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यूरोप के 9 देशों के सुपरमार्केट पर साइबर हमला, मचा हड़कंप

नई दिल्ली। यूरोप में सुपरमार्केट की डिजिटल व्यवस्था पर हुए साइबर हमलों ने खाद्य सुरक्षा और तकनीकी बुनियादी ढांचे की कमजोरियों को उजागर कर दिया है। 2 नवंबर 2026 को सामने आए ताजा घटनाक्रम में कम से कम नौ यूरोपीय देशों के किराना स्टोर और सुपरमार्केट की रेफ्रिजरेशन प्रणालियों में गड़बड़ी की खबर सामने आई। […]

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  • November 3, 2026 3:30 pm IST, Published 1 hour ago

नई दिल्ली। यूरोप में सुपरमार्केट की डिजिटल व्यवस्था पर हुए साइबर हमलों ने खाद्य सुरक्षा और तकनीकी बुनियादी ढांचे की कमजोरियों को उजागर कर दिया है। 2 नवंबर 2026 को सामने आए ताजा घटनाक्रम में कम से कम नौ यूरोपीय देशों के किराना स्टोर और सुपरमार्केट की रेफ्रिजरेशन प्रणालियों में गड़बड़ी की खबर सामने आई। कई स्थानों पर फ्रिज और फ्रीजर का तापमान अचानक बढ़ गया, जिसके कारण दूध, मांस, जमे हुए खाद्य पदार्थ और अन्य जल्दी खराब होने वाली वस्तुओं को हटाना पड़ा। कुछ दुकानों को बड़ी मात्रा में खाद्य सामग्री फेंकनी पड़ी।

शुरुआती रिपोर्टों में सात देशों का जिक्र था, लेकिन 3 नवंबर को सामने आई एजेंसी रिपोर्टों में प्रभावित देशों की संख्या नौ बताई गई है। इनमें बेल्जियम, एस्टोनिया, फिनलैंड, आयरलैंड, इटली, लक्जमबर्ग, नीदरलैंड, पुर्तगाल और स्वीडन शामिल हैं। इस घटनाक्रम ने यूरोप की खाद्य आपूर्ति व्यवस्था में इस्तेमाल होने वाली इंटरनेट से जुड़ी तकनीक की सुरक्षा पर नई बहस छेड़ दी है।

फ्रिज और फ्रीजर का तापमान अचानक बढ़ाया गया

रिपोर्टों के अनुसार, साइबर अपराधियों ने सुपरमार्केट में इस्तेमाल होने वाली रेफ्रिजरेशन प्रणालियों के डिजिटल नियंत्रण तक अनधिकृत पहुंच बनाने के बाद तापमान की सेटिंग में बदलाव किया। कुछ दुकानों में फ्रीजर का तापमान असामान्य रूप से बढ़कर लगभग 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है।

सामान्य तौर पर सुपरमार्केट में दूध, मांस, मछली, डेयरी उत्पाद और जमे हुए खाद्य पदार्थों को सुरक्षित रखने के लिए निश्चित तापमान बनाए रखना जरूरी होता है। तापमान में अचानक और लंबे समय तक होने वाली बढ़ोतरी से इन वस्तुओं की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। ऐसी स्थिति में ग्राहकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए संबंधित उत्पादों को बिक्री से हटाना पड़ता है।

इस घटना में भी कई दुकानों को प्रभावित खाद्य सामग्री हटाकर नए उत्पादों की व्यवस्था करनी पड़ी। इससे दुकानदारों को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ दैनिक कारोबार में परेशानी का सामना करना पड़ा।

किन देशों में सामने आए साइबर हमले के मामले?

ताजा रिपोर्टों के अनुसार, बेल्जियम और स्वीडन में कई प्रमुख खुदरा कंपनियों के स्टोर प्रभावित हुए। बेल्जियम में Carrefour, Delhaize, Colruyt और Intermarché से जुड़ी दुकानों में रेफ्रिजरेशन संबंधी समस्याएं सामने आईं। IKEA के मॉन्स स्थित स्टोर में भी फ्रीजर प्रणाली प्रभावित होने की जानकारी दी गई।

स्वीडन में ICA और Coop सुपरमार्केट समूहों ने अपने कुछ स्टोर में रेफ्रिजरेशन सिस्टम से जुड़ी परेशानी की पुष्टि की। Coop के अनुसार, उसके लगभग 800 स्टोर में से सात दुकानों पर साइबर घटना का असर पड़ा। वहीं ICA ने सीमित संख्या में दुकानों में समस्या सामने आने की बात कही।

आयरलैंड में SuperValu के संचालन से जुड़ी Musgrave कंपनी ने बताया कि उसके 13 स्टोर की रेफ्रिजरेशन प्रणालियां प्रभावित हुईं। एस्टोनिया में भी एक सुपरमार्केट की प्रणाली को निशाना बनाए जाने की खबर सामने आई। नीदरलैंड में कुछ दुकानों और खाद्य कारोबार से जुड़े प्रतिष्ठानों में परेशानी दर्ज की गई।

फिनलैंड में Kesko समूह से जुड़े कुछ छोटे किराना स्टोर में तापमान संबंधी अनियमितताएं देखी गईं। वहीं लक्जमबर्ग और पुर्तगाल में भी रेफ्रिजरेशन प्रणालियों पर साइबर हस्तक्षेप की खबरें सामने आई हैं।

