नई दिल्ली। NEET-UG 2026 री-एग्जाम से पहले भारत सरकार द्वारा Telegram पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को लेकर विवाद गहरा गया है। Telegram के संस्थापक और CEO पावेल ड्यूरोव ने इस फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाने से असली समस्या का समाधान नहीं हुआ, बल्कि करोड़ों आम उपयोगकर्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ा। ड्यूरोव का दावा है कि परीक्षा से जुड़ी लीक और फर्जी सामग्री का प्रसार रोकने के बजाय यह गतिविधियां अन्य मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट हो गई हैं।
केंद्र सरकार ने NEET-UG 2026 री-एग्जाम की निष्पक्षता सुनिश्चित करने और कथित पेपर लीक नेटवर्क पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से Telegram की सेवाओं पर अस्थायी रोक लगाई थी। अधिकारियों का मानना था कि कुछ समूह और चैनल परीक्षा से संबंधित भ्रामक जानकारी तथा कथित लीक प्रश्नपत्र साझा कर रहे थे, जिससे परीक्षा प्रक्रिया प्रभावित हो सकती थी।
इस कार्रवाई के बाद पावेल ड्यूरोव ने सोशल मीडिया मंच X पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत में Telegram के 15 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता हैं और प्रतिबंध का सबसे अधिक असर इन्हीं सामान्य यूजर्स पर पड़ा है। उन्होंने कहा कि “प्रतिबंध ने कुछ भी नहीं रोका, लीक केवल दूसरे ऐप्स पर चली गई।” उनके अनुसार ऐसे कदम वास्तविक दोषियों के बजाय आम लोगों को दंडित करते हैं।
ड्यूरोव की टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। एक पक्ष का कहना है कि परीक्षा जैसी संवेदनशील प्रक्रिया की सुरक्षा के लिए कठोर कदम आवश्यक हैं, जबकि दूसरा पक्ष मानता है कि किसी पूरे प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाने के बजाय दोषियों और अवैध चैनलों पर लक्षित कार्रवाई अधिक प्रभावी हो सकती है।
इस बीच Telegram ने भारत सरकार के आदेश को अदालत में चुनौती देने का निर्णय लिया है। रिपोर्टों के अनुसार कंपनी ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है और प्रतिबंध की वैधता पर सवाल उठाए हैं। कंपनी का तर्क है कि प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग करने वाले कुछ लोगों की वजह से करोड़ों उपयोगकर्ताओं को सेवाओं से वंचित करना उचित नहीं है।
गौरतलब है कि NEET-UG 2026 परीक्षा पहले ही कथित पेपर लीक विवाद के कारण सुर्खियों में रही है। इसी पृष्ठभूमि में सरकार और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) परीक्षा की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरत रही हैं। सरकार का कहना है कि यह कदम परीक्षा की निष्पक्षता और अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा के लिए उठाया गया, जबकि Telegram का दावा है कि इससे समस्या का मूल कारण समाप्त नहीं हुआ।
अब सबकी नजर दिल्ली हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई और सरकार के अगले कदमों पर है। यह मामला केवल एक मैसेजिंग ऐप तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और परीक्षा सुरक्षा जैसे बड़े मुद्दों को भी सामने ला रहा है।