आगरा-लखनऊ से पूर्वांचल तक सफर होगा आसान, 70% जमीन खरीदी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे नेटवर्क को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी कड़ी जुड़ने जा रही है। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाली लिंक एक्सप्रेसवे परियोजना पर काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में भी महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, प्रस्तावित लिंक […]

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  • August 10, 2026 9:00 pm IST, Published 1 hour ago

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे नेटवर्क को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी कड़ी जुड़ने जा रही है। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाली लिंक एक्सप्रेसवे परियोजना पर काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में भी महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, प्रस्तावित लिंक एक्सप्रेसवे के लिए करीब 70 प्रतिशत भूमि खरीदी जा चुकी है, जिससे परियोजना के निर्माण की राह काफी हद तक आसान हो गई है।

यह परियोजना इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि इसके पूरा होने के बाद उत्तर प्रदेश के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों के बीच एक्सप्रेसवे के जरिए सीधा संपर्क और मजबूत होगा। इससे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर आने वाले वाहनों को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे तक पहुंचने के लिए अलग-अलग मार्गों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

करीब 51 किलोमीटर का होगा लिंक एक्सप्रेसवे

आगरा-लखनऊ और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे को जोड़ने के लिए प्रस्तावित लिंक एक्सप्रेसवे की लंबाई को लेकर अलग-अलग चरणों में अलग आंकड़े सामने आए हैं। शुरुआती योजना में करीब 60 किलोमीटर लंबी लिंक सड़क की बात सामने आई थी, जबकि बाद की परियोजना संबंधी रिपोर्टों में करीब 49 से 51 किलोमीटर के कॉरिडोर का उल्लेख किया गया है।

परियोजना का उद्देश्य केवल दो एक्सप्रेसवे को जोड़ना नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश के बड़े एक्सप्रेसवे नेटवर्क को आपस में जोड़कर तेज और निर्बाध आवागमन का ढांचा तैयार करना है। यूपीईडा की वेबसाइट पर इस लिंक एक्सप्रेसवे के लिए ठेकेदारों से तकनीकी और वित्तीय प्रस्ताव आमंत्रित किए जाने की जानकारी भी दर्ज है।

70 प्रतिशत जमीन खरीद पूरी होने से बढ़ी उम्मीद

इस परियोजना में सबसे महत्वपूर्ण चुनौती भूमि अधिग्रहण रही है। किसी भी ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के निर्माण से पहले किसानों और अन्य भूमि मालिकों से जमीन लेना जरूरी होता है। जमीन उपलब्ध होने के बाद ही निर्माण एजेंसियां परियोजना के विभिन्न हिस्सों पर तेजी से काम शुरू कर सकती हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, लिंक एक्सप्रेसवे के लिए करीब 70 प्रतिशत भूमि खरीद का काम पूरा हो चुका है। इसका मतलब है कि परियोजना के लिए आवश्यक जमीन का बड़ा हिस्सा उपलब्ध कराने की दिशा में प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण प्रगति हो चुकी है।

मई 2026 में भी मुख्यमंत्री स्तर पर आगरा-लखनऊ-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे समेत कई परियोजनाओं के लिए आवश्यक भूमि अधिग्रहण को तेजी से पूरा करने पर जोर दिया गया था।

छह लेन की सड़क से मिलेगी तेज कनेक्टिविटी

लिंक परियोजना का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य लखनऊ के बाहरी हिस्सों के जरिए दोनों प्रमुख एक्सप्रेसवे को जोड़ना है। इससे लंबी दूरी की यात्रा करने वाले वाहनों को शहर के भीतरी हिस्सों में प्रवेश किए बिना बेहतर कनेक्टिविटी मिल सकती है। जनवरी 2026 की रिपोर्ट में इस कनेक्टिंग रोड को छह लेन चौड़ा बताए जाने और भूमि अधिग्रहण शुरू होने की जानकारी सामने आई थी।

इस कनेक्टिविटी का असर केवल निजी वाहनों तक सीमित नहीं रहेगा। माल ढुलाई करने वाले ट्रक, लॉजिस्टिक्स वाहन और दूसरे व्यावसायिक वाहनों के लिए भी तेज मार्ग उपलब्ध होने की उम्मीद है। इससे माल को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बाजारों से पूर्वी उत्तर प्रदेश तक पहुंचाने में सुविधा हो सकती है।

