरुणाचल प्रदेश के कुरुंग कुमे जिले में देखने को मिला, जहां महिलाओं की केवल 5 प्रतिशत मौतें ही सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हुईं।

बिहार और झारखंड में स्थिति बेहद खराब

महिलाओं की मृत्यु के पंजीकरण के मामले में बिहार और झारखंड की स्थिति भी चिंताजनक है। बिहार के 38 जिलों में से 37 जिलों में महिलाओं की मौतों का पंजीकरण 60 प्रतिशत से कम रहा। झारखंड में भी लगभग ऐसी ही स्थिति सामने आई है।

ये आंकड़े बताते हैं कि देश के कई हिस्सों में महिलाओं की मृत्यु को सरकारी रिकॉर्ड में शामिल करने की प्रक्रिया अभी भी कमजोर है। खासकर ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में इस समस्या का प्रभाव अधिक दिखाई देता है।

पुरुषों की तुलना में महिलाओं की मौतों का पंजीकरण कम

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (2019-21) के अनुसार, देश में कुल मौतों में से केवल 70.8 प्रतिशत का ही पंजीकरण हुआ था। इसका मतलब है कि लगभग 30 प्रतिशत मौतें सरकारी रिकॉर्ड से बाहर रह गईं।

आंकड़ों में पुरुषों और महिलाओं के बीच भी बड़ा अंतर दिखाई देता है। पुरुषों की करीब 73 प्रतिशत मौतें दर्ज की गईं, जबकि महिलाओं की मौतों का पंजीकरण केवल 64 प्रतिशत रहा। यह अंतर सामाजिक सोच और प्रशासनिक व्यवस्था में मौजूद कमियों की ओर संकेत करता है।

महिलाओं की मौतों का रिकॉर्ड कम होने की प्रमुख वजहें

विशेषज्ञों के अनुसार, महिलाओं की मौतों का पंजीकरण कम होने के पीछे कई सामाजिक और प्रशासनिक कारण हैं।

  • उत्तराधिकार से जुड़ी सोच: मकान और जमीन के उत्तराधिकार जैसे मामलों में पुरुषों की मृत्यु का रिकॉर्ड अधिक जरूरी समझा जाता है। इसके कारण महिलाओं की मृत्यु के पंजीकरण को कम प्राथमिकता मिलती है।

  • घर पर मृत्यु होना: ग्रामीण इलाकों में महिलाओं की मृत्यु घर पर होने की स्थिति में कई बार परिवार की ओर से पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू ही नहीं की जाती।

  • जागरूकता की कमी: गरीब और अशिक्षित परिवारों को मृत्यु पंजीकरण के महत्व और जरूरी दस्तावेजों की जानकारी नहीं होती।

  • पंजीकरण केंद्रों की दूरी: दूरदराज के गांवों में पंजीकरण केंद्रों तक पहुंचना मुश्किल होता है। आने-जाने का खर्च भी परिवारों के लिए परेशानी बनता है।

  • संवेदनशील मामलों की जानकारी का अभाव: मातृ मृत्यु और आत्महत्या जैसे मामलों की जानकारी कई बार प्रशासन तक नहीं पहुंच पाती।

आकांक्षी जिलों में भी कमजोर है पंजीकरण व्यवस्था

विकास के लिहाज से पिछड़े 112 आकांक्षी जिलों में मृत्यु पंजीकरण की स्थिति अन्य जिलों की तुलना में काफी खराब है। इन जिलों में केवल 54.4 प्रतिशत मौतें ही दर्ज हुईं, जबकि अन्य जिलों में यह आंकड़ा 73.7 प्रतिशत रहा। दोनों के बीच 19.3 प्रतिशत अंक का अंतर है।

यह अंतर बताता है कि विकास और प्रशासनिक सुविधाओं की कमी का असर मृत्यु पंजीकरण जैसी बुनियादी व्यवस्था पर भी पड़ रहा है।

पंचायतों और आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका बढ़ाने की जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि सिविल रजिस्ट्रेशन एंड वाइटल स्टैटिस्टिक्स (CRVS) व्यवस्था को मजबूत किए बिना इस समस्या का समाधान संभव नहीं है। इसके लिए पंचायतों, आशा कार्यकर्ताओं और आंगनवाड़ी केंद्रों को सक्रिय भूमिका देनी होगी।

ग्रामीण परिवारों को मृत्यु पंजीकरण की प्रक्रिया, जरूरी दस्तावेजों और इसके कानूनी महत्व के बारे में जागरूक करना भी जरूरी है। साथ ही, दूरदराज के क्षेत्रों में पंजीकरण की सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

मृत्यु का पंजीकरण केवल सरकारी आंकड़ों तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह सामाजिक सुरक्षा, सरकारी योजनाओं, कानूनी अधिकारों और सही जनसंख्या संबंधी आंकड़ों के लिए भी महत्वपूर्ण है। जब देश में हर व्यक्ति की मृत्यु का रिकॉर्ड दर्ज नहीं होगा, तब नीतियां बनाने और वास्तविक जरूरतों का आकलन करने में भी मुश्किलें आएंगी। ऐसे में जरूरी है कि महिलाओं और ग्रामीण आबादी के मृत्यु पंजीकरण को विशेष प्राथमिकता दी जाए।

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