नई दिल्ली। ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के बजाय नए मोर्चों पर फैलता नजर आ रहा है। यमन के हूती समूह से जुड़े ताजा हमले ने समुद्री व्यापार की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। वहीं स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ईरान की सख्त स्थिति ने वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर दबाव और बढ़ा दिया है। हालिया घटनाक्रमों ने उन उम्मीदों को झटका दिया है कि संघर्ष जल्द स्थिरता की ओर बढ़ सकता है।
ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, बाब अल-मंदेब के आसपास एक मालवाहक जहाज पर हुए संदिग्ध हूती हमले में छह लोगों की मौत की सूचना सामने आई है। इससे लाल सागर और आसपास के समुद्री रास्तों में जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता एक बार फिर गहरा गई है।
बाब अल-मंदेब और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दोनों ही वैश्विक व्यापार के लिए बेहद अहम समुद्री मार्ग हैं। एक तरफ लाल सागर के रास्ते एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व के बीच सामान की आवाजाही प्रभावित हो सकती है, वहीं होर्मुज दुनिया के प्रमुख ऊर्जा परिवहन मार्गों में शामिल है। ताजा घटनाक्रमों के बीच होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भारी कमी दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार को इस समुद्री मार्ग से केवल छह जहाज गुजरे, जो सामान्य आवाजाही की तुलना में बेहद कम है। इससे संकेत मिलता है कि कंपनियां और जहाज संचालक सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए अतिरिक्त सावधानी बरत रहे हैं।
ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत को लेकर भी फिलहाल कोई स्पष्ट सफलता दिखाई नहीं दे रही है। होर्मुज को फिर से सामान्य अंतरराष्ट्रीय आवाजाही के लिए खोलने की शर्तों पर दोनों पक्षों के बीच मतभेद बने हुए हैं। ईरान की ओर से समुद्री मार्ग को लेकर सख्त रुख और अमेरिकी दबाव के बीच स्थिति जटिल बनी हुई है। होर्मुज में लंबे समय तक व्यवधान का असर केवल क्षेत्रीय व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा। इस रास्ते से ऊर्जा की बड़ी मात्रा वैश्विक बाजारों तक पहुंचती है। इसलिए यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने पर कच्चे तेल, गैस और समुद्री परिवहन की लागत पर सीधा दबाव पड़ सकता है।
पश्चिम एशिया में समुद्री सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंता का असर तेल बाजार में भी दिखाई दे रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के साथ बाजार में यह आशंका बढ़ रही है कि आपूर्ति व्यवस्था सामान्य होने में अपेक्षा से अधिक समय लग सकता है। ऊर्जा बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि होर्मुज और बाब अल-मंदेब दोनों मार्गों पर जोखिम बढ़ता है तो जहाजों को लंबे वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ सकता है। इससे यात्रा का समय और माल ढुलाई खर्च बढ़ सकता है। इसका असर आगे चलकर ईंधन, परिवहन और कई औद्योगिक उत्पादों की कीमतों पर पड़ने की संभावना रहती है।
भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने पर निवेशक आम तौर पर जोखिम वाली परिसंपत्तियों को लेकर सतर्क हो जाते हैं। तेल की कीमतों में उछाल, सप्लाई चेन में संभावित व्यवधान और संघर्ष के लंबा खिंचने की आशंका से शेयर बाजारों में भी दबाव देखने को मिल सकता है। हूती हमले और होर्मुज संकट एक साथ सामने आने से वैश्विक समुद्री व्यापार के सामने दोहरे जोखिम की स्थिति बन रही है। अगर प्रमुख समुद्री मार्गों पर जहाजों की आवाजाही लंबे समय तक बाधित रहती है तो कंपनियों को वैकल्पिक मार्ग अपनाने पड़ सकते हैं।
इसका असर सिर्फ तेल पर नहीं, बल्कि कंटेनर शिपिंग, बीमा, माल ढुलाई और वैश्विक सप्लाई चेन पर भी पड़ सकता है। संघर्ष जितना लंबा चलेगा, उसका आर्थिक असर उतना व्यापक होने की आशंका रहेगी। फिलहाल ईरान-अमेरिका संघर्ष में किसी स्थायी समाधान के संकेत स्पष्ट नहीं हैं। समुद्री मार्गों पर जारी हमले और होर्मुज को लेकर बनी अनिश्चितता ने वैश्विक बाजारों की चिंता बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में समुद्री सुरक्षा, तेल की कीमत और कूटनीतिक बातचीत इस संकट की दिशा तय करने वाले अहम कारक होंगे।