ताजा आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में पिछले महीने करीब 1.72 लाख नई नौकरियां जुड़ीं, जबकि बाजार का अनुमान लगभग 85 हजार नई नौकरियों का था। रोजगार क्षेत्र की यह मजबूती अमेरिकी अर्थव्यवस्था की बेहतर स्थिति को दर्शाती है, लेकिन निवेशकों को आशंका है कि इससे अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकता है या आगे सख्ती कर सकता है।
इसी आशंका के चलते अमेरिकी शेयर बाजारों में बिकवाली देखने को मिली। विशेष रूप से टेक्नोलॉजी शेयरों पर दबाव बढ़ा और नैस्डैक सूचकांक में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों का मानना है कि ऊंची ब्याज दरें कंपनियों की लागत बढ़ाती हैं और शेयर बाजार के मूल्यांकन पर असर डालती हैं।
इस बीच पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी ने भी महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। यदि मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ता है, तो फेडरल रिजर्व के लिए मौद्रिक नीति में नरमी लाना और कठिन हो सकता है।
वैश्विक संकेतों का असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दिया। गिफ्ट निफ्टी में गिरावट दर्ज की गई, जिससे संकेत मिल रहे हैं कि घरेलू शेयर बाजार पर भी दबाव बन सकता है। हालांकि वास्तविक प्रभाव का आकलन बाजार खुलने के बाद ही स्पष्ट होगा।
आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अमेरिकी ब्याज दरों, महंगाई के आंकड़ों और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर बनी रहेगी, जो बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।