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मिर्जापुर में अवैध गैस सिलेंडर भंडारण का बड़ा खुलासा, एजेंसी मालिक और मैनेजर पर मुकदमा दर्ज

मिर्जापुर जिले के अहरौरा क्षेत्र में अवैध रूप से गैस सिलेंडरों के भंडारण का बड़ा मामला सामने आया है। प्रशासन और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में सैकड़ों कमर्शियल गैस सिलेंडर बरामद किए गए हैं। इस कार्रवाई के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एजेंसी संचालकों के […]

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  • May 28, 2026 2:21 pm IST, Published 2 hours ago

मिर्जापुर जिले के अहरौरा क्षेत्र में अवैध रूप से गैस सिलेंडरों के भंडारण का बड़ा मामला सामने आया है। प्रशासन और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में सैकड़ों कमर्शियल गैस सिलेंडर बरामद किए गए हैं। इस कार्रवाई के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एजेंसी संचालकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि बिना अनुमति और सुरक्षा मानकों का पालन किए बड़ी संख्या में सिलेंडर एक स्थान पर रखे गए थे, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता था।

जानकारी के अनुसार, अहरौरा क्षेत्र में अवैध तरीके से गैस सिलेंडर रखे जाने की सूचना पुलिस और प्रशासन को मिली थी। सूचना मिलते ही संबंधित विभागों की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की गई। जांच के दौरान वहां बड़ी संख्या में कमर्शियल गैस सिलेंडर पाए गए। अधिकारियों ने जब दस्तावेजों और भंडारण से जुड़ी अनुमति के बारे में पूछताछ की तो संतोषजनक जवाब नहीं मिल सका। इसके बाद प्रशासन ने पूरे मामले की रिपोर्ट तैयार कर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी।

बताया जा रहा है कि मौके से करीब 256 कमर्शियल गैस सिलेंडर बरामद किए गए। ये सभी सिलेंडर अहरौरा क्षेत्र की सबरवाल भारत गैस एजेंसी से जुड़े बताए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर सिलेंडरों का भंडारण सुरक्षा मानकों के खिलाफ था। यदि किसी कारण आग लग जाती या गैस रिसाव होता तो आसपास के लोगों की जान खतरे में पड़ सकती थी। इसी आशंका को देखते हुए प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई की।

जिलाधिकारी की अनुमति मिलने के बाद पूर्ति निरीक्षक राघवन त्रिपाठी ने मामले में तहरीर दी। तहरीर के आधार पर एजेंसी मालिक करण सिंह और एजेंसी मैनेजर मनीष कुमार सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। दोनों पर आवश्यक वस्तु अधिनियम की धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस ने बताया कि मामले में आगे की जांच जारी है और जांच के आधार पर अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है।

प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान एजेंसी संचालकों से सिलेंडरों के भंडारण से संबंधित वैध कागजात मांगे गए थे, लेकिन वे स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। इसके बाद अधिकारियों ने माना कि सिलेंडर अवैध तरीके से रखे गए थे। इसी आधार पर थाना स्तर पर अपराध संख्या 162/26 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

कार्रवाई के बाद बरामद गैस सिलेंडरों को भारत पेट्रोलियम के अधिकारियों की सुपुर्दगी में दे दिया गया है। बीपीसीएल के सेल्स ऑफिसर समर्थ गुप्ता की देखरेख में सिलेंडरों को सुरक्षित स्थान पर भेजा गया। प्रशासन ने कहा कि सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना की संभावना न रहे।

कैंट थाना प्रभारी शिवाकांत मिश्रा ने बताया कि पूर्ति निरीक्षक की तहरीर के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अब पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में सिलेंडरों को किस उद्देश्य से रखा गया था। यह भी जांच की जा रही है कि कहीं इन सिलेंडरों का उपयोग कालाबाजारी या अन्य अवैध गतिविधियों में तो नहीं किया जा रहा था।

स्थानीय लोगों के अनुसार, जिस स्थान पर सिलेंडर रखे गए थे वहां लंबे समय से गतिविधियां चल रही थीं, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि इतनी बड़ी संख्या में गैस सिलेंडर मौजूद हैं। छापेमारी की खबर फैलते ही आसपास के क्षेत्र में लोगों की भीड़ जमा हो गई। लोगों ने प्रशासन की कार्रवाई को जरूरी बताते हुए कहा कि समय रहते कार्रवाई नहीं होती तो बड़ा हादसा हो सकता था।

प्रशासन ने साफ किया है कि जिले में अवैध भंडारण, कालाबाजारी और सुरक्षा मानकों के उल्लंघन के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। अधिकारियों ने गैस एजेंसियों और व्यापारियों को चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस और पूर्ति विभाग की टीम पूरे मामले की गहन जांच में जुटी हुई है।

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