नई दिल्ली: भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान (Gilgit-Baltistan) में 7 जून 2026 को होने वाले विधानसभा चुनावों का कड़ा विरोध किया है। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने एक आधिकारिक बयान जारी कर पाकिस्तान की इस योजना को पूरी तरह से अमान्य और अस्वीकार्य बताया है।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने साफ तौर पर दोहराया कि पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख—जिसमें गिलगित-बाल्टिस्तान का क्षेत्र भी शामिल है—भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, पाकिस्तान को इन भारतीय क्षेत्रों में किसी भी तरह की राजनीतिक या चुनावी प्रक्रिया चलाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। भारत ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान द्वारा कराई जा रही इस तरह की कोई भी दिखावटी गतिविधि वहां की जमीनी हकीकत को बदल नहीं सकती और न ही उसके अवैध कब्जे को कोई वैधता दे सकती है।
रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले इस पर्वतीय क्षेत्र की 24 विधानसभा सीटों पर रविवार (7 जून) को मतदान होना तय हुआ है। इससे पहले यहां नवंबर 2020 में आम चुनाव आयोजित किए गए थे, जिसमें इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने जीत दर्ज की थी। 5 साल का कार्यकाल होने के कारण इस विधानसभा की अवधि नवंबर 2025 में ही समाप्त हो गई थी।
नियमों के मुताबिक चुनाव जनवरी 2026 में कराए जाने थे, लेकिन गिलगित-बाल्टिस्तान में सर्दियों के दौरान होने वाली भारी बर्फबारी और बेहद खराब प्रशासनिक व मौसम संबंधी परिस्थितियों के कारण मतदान को टालना पड़ा था। इसके बाद चुनाव आयोग ने इसके लिए 7 जून 2026 की नई तारीख मुकर्रर की।
पाकिस्तान के प्रशासनिक ढांचे में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) और गिलगित-बाल्टिस्तान को अलग-अलग तरीके से संभाला जाता है। जहां PoK को पाकिस्तान कागजों पर अपना अलग संविधान, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री देकर स्वायत्तता का दिखावा करता है, वहीं गिलगित-बाल्टिस्तान को दशकों तक सीधे इस्लामाबाद की संघीय सरकार द्वारा नियंत्रित किया जाता रहा। यहाँ के लोगों को न तो पूर्ण प्रांतीय अधिकार मिले थे और न ही नेशनल असेंबली (संसद) में प्रतिनिधित्व।
इस व्यवस्था को बदलने के लिए साल 2009 में पहली बार ‘गिलगित-बाल्टिस्तान एम्पावरमेंट एंड सेल्फ-गवर्नेंस ऑर्डर’ लागू कर स्थानीय असेंबली बनाई गई। इसके बाद साल 2018 में नया बदलाव करते हुए ‘गिलगित-बाल्टिस्तान ऑर्डर 2018’ पेश किया गया, जिसने स्थानीय मुख्यमंत्री और विधानसभा को कुछ अतिरिक्त प्रशासनिक शक्तियां दीं। वर्तमान में हो रहा यह चुनाव इसी ‘ऑर्डर ऑफ 2018’ के तहत आयोजित होने वाला दूसरा विधानसभा चुनाव है। भारत हमेशा से इस पूरे क्षेत्र में पाकिस्तान द्वारा किए जा रहे किसी भी तरह के ‘मटेरियल चेंज’ (भौतिक बदलावों) का पुरजोर विरोध करता आया है।