यूपी के एक्सप्रेसवे नेटवर्क को मिलेगा बड़ा फायदा

उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में एक्सप्रेसवे नेटवर्क का तेजी से विस्तार हुआ है। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पश्चिमी उत्तर प्रदेश और लखनऊ के बीच महत्वपूर्ण संपर्क उपलब्ध कराता है, जबकि पूर्वांचल एक्सप्रेसवे लखनऊ से पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों तक पहुंच को आसान बनाता है।

दोनों को जोड़ने वाला लिंक बनने के बाद यात्रियों को एक बड़े एक्सप्रेसवे कॉरिडोर का फायदा मिल सकता है। इसके अलावा राज्य में पहले से मौजूद और प्रस्तावित अन्य एक्सप्रेसवे परियोजनाओं के साथ भी इंटरकनेक्टिविटी बढ़ाने की दिशा में यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

यूपीईडा की आधिकारिक वेबसाइट पर भी आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे को जोड़ने वाली लिंक परियोजना के लिए निविदा प्रक्रिया से संबंधित जानकारी उपलब्ध है।

कारोबार और लॉजिस्टिक्स को मिल सकता है फायदा

बेहतर एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी का सीधा असर कारोबार और लॉजिस्टिक्स पर पड़ सकता है। तेज सड़क संपर्क से माल की आवाजाही का समय घटाने में मदद मिलती है। इससे परिवहन लागत में कमी और सप्लाई चेन की दक्षता बढ़ने की संभावना रहती है।

पूर्वांचल के कृषि उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों से सामान को पूर्वी जिलों तक भेजने के लिए भी बेहतर सड़क नेटवर्क उपयोगी साबित हो सकता है। इसके अलावा एक्सप्रेसवे के आसपास वेयरहाउसिंग, ट्रांसपोर्ट, होटल, ढाबे और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के विकसित होने की संभावना बढ़ सकती है।

किसानों के लिए भूमि अधिग्रहण बना अहम चरण

ऐसी परियोजनाओं में किसानों की जमीन अधिग्रहण और मुआवजे की प्रक्रिया सबसे संवेदनशील चरणों में होती है। सरकार और प्रशासन के सामने चुनौती रहती है कि परियोजना के लिए आवश्यक जमीन उपलब्ध कराने के साथ प्रभावित भूमि मालिकों की प्रक्रिया भी नियमों के अनुसार पूरी की जाए।

70 प्रतिशत भूमि खरीद का आंकड़ा सामने आने के बाद अब शेष जमीन की प्रक्रिया पूरी करना परियोजना के लिए अगला महत्वपूर्ण लक्ष्य होगा। इसके बाद निर्माण कार्य को गति देने की संभावना बढ़ेगी।

कब शुरू होगा पूरा कॉरिडोर?

फिलहाल लिंक एक्सप्रेसवे की पूरी परियोजना के निर्माण और यातायात के लिए खोलने की अंतिम तारीख को लेकर स्पष्ट समयसीमा बताना जल्दबाजी होगी। परियोजना में भूमि अधिग्रहण, डिजाइन, टेंडर, निर्माण और अन्य तकनीकी चरण पूरे होने हैं। इसलिए अंतिम समयसीमा संबंधित विभाग की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी।

हालांकि, भूमि खरीद में 70 प्रतिशत तक प्रगति और ठेकेदार चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ना इस परियोजना के लिए सकारात्मक संकेत है।

यात्रियों को क्या होगा फायदा?

परियोजना पूरी होने के बाद आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के बीच सीधा संपर्क मजबूत होगा। इसका सबसे बड़ा फायदा लंबी दूरी के यात्रियों और मालवाहक वाहनों को मिल सकता है। पश्चिम से पूर्व की ओर जाने वाले वाहनों के लिए यात्रा अधिक सुगम होने की उम्मीद है।

कुल मिलाकर, यह लिंक एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क को एक-दूसरे से जोड़ने की बड़ी योजना का हिस्सा है। 70 प्रतिशत भूमि खरीद पूरी होना परियोजना के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि शेष भूमि अधिग्रहण और निर्माण संबंधी प्रक्रियाएं कितनी तेजी से पूरी होती हैं।

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