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परमार्थ निकेतन में बहुधार्मिक बैठक, वैश्विक शांति और सेवा पर मंथन

ऋषिकेश:। परमार्थ निकेतन  में बहुधार्मिक एक्शन कोऑर्डिनेशन कमेटी की अनुवर्ती बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न धर्मों के संतों, सामाजिक संगठनों और साझेदार संस्थानों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का आयोजन स्वामी चिदानंद सरस्वती  और  साध्वी भगवती सरस्वती  के सान्निध्य में हुआ। कार्यक्रम की पूर्व संध्या पर बैठक का उद्घाटन दीप प्रज्वलन के साथ किया […]

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  • May 21, 2026 5:50 pm IST, Published 1 hour ago

ऋषिकेश:। परमार्थ निकेतन  में बहुधार्मिक एक्शन कोऑर्डिनेशन कमेटी की अनुवर्ती बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न धर्मों के संतों, सामाजिक संगठनों और साझेदार संस्थानों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का आयोजन स्वामी चिदानंद सरस्वती  और  साध्वी भगवती सरस्वती  के सान्निध्य में हुआ।

कार्यक्रम की पूर्व संध्या पर बैठक का उद्घाटन दीप प्रज्वलन के साथ किया गया, जिसमें पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. महेंद्र नाथ पाण्डेय  सहित कई विशिष्ट अतिथि मौजूद रहे। इस दौरान संत मुरलीधर जी और अन्य धार्मिक प्रतिनिधियों की उपस्थिति भी रही।

कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार, सर्वमंगल प्रार्थना और विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों द्वारा मंगलाचरण के साथ हुई। इस अवसर पर “वसुधैव कुटुम्बकम” की भावना को केंद्र में रखते हुए शांति, करुणा और सेवा पर चर्चा की गई।

बैठक का एक महत्वपूर्ण भाग “भविष्य की प्राथमिकताएँ एवं समन्वय तंत्र” विषय पर केंद्रित रहा, जिसमें आगामी अभियानों, जनसहभागिता, युवाओं की भूमिका, स्वयंसेवी सहयोग, संस्थागत उत्तरदायित्व एवं नियमित संवाद प्रणाली को मजबूत करने पर चर्चा हुई। प्रतिभागियों से सुझाव आमंत्रित किए गये कि किस प्रकार बहुधार्मिक एक्शन कोऑर्डिनेशन कमेटी को और अधिक प्रभावशाली एवं परिणामोन्मुख बनाया जा सकता है। कार्यक्रम के पश्चात मासिक श्री राम कथा में सभी विभूतियों ने सहभाग किया। श्री राम कथा में आये विशाल जनसमूह, श्रोताओं, भक्तों को प्रेरित करने हेतु विशेष संवाद का आयोजन किया गया, जिसमें समाज में सकारात्मक परिवर्तन हेतु धर्म एवं अध्यात्म की भूमिका पर विशेष चिंतन मंथन किया।

स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि दुनिया को केवल तकनीकी विकास नहीं, बल्कि संवेदना और करुणा की भी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि धर्म का वास्तविक अर्थ मानव सेवा और पीड़ा को कम करना है। वहीं साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि सच्ची श्रद्धा केवल उपदेश तक सीमित नहीं रहती, बल्कि समाज में सक्रिय सेवा और सकारात्मक बदलाव में दिखती है।

बैठक में विभिन्न संस्थाओं और प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव और सुझाव साझा किए तथा नेटवर्क को और मजबूत करने पर जोर दिया गया। साथ ही भविष्य की प्राथमिकताओं, युवाओं की भागीदारी और संयुक्त अभियानों को प्रभावी बनाने पर चर्चा हुई।

कार्यक्रम के बाद सभी अतिथियों ने गंगा आरती में भाग लेकर विश्व शांति की प्रार्थना की। इस अवसर पर चिपको आंदोलन के प्रख्यात पर्यावरण चिंतक  सुन्दरलाल बहुगुणा को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि भी अर्पित की गई।

इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े विशिष्ट अतिथियों, धर्मगुरुओं और सामाजिक प्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। इनमें श्री मुरलीधरजी महाराज, संस्थापक एवं आध्यात्मिक प्रमुख, मानस परिवार; श्री सादिक अहमद, एसबीसी विशेषज्ञ, यूनिसेफ इंडिया कंट्री ऑफिस; पूज्य विवेक मुनि महाराज जी, आचार्य सुशील मुनि मिशन एवं भारतीय सर्व धर्म संसद (जैन धर्मगुरु) भी उपस्थित रहे। आचार्य येशी फुंटसोक, तिब्बती संसद-इन-एक्साइल के पूर्व उपाध्यक्ष एवं भारत तिब्बत सहयोग मंच के वरिष्ठ सलाहकार; सरदार परमजीत सिंह चंडोक, अध्यक्ष, दिल्ली गुरुद्वारा बंगला साहिब; तथा श्री शंकर कुमार सान्याल, अध्यक्ष, हरिजन सेवक संघ ने भी सहभाग किया।

डॉ. संचिता शेट्टी, अभिनेत्री एवं इन्फ्लुएंसर; नरेश यादव, पूर्व सांसद एवं ग्रामीण विकास के समर्थक; डॉ. मार्कंडेय राय, अध्यक्ष, ग्लोबल पीस फाउंडेशन इंडिया; तथा नंदिनी मिश्रा एवं बिभूति मिश्रा, महिला प्रबोधिनी फाउंडेशन भी कार्यक्रम में शामिल रहे। इसके साथ ही डॉ. कंचन चंदन, शिक्षण संकाय, पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़; सिद्धयोगी आदिनारायणन, अनादी फाउंडेशन; स्वामी कुमारानंद गिरि, दक्षिण-पूर्व एशिया अनादी ग्लोबल; गोमती, सीईओ, अनादी फाउंडेशन; गंगा नंदिनी, वरिष्ठ परियोजना निदेशक, ग्लोबल इंटरफेथ वॉश एलायंस; तथा रोहन मैक्लारेन, डीएसएफ एवं जीआईए भी उपस्थित रहे।

विभूतियों की गरिमामयी उपस्थितिः-

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