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महिलाओं को अब ‘होममेकर’ नहीं ‘नेशन बिल्डर’ कहें

घरेलू काम की कीमत ₹30,000 महीना नई दिल्ली: देश की सर्वोच्च अदालत ने महिलाओं के सम्मान और उनके काम की महत्ता को लेकर एक युगांतकारी टिप्पणी की है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि घर संभालने वाली महिलाओं को केवल ‘होममेकर’ (गृहिणी) कहना पर्याप्त नहीं है, बल्कि वे ‘नेशन बिल्डर’ (राष्ट्र निर्माता) हैं। कोर्ट ने […]

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  • June 11, 2026 12:18 pm IST, Published 2 hours ago

घरेलू काम की कीमत ₹30,000 महीना

नई दिल्ली: देश की सर्वोच्च अदालत ने महिलाओं के सम्मान और उनके काम की महत्ता को लेकर एक युगांतकारी टिप्पणी की है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि घर संभालने वाली महिलाओं को केवल ‘होममेकर’ (गृहिणी) कहना पर्याप्त नहीं है, बल्कि वे ‘नेशन बिल्डर’ (राष्ट्र निर्माता) हैं। कोर्ट ने माना कि एक गृहिणी के श्रम की कीमत बाजार के हिसाब से कम से कम 30,000 रुपये प्रति माह होनी चाहिए।

‘परिवार की नींव हैं महिलाएं’

जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने एक दुर्घटना मामले की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। अदालत ने कहा:

“एक गृहिणी का काम सिर्फ खाना बनाना या बच्चों को पालना नहीं है। वह परिवार की नींव मजबूत करती है और अगली पीढ़ी को तैयार करती है। समाज के विकास में उनके इस योगदान को अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है, लेकिन इसकी वैल्यू अमूल्य है।”

फैसला: मुआवजे में अब नहीं होगी कटौती

यह मामला साल 2001 की एक सड़क दुर्घटना से जुड़ा था, जिसमें एक महिला की मौत हो गई थी। पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि:

  • आय का आधार: किसी दुर्घटना में महिला की मृत्यु होने पर मुआवजा केवल इस आधार पर कम नहीं किया जा सकता कि वह ‘कमाऊ’ सदस्य नहीं थी।

  • घरेलू देखभाल एक ‘मद’: कोर्ट ने मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) के तहत ‘घरेलू देखभाल के नुकसान’ को मुआवजे के एक अलग और महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में मान्यता दी है।

  • आकलन के मानक: मुआवजा तय करते समय महिला की उम्र, शिक्षा, कौशल (Skills) और उसकी पारिवारिक जिम्मेदारियों को ध्यान में रखा जाएगा।

दुर्घटना मुआवजे पर सुप्रीम कोर्ट के नए निर्देश

बेंच ने देश भर की अदालतों और मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) के लिए कुछ जरूरी गाइडलाइंस जारी की हैं:

  1. तेजी से निपटारा: मुआवजे के मामलों को लटकाया न जाए, इनका निपटारा जल्द से जल्द हो।

  2. हाईकोर्ट की निगरानी: सभी राज्यों के चीफ जस्टिस इन मामलों की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करें।

  3. नियमों का सख्ती से पालन: मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 169 के तहत तय प्रक्रिया का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए।

फैसले के मायने

कानूनी जानकारों का मानना है कि इस फैसले से उन लाखों परिवारों को संबल मिलेगा जो कानूनी लड़ाइयों में ‘होममेकर’ की आय न होने के कारण उचित मुआवजे से वंचित रह जाते थे। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि एक महिला का घर में बिताया गया समय ‘खाली’ नहीं है, बल्कि वह देश की अर्थव्यवस्था और भविष्य के निर्माण में लगा एक निवेश है।

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