काठमांडू/नई दिल्ली: दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट (8,848.86 मीटर) से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। एवरेस्ट पर तिरंगा फहराकर नीचे उतर रहे दो भारतीय पर्वतारोहियों की अत्यधिक थकान और ऑक्सीजन की कमी के कारण मौत हो गई। नेपाल अभियान संचालक संघ (EOA) के महासचिव ऋषि भंडारी ने शुक्रवार को इस बात की पुष्टि की है।
मृतक पर्वतारोहियों की पहचान अरुण कुमार तिवारी और संदीप आरे के रूप में हुई है। चोटी से उतरते समय दोनों ‘डेथ जोन’ (8,000 मीटर से ऊपर का इलाका) में गंभीर रूप से बीमार हो गए थे।
वन्यजीव और पर्वतारोहण अधिकारियों के मुताबिक, दोनों पर्वतारोहियों ने अलग-अलग दिनों में एवरेस्ट फतह किया था, लेकिन लौटते वक्त उनके शरीर ने साथ छोड़ दिया।
अरुण कुमार तिवारी: अरुण ने गुरुवार शाम करीब 5:30 बजे एवरेस्ट फतह किया था। चोटी से नीचे उतरते समय हिलेरी स्टेप (शिखर के ठीक नीचे का खतरनाक हिस्सा) के पास उनकी तबीयत बेहद बिगड़ गई और अत्यधिक थकान के कारण उनकी मौत हो गई।
संदीप आरे: संदीप ने बुधवार को एवरेस्ट पर कदम रखा था। शिखर पर पहुंचने के तुरंत बाद वे ‘स्नो ब्लाइंडनेस’ (बर्फ की चमक से अंधापन) के शिकार हो गए। शेरपा रेस्क्यू टीम के 5 सदस्यों ने उन्हें किसी तरह बचाकर कैंप-2 तक पहुंचाया, लेकिन वहां पहुंचने के कुछ ही देर बाद उन्होंने दम तोड़ दिया।
अभियान आयोजकों के मुताबिक, दोनों पर्वतारोहियों को बचाने के लिए गाइडों और शेरपा रेस्क्यू टीम ने अपनी जान लगा दी थी। ऋषि भंडारी ने बताया, “गाइड्स ने उन्हें सुरक्षित नीचे लाने के लिए बहुत कड़ी मेहनत की, लेकिन अत्यधिक ऊंचाई पर ऑक्सीजन के बेहद कम स्तर और गंभीर रूप से थके होने के कारण उन्हें बचाया नहीं जा सका।”
पर्वतारोहण विशेषज्ञों के अनुसार, इस साल एवरेस्ट पर पर्वतारोहियों की भारी भीड़ है, जिसके कारण ‘ट्रैफिक जाम’ जैसी स्थिति बन रही है। बुधवार को जब संदीप आरे ने चोटी फतह की, तब उनके साथ रिकॉर्ड 274 पर्वतारोहियों ने एक ही दिन में एवरेस्ट स्केलिंग की थी।
क्या होता है डेथ जोन? एवरेस्ट में 8,000 मीटर से ऊपर के क्षेत्र को ‘डेथ जोन’ कहा जाता है। यहाँ ऑक्सीजन का स्तर सामान्य से सिर्फ एक-तिहाई रह जाता है। ऐसे में थोड़ी सी भी देरी या ज्यादा देर रुकना इंसानी फेफड़ों और दिमाग के काम करने की क्षमता को खत्म कर देता है।
बुधवार को संदीप आरे के साथ दो अन्य भारतीयों—तुलसी रेड्डी पालपुनूरी और अजय पाल सिंह धालीवाल ने भी एवरेस्ट फतह किया था। वहीं गुरुवार को अरुण तिवारी के साथ भारत के लक्ष्मीकांत मंडल ने भी चोटी पर कामयाबी हासिल की थी। इस सीजन में एवरेस्ट पर अब तक कुल पांच पर्वतारोहियों की मौत हो चुकी है।