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RSS शताब्दी वर्ष में भागवत का विदेश दौरा, न्यूयॉर्क में जुटेगा समुदाय

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत 25 अगस्त से अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन के दौरे पर जाने वाले हैं। यह यात्रा संघ के शताब्दी वर्ष के दौरान हो रही है, इसलिए इसे संगठन की विदेशों में गतिविधियों और भारतीय मूल के लोगों के साथ संवाद के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यात्रा […]

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Gauravshali Bharat News
  • August 11, 2026 2:38 pm IST, Published 17 minutes ago

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत 25 अगस्त से अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन के दौरे पर जाने वाले हैं। यह यात्रा संघ के शताब्दी वर्ष के दौरान हो रही है, इसलिए इसे संगठन की विदेशों में गतिविधियों और भारतीय मूल के लोगों के साथ संवाद के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यात्रा के दौरान भागवत भारतीय समुदाय के लोगों के साथ-साथ विभिन्न स्थानीय संगठनों और सामाजिक प्रतिनिधियों से मुलाकात कर सकते हैं।

इस दौरे का सबसे प्रमुख कार्यक्रम 29 अगस्त को न्यूयॉर्क में प्रस्तावित है। यहां मोहन भागवत हिंदू अमेरिकियों की एक बड़ी सभा को संबोधित करेंगे। आयोजकों के अनुसार, ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ नाम से होने वाले इस कार्यक्रम में अमेरिका के अलग-अलग हिस्सों से हिंदू सांस्कृतिक, आध्यात्मिक, सेवा और सामुदायिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

यह आयोजन रक्षाबंधन के आसपास आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम की थीम में समुदाय के बीच एकता, सामाजिक सद्भाव, नागरिक जिम्मेदारी और विभिन्न धार्मिक समूहों के बीच बेहतर संवाद को महत्व दिया गया है। आयोजकों का कहना है कि इसका उद्देश्य अलग-अलग संगठनों और समुदायों को एक साझा मंच पर लाकर आपसी सहयोग की भावना को मजबूत करना है।

कार्यक्रम का आयोजन ‘अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग’ की ओर से सैकड़ों सहयोगी संगठनों के साथ मिलकर किया जा रहा है। आयोजकों ने इसे अमेरिका में होने वाले बड़े और विविध हिंदू सामुदायिक आयोजनों में शामिल बताया है। इसमें धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ सामाजिक सेवा और नागरिक भागीदारी से जुड़े विषयों पर भी चर्चा होने की संभावना है।

इस आयोजन की अवधारणा में भारतीय दर्शन के प्रसिद्ध विचार ‘वसुधैव कुटुंबकम’ को भी प्रमुख आधार बनाया गया है। इसका अर्थ पूरी दुनिया को एक परिवार के रूप में देखने से है। आयोजकों के अनुसार, इसी भावना के आधार पर आपसी सम्मान, संवाद, सेवा और साझा जिम्मेदारी को आगे बढ़ाने का संदेश दिया जाएगा।

मोहन भागवत की यात्रा केवल न्यूयॉर्क तक सीमित नहीं रहेगी। अमेरिका के अलावा वह कनाडा और ब्रिटेन भी जाएंगे। इन देशों में भारतीय मूल के लोगों तथा विभिन्न स्थानीय संगठनों के प्रतिनिधियों से बातचीत प्रस्तावित है। इन मुलाकातों में सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दों के साथ समुदाय से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श हो सकता है।

आरएसएस के प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने भागवत की विदेश यात्रा की जानकारी साझा की है। संघ के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर संगठन देश और विदेश में कई तरह के कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। ऐसे में भागवत का तीन देशों का दौरा शताब्दी वर्ष की गतिविधियों का एक अहम हिस्सा माना जा रहा है।

अमेरिका में भारतीय मूल की आबादी बड़ी संख्या में है और वहां कई हिंदू संगठन सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक क्षेत्रों में सक्रिय हैं। न्यूयॉर्क में प्रस्तावित सभा के जरिए इन संगठनों के बीच संपर्क और संवाद को बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। कार्यक्रम में विभिन्न पृष्ठभूमि के संगठनों की भागीदारी इसे व्यापक सामुदायिक मंच का रूप दे सकती है।

आयोजकों के मुताबिक कार्यक्रम का फोकस किसी एक संगठन तक सीमित रखने के बजाय व्यापक हिंदू समुदाय को साथ लाने पर है। इसके जरिए सामाजिक जिम्मेदारी, सेवा और सामुदायिक सहयोग जैसे मुद्दों को भी सामने लाने की तैयारी है। रक्षाबंधन के अवसर के आसपास होने के कारण कार्यक्रम में भाईचारे और एकता की भावना को भी विशेष महत्व दिया जा सकता है।

भागवत के विदेश दौरे को संघ के अंतरराष्ट्रीय संपर्क के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। हालांकि यात्रा के दौरान होने वाली प्रत्येक बैठक और बातचीत का विस्तृत एजेंडा अलग-अलग स्तर पर सामने आना बाकी है, लेकिन न्यूयॉर्क का कार्यक्रम पहले से ही प्रमुख आकर्षण बना हुआ है।

कुल मिलाकर, मोहन भागवत का आगामी अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन दौरा संघ के शताब्दी वर्ष के दौरान हो रहा एक महत्वपूर्ण दौरा है। न्यूयॉर्क में 29 अगस्त को होने वाला ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ इसका प्रमुख सार्वजनिक कार्यक्रम होगा। आयोजकों की ओर से एकता, सेवा, सामाजिक सद्भाव और आपसी सम्मान को केंद्र में रखने की बात कही गई है। भारतीय दर्शन के ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के संदेश के साथ होने वाला यह आयोजन अमेरिका में हिंदू समुदाय के विभिन्न संगठनों को एक मंच पर लाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

 

 

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