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राम मंदिर चढ़ावे में हेराफेरी का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट

निष्पक्षता के लिए CBI जांच और FIR दर्ज करने की उठी मांग नई दिल्ली: अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान और चढ़ावे के कथित गलत इस्तेमाल का मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत की चौखट पर पहुंच गया है। इस पूरे प्रकरण में औपचारिक एफआईआर (FIR) दर्ज करने और […]

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  • June 15, 2026 1:07 pm IST, Published 2 days ago

निष्पक्षता के लिए CBI जांच और FIR दर्ज करने की उठी मांग

नई दिल्ली: अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान और चढ़ावे के कथित गलत इस्तेमाल का मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत की चौखट पर पहुंच गया है। इस पूरे प्रकरण में औपचारिक एफआईआर (FIR) दर्ज करने और अदालत की सीधी निगरानी में स्वतंत्र जांच कराने के निर्देश देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (अर्जी) दाखिल की गई है।

यह अर्जी एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड अनूप प्रकाश अवस्थी द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को संबोधित करते हुए दायर की गई है। अर्जी में मांग की गई है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) जैसी किसी बड़ी और स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी से जांच कराई जाए।

‘लाखों भक्तों की आस्था का सवाल, प्रशासनिक जांच नाकाफी’

याचिकाकर्ता ने स्पष्ट किया कि उनका मकसद मंदिर ट्रस्ट के सदस्यों पर सीधे आरोप लगाना नहीं है, जिन्होंने बहुमूल्य सेवाएं दी हैं। हालांकि, करोड़ों भक्तों की गहरी आस्था और पवित्र चढ़ावे से जुड़े होने के कारण इस मामले में सामान्य वित्तीय विवादों से कहीं ज्यादा पारदर्शिता की जरूरत है।

अर्जी में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित जांच तंत्र पर सवाल उठाते हुए निम्नलिखित तर्क दिए गए हैं:

  • SIT को बताया नाकाफी: यूपी सरकार द्वारा बनाई गई स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) को इस वैश्विक महत्व के मामले के लिए अपर्याप्त बताया गया है।

  • FIR दर्ज न होने पर हैरानी: याचिका में कहा गया है कि करोड़ों भक्तों के दान से जुड़े इतने गंभीर आरोपों के बावजूद अभी तक कोई औपचारिक आपराधिक केस (FIR) दर्ज नहीं किया गया है।

  • असर की आशंका: औपचारिक आपराधिक प्रक्रिया शुरू न होने से जनता में यह संदेश जा सकता है कि इस गंभीर ‘क्रिमिनल ब्रीच ऑफ ट्रस्ट’ (विश्वासघात) को केवल एक प्रशासनिक चूक या एडमिनिस्ट्रेटिव गड़बड़ी मानकर दबाया जा रहा है।

  • आय से अधिक संपत्ति की चर्चा: अर्जी में उन रिपोर्ट्स का भी हवाला दिया गया है जिनमें आरोप लगाया गया है कि दान प्रबंधन से जुड़े कुछ व्यक्तियों के पास उनकी ज्ञात आय के स्रोतों से कहीं अधिक संपत्ति मिली है।

याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से की ये बड़ी मांगें

विश्वास बहाली के लिए न्यायिक दखल जरूरी:

याचिका में कहा गया है कि जब तक किसी संवैधानिक अदालत की देखरेख में स्वतंत्र जांच नहीं होती, तब तक श्रद्धालुओं के मन में जांच की निष्पक्षता को लेकर संदेह बना रहेगा। अदालत से निम्नलिखित राहत की मांग की गई है:

  1. सुप्रीम कोर्ट की सीधी निगरानी में CBI जांच का आदेश दिया जाए।

  2. मंदिर को मिलने वाले दान के कलेक्शन, अकाउंटिंग, कस्टडी और मैनेजमेंट की कड़ाई से जांच हो।

  3. भविष्य के लिए चढ़ावे और फंड को पूरी तरह सुरक्षित रखने के लिए एक पारदर्शी और पुख्ता सिस्टम बनाया जाए।

यूपी सरकार की SIT में कौन-कौन हैं शामिल?

राम मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं का विवाद सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर एक उच्च स्तरीय एसआईटी (SIT) का गठन किया जा चुका है। इस टीम में राज्य के तीन बड़े अधिकारी शामिल हैं:

अधिकारी का नाम पद / विभाग
विजय विश्वास पंत डिविजनल कमिश्नर, लखनऊ
किरण एस. पुलिस महानिरीक्षक (IG), लखनऊ रेंज
नील रतन विशेष सचिव, वित्त विभाग (UP)

फिलहाल, राज्य की एसआईटी इस मामले की आंतरिक जांच कर रही है, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल होने के बाद इस मामले ने देशव्यापी कानूनी और राजनीतिक रूप ले लिया है।

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