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पंचायत चुनाव में फर्जी मतदान पर लगेगी लगाम, दोबारा वोट डालने वाले तुरंत होंगे चिन्हित

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने तकनीक का सहारा लेने का फैसला किया है। अब पंचायत चुनावों में फर्जी मतदान, प्रतिरूप मतदान (बोगस वोटिंग) और एक से अधिक बार वोट डालने की कोशिश करने वालों पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। इसके […]

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  • June 11, 2026 2:30 pm IST, Published 1 hour ago

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने तकनीक का सहारा लेने का फैसला किया है। अब पंचायत चुनावों में फर्जी मतदान, प्रतिरूप मतदान (बोगस वोटिंग) और एक से अधिक बार वोट डालने की कोशिश करने वालों पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। इसके लिए फेस रिकग्निशन सिस्टम (एफआरएस) लागू किया जाएगा, जो मतदान केंद्र पर मतदाता की पहचान का तत्काल सत्यापन करेगा। आयोग का दावा है कि इस व्यवस्था के लागू होने के बाद कोई भी व्यक्ति दोबारा मतदान नहीं कर सकेगा और यदि ऐसा प्रयास किया गया तो वह तुरंत पकड़ में आ जाएगा।

चेहरे से होगी पहचान, तुरंत सामने आएगा पूरा रिकॉर्ड

राज्य निर्वाचन आयोग के अधिकारियों के अनुसार मतदान केंद्र पर पहुंचने वाले प्रत्येक मतदाता की फोटो डिजिटल माध्यम से ली जाएगी। यह फोटो पहले से उपलब्ध निर्वाचन रिकॉर्ड और मतदाता डाटाबेस से मिलाई जाएगी। यदि कोई व्यक्ति पहले ही मतदान कर चुका होगा या किसी दूसरे मतदाता के नाम पर वोट डालने की कोशिश करेगा तो सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी कर देगा।

  • आगामी पंचायत चुनावों में फेस रिकग्निशन सिस्टम का इस्तेमाल
  • चुनावी प्रक्रिया होगी अधिक पारदर्शी
  • सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम

इस तकनीक के माध्यम से मतदान कर्मियों को भी सहायता मिलेगी और विवाद की स्थिति में तत्काल सत्यापन संभव होगा। आयोग का मानना है कि पंचायत चुनावों में बड़ी संख्या में मतदान केंद्र होने के कारण कई बार पहचान संबंधी गड़बड़ियां सामने आती हैं। नई व्यवस्था से ऐसी समस्याओं पर काफी हद तक रोक लगेगी।

प्रदेश में 15 करोड़ से अधिक मतदाता

उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य होने के साथ-साथ सबसे बड़ा चुनावी क्षेत्र भी है। पंचायत चुनावों में करोड़ों मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करते हैं। ऐसे में निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करना निर्वाचन आयोग के लिए बड़ी चुनौती होती है। इसी चुनौती से निपटने के लिए आयोग ने आधुनिक तकनीक के उपयोग को प्राथमिकता दी है।

सबसे अधिक मतदाता वाले जिले

आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में सबसे अधिक मतदाता जौनपुर जिले में हैं, जहां करीब 36.97 लाख मतदाता पंजीकृत हैं। इसके बाद आजमगढ़ (35.76 लाख) और प्रयागराज (34.95 लाख) का स्थान है।

सबसे अधिक मतदाताओं वाले 10 जिले इस प्रकार हैं—

जिला

मतदाता

जौनपुर

36.97 लाख

आजमगढ़

35.76 लाख

प्रयागराज

34.95 लाख

सीतापुर

31.18 लाख

गोरखपुर

29.63 लाख

लखीमपुर खीरी

28.87 लाख

हरदोई

28.73 लाख

गाजीपुर

28.11 लाख

बलिया

26.97 लाख

गोंडा

26.74 लाख

इन जिलों में मतदान का प्रतिशत और मतदाताओं की संख्या दोनों ही अधिक होने के कारण चुनावी प्रबंधन को लेकर विशेष रणनीति तैयार की जा रही है।

सबसे कम मतदाता वाले जिले

दूसरी ओर कुछ जिलों में मतदाताओं की संख्या अपेक्षाकृत कम है। इनमें गौतमबुद्धनगर सबसे नीचे है, जहां लगभग 2.09 लाख मतदाता हैं।

जिला

मतदाता

गौतमबुद्धनगर

2.09 लाख

महोबा

5.88 लाख

चित्रकूट

7.00 लाख

हमीरपुर

7.28 लाख

शामली

7.47 लाख

हापुड़

7.47 लाख

बागपत

8.11 लाख

ललितपुर

8.57 लाख

श्रावस्ती

8.58 लाख

औरैया

9.57 लाख

जुलाई में समाप्त होगा पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल

पंचायती राज संस्थाओं के मौजूदा कार्यकाल को लेकर भी प्रशासनिक तैयारियां तेज हो गई हैं। जानकारी के अनुसार जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल 11 जुलाई को समाप्त हो जाएगा, जबकि ब्लॉक प्रमुखों का कार्यकाल 19 जुलाई को खत्म होगा। यदि निर्धारित समय तक चुनाव प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती है तो शासन स्तर पर वैकल्पिक व्यवस्था या कार्यकाल विस्तार जैसे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।

ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। कई जनप्रतिनिधियों और संगठनों ने समय पर चुनाव कराने की मांग उठाई है ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।

चुनावी धांधली पर प्रभावी रोक की उम्मीद

राजनीतिक और प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि फेस रिकग्निशन सिस्टम के प्रयोग से पंचायत चुनावों में पारदर्शिता बढ़ेगी। इससे न केवल फर्जी मतदान पर रोक लगेगी बल्कि चुनाव परिणामों की विश्वसनीयता भी बढ़ेगी। ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाले चुनावों में कई बार एक ही व्यक्ति द्वारा कई बार मतदान करने या दूसरे मतदाता के नाम पर वोट डालने की शिकायतें सामने आती रही हैं। नई तकनीक ऐसी घटनाओं को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

राज्य निर्वाचन आयोग का कहना है कि उसका लक्ष्य प्रत्येक पात्र मतदाता को स्वतंत्र, निष्पक्ष और सुरक्षित मतदान का अवसर उपलब्ध कराना है। इसी उद्देश्य से तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था विकसित की जा रही है। यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो भविष्य में स्थानीय निकाय चुनावों में भी इसका व्यापक उपयोग किया जा सकता है।

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