फ्रांस में पहले भी हो चुका है ऐसा हमला

यूरोप में यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले 12 अक्टूबर 2026 को फ्रांस में भी सैकड़ों सुपरमार्केट और स्वतंत्र दुकानों की रेफ्रिजरेशन प्रणालियों पर साइबर हमले की खबर सामने आई थी। उस दौरान भी फ्रिज और फ्रीजर की तापमान सेटिंग में दूर से बदलाव किए जाने के कारण बड़ी मात्रा में खाद्य सामग्री खराब होने का खतरा पैदा हुआ था।

फ्रांस की घटना के बाद यूरोप में सुपरमार्केट के डिजिटल उपकरणों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई थी। नवंबर की शुरुआत में दूसरे देशों में इसी तरह की समस्याएं सामने आने से यह सवाल और गंभीर हो गया है कि क्या खाद्य भंडारण व्यवस्था को निशाना बनाकर व्यापक स्तर पर आर्थिक और व्यावसायिक नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।

हालांकि, फ्रांस और दूसरे यूरोपीय देशों में सामने आई घटनाओं के बीच सीधा संबंध अभी आधिकारिक तौर पर स्थापित नहीं हुआ है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन घटनाओं के पीछे एक ही समूह है या अलग-अलग साइबर अपराधी सक्रिय हैं।

पुराने डिजिटल उपकरण बन सकते हैं सबसे बड़ी कमजोरी

इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू पुराने डिजिटल उपकरणों और उनकी सुरक्षा व्यवस्था का है। आधुनिक सुपरमार्केट में बड़ी संख्या में फ्रिज, फ्रीजर और कोल्ड स्टोरेज यूनिट को कंप्यूटर नेटवर्क के माध्यम से नियंत्रित किया जाता है। इससे तापमान की निगरानी, बिजली की खपत और उपकरणों के रखरखाव को आसान बनाया जाता है।

लेकिन यदि इन प्रणालियों में सुरक्षा संबंधी खामियां हों, पुराने सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जा रहा हो या उपकरणों को समय पर अपडेट न किया गया हो तो साइबर अपराधियों के लिए उनमें सेंध लगाना आसान हो सकता है।

कुछ रिपोर्टों में डेनमार्क की कंपनी Danfoss से जुड़े पुराने रेफ्रिजरेशन कंट्रोल उपकरणों का उल्लेख भी किया गया है। फ्रांस की घटना के बाद कंपनी ने बताया था कि प्रभावित उपकरणों में कुछ पुराने मॉडल ऐसे थे जिन्हें अब नियमित सॉफ्टवेयर और सुरक्षा अपडेट नहीं मिलते। हालांकि, सभी प्रभावित दुकानों में एक ही तकनीकी कारण होने की पुष्टि नहीं हुई है।

खाद्य सुरक्षा पर क्यों बढ़ी चिंता?

सुपरमार्केट में रखे खाद्य पदार्थों की सुरक्षा केवल दुकानदारों के लिए ही नहीं, बल्कि आम उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण है। दूध, मांस, मछली और अन्य जल्दी खराब होने वाले खाद्य पदार्थों को निर्धारित तापमान पर रखना आवश्यक होता है।

यदि रेफ्रिजरेशन प्रणाली में छेड़छाड़ होती है तो उत्पादों की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। ऐसे उत्पादों की बिक्री रोकना और उन्हें सुरक्षित तरीके से हटाना जरूरी होता है। यही कारण है कि प्रभावित दुकानों ने एहतियात के तौर पर संदिग्ध खाद्य सामग्री को बिक्री से हटाया।

यूरोपीय अधिकारियों और खाद्य सुरक्षा से जुड़े संस्थानों के सामने अब चुनौती यह है कि डिजिटल हमले के बाद भी खाद्य आपूर्ति और भंडारण व्यवस्था को सुरक्षित बनाए रखा जाए।

जांच जारी, हमलावरों की पहचान अब तक स्पष्ट नहीं

ताजा घटनाओं के बाद बेल्जियम में संबंधित अधिकारियों और जांच एजेंसियों ने मामले को गंभीरता से लिया है। संघीय अभियोजन अधिकारियों की ओर से जांच शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई है। वहीं साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ प्रभावित प्रणालियों की तकनीकी जांच और सुरक्षा कमजोरियों का आकलन कर रहे हैं।

फिलहाल किसी संगठन या हैकर समूह ने इन हमलों की जिम्मेदारी नहीं ली है। इसलिए हमलावरों के उद्देश्य और उनकी पहचान को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

दुनिया के लिए चेतावनी है यूरोप की यह घटना

यूरोप के सुपरमार्केट में हुई यह घटना पूरी दुनिया के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी है। आज अस्पतालों, बिजलीघरों, परिवहन सेवाओं, बैंकों और खाद्य आपूर्ति प्रणालियों में डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में साइबर सुरक्षा की अनदेखी किसी भी देश के लिए गंभीर आर्थिक और सामाजिक चुनौती बन सकती है।

भारत में भी बड़े रिटेल स्टोर, कोल्ड स्टोरेज, डेयरी उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों और लॉजिस्टिक्स कंपनियों में डिजिटल निगरानी प्रणालियों का उपयोग बढ़ रहा है। इसलिए पुराने उपकरणों को अपडेट करना, नेटवर्क की नियमित जांच करना, मजबूत पासवर्ड और बहुस्तरीय सुरक्षा अपनाना बेहद जरूरी है।

यूरोप की ताजा घटना यह स्पष्ट करती है कि साइबर सुरक्षा अब केवल कंप्यूटर और मोबाइल की सुरक्षा तक सीमित नहीं है। यह सीधे तौर पर खाद्य सुरक्षा, कारोबार और आम नागरिकों के दैनिक जीवन से जुड़ चुकी है। आने वाले समय में सरकारों और कंपनियों को अपने डिजिटल बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी।

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