नई दिल्ली / नासिक: महाराष्ट्र के नासिक में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) से जुड़े एक बड़े यौन उत्पीड़न और जबरन मतांतरण (धर्म परिवर्तन) के मामले में विशेष जांच टीम (SIT) ने बड़ी कार्रवाई की है। नासिक पुलिस की एसआईटी ने शुक्रवार को आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में 1,500 पन्नों की पहली चार्जशीट दाखिल कर दी। इस पूरे मामले में कुल 9 एफआईआर दर्ज की गई हैं, जिनमें से फिलहाल देवलाली कैंप थाने में दर्ज पहले मामले में यह आरोपपत्र दायर किया गया है।
नासिक के पुलिस आयुक्त संदीप कर्णिक के निर्देशन में बनी एसआईटी ने चार्जशीट में गंभीर सबूतों का खुलासा किया है।
पुलिस बयान के अनुसार, जांच टीम को पीड़िता के जबरन मतांतरण से जुड़े पुख्ता सबूत मिले हैं, जिससे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने की बात सामने आई है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए वे मूल दस्तावेज भी जब्त कर लिए हैं, जिनका इस्तेमाल आरोपी पीड़िता का नाम और पहचान बदलने के लिए कर रहे थे। इसके अलावा, दोनों पक्षों के मोबाइल से व्हाट्सएप चैट के स्क्रीनशॉट, ईमेल ट्रेल और कई डिजिटल साक्ष्य भी बरामद किए गए हैं। मैजिस्ट्रेट के सामने 17 गवाहों के बयान भी दर्ज कराए जा चुके हैं।
नासिक रोड स्थित अतिरिक्त सत्र एवं विशेष अदालत में दाखिल किए गए इस आरोपपत्र में चार मुख्य लोगों को आरोपी बनाया गया है:
दानिश एजाज शेख
तौसीफ बिलाल अत्तार
निदा एजाज खान (एचआर एग्जीक्यूटिव)
मतीन मजीद पटेल (आरोपी को शरण देने का आरोप)
अदालत ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों की जमानत याचिका पहले ही खारिज कर दी थी, जिससे सभी आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत (जेल) में हैं।
इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय महिला आयोग की प्रमुख विजया राहटकर की अध्यक्षता में गुरुवार को एक उच्च स्तरीय सुनवाई हुई। महिला आयोग ने कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) प्रबंधन को बेहद सख्त निर्देश जारी किए हैं:
सभी 127 यूनिटों में बने कमेटी: टीसीएस को आदेश दिया गया है कि वह अगले 4 हफ्तों के भीतर देश भर में अपनी सभी 127 यूनिटों में यौन उत्पीड़न रोकथाम के लिए आंतरिक समितियां (Internal Committees) गठित करे।
POSH एक्ट का हो पालन: कंपनी को कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम (PoSH), 2013 के तहत अनिवार्य प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने को कहा गया है।
सालाना रिपोर्ट और उपस्थिति अनिवार्य: आयोग ने कंपनी को संबंधित अधिकारियों के पास अपनी वार्षिक पीओएसएच रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया है। साथ ही 4 हफ्ते बाद होने वाली अगली समीक्षा बैठक में कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति अनिवार्य कर दी है।