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शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने गाज़ीपुर लैंडफिल का किया निरीक्षण; लेगेसी वेस्ट के निस्तारण में तेजी लाने के दिए निर्देश।

नई दिल्ली : 31 जुलाई तक प्रतिदिन बायोमाइनिंग क्षमता 7,000 मीट्रिक टन से बढ़ाकर 12,000 मीट्रिक टन करने के निर्देश एवं ताज़े कचरे के अलगाव के कार्यों में तेजी लाने के लिए साप्ताहिक समीक्षा की जाएगी। फेज-II के तहत लगभग 24 लाख मीट्रिक टन लेगेसी कचरे का निस्तारण, 20 एकड़ भूमि कूड़ा मुक्त की गई। […]

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  • June 26, 2026 4:14 pm IST, Published 2 hours ago

नई दिल्ली : 31 जुलाई तक प्रतिदिन बायोमाइनिंग क्षमता 7,000 मीट्रिक टन से बढ़ाकर 12,000 मीट्रिक टन करने के निर्देश एवं ताज़े कचरे के अलगाव के कार्यों में तेजी लाने के लिए साप्ताहिक समीक्षा की जाएगी। फेज-II के तहत लगभग 24 लाख मीट्रिक टन लेगेसी कचरे का निस्तारण, 20 एकड़ भूमि कूड़ा मुक्त की गई। दिल्ली के शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने आज गाज़ीपुर लैंडफिल साइट का निरीक्षण किया तथा नगर निगम दिल्ली (एमसीडी) और कार्य निष्पादन एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ चल रहे लेगेसी कचरा निस्तारण (Legacy Waste Remediation) कार्यों की प्रगति की समीक्षा की।

समीक्षा के दौरान श्री सूद ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं माननीय मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता के नेतृत्व में वर्तमान दिल्ली सरकार मिशन मोड में वैज्ञानिक तरीके से दिल्ली के लेगेसी लैंडफिल स्थलों को समाप्त करने के लिए कार्य कर रही है।

मंत्री ने बताया कि फेज-I के अंतर्गत 24 नवंबर 2022 से 19 नवंबर 2024 तक 30 लाख मीट्रिक टन लेगेसी कचरे की बायोमाइनिंग का कार्य सौंपा गया था, लेकिन पूरे अनुबंध काल में केवल 13.90 लाख मीट्रिक टन कचरे का ही बायोमाइनिंग के माध्यम से निस्तारण किया जा सका।

उन्होंने बताया कि फरवरी 2025 में वर्तमान सरकार के गठन के बाद इस कार्य में उल्लेखनीय तेजी लाई गई। 7 मार्च 2025 को फेज-II के तहत 30 लाख मीट्रिक टन लेगेसी कचरे की बायोमाइनिंग का कार्य आवंटित किया गया, जिसे सितंबर 2026 तक पूरा किये जाने का लक्ष्य है। सूद ने बताया कि फेज-II के अंतर्गत अब तक लगभग 24 लाख मीट्रिक टन कचरे का निस्तारण किया जा चुका है तथा लगभग 20 एकड़ भूमि कूड़ा मुक्त हो गई है।

अप्रैल 2026 में किए गए नवीनतम ड्रोन सर्वेक्षण के अनुसार गाज़ीपुर लैंडफिल में 67.81 लाख मीट्रिक टन कचरा मौजूद था। 30 अप्रैल से 25 जून 2026 के बीच लगभग 3.39 लाख मीट्रिक टन कचरे का बायोमाइनिंग के माध्यम से निस्तारण किया गया, जिसके बाद वर्तमान में साइट पर लेगेसी एवं ताज़े कचरे सहित कुल 66.68 लाख मीट्रिक टन कचरा शेष है। लक्ष्य है कि दिसंबर 2027 तक शेष कचरे का पूर्ण निस्तारण कर दिया जाए।

निरीक्षण के दौरान आशीष सूद ने कूड़े के पहाड़ को खत्म करने में आने वाली दो प्रमुख बाधाओं के बारे में बताया की पहली बाधा प्रतिदिन आने वाले ताज़े नगर निगम कचरे से संबंधित है। अधिकारियों ने बताया कि शाहदरा नॉर्थ एवं शाहदरा साउथ जोन से प्रतिदिन लगभग 2,400 से 2,500 मीट्रिक टन ताज़ा कचरा गाज़ीपुर साइट पर आता है। इसमें से एक बड़ा हिस्सा वेस्ट-टू-एनर्जी संयंत्र में भेज दिया जाता है, जबकि लगभग 800 मीट्रिक टन प्रतिदिन ताज़े कचरे के ढेर में जमा हो रहा है।

सूद ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ताज़े कचरे का प्रसंस्करण लेगेसी कचरे से पूरी तरह अलग व्यवस्था के तहत किया जाए, ताकि नए कचरे का जमाव न हो और बायोमाइनिंग का कार्य निर्बाध रूप से जारी रह सके। उन्होंने अगले दो माह के लिए फ्रेश वेस्ट प्रोसेसिंग एक्शन प्लान तैयार कर मंत्री कार्यालय को प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए।

दूसरी प्रमुख चुनौती बायोमाइनिंग के दौरान निकलने वाले इनर्ट (अप्रसंस्करणीय) पदार्थ के निस्तारण से संबंधित है। अधिकारियों ने बताया कि अब इसके निस्तारण के लिए गाज़ीपुर लैंडफिल से लगभग 23 किलोमीटर दूर स्थित एनटीपीसी इको पार्क में व्यवस्था कर दी गई है।

आशीष सूद ने कार्य निष्पादन एजेंसी को निर्देश दिए कि इनर्ट पदार्थ को संबंधित जगह तक पहुंचाने के लिए वाहनों की संख्या तत्काल बढ़ाई जाए तथा एक सप्ताह के भीतर मंत्री कार्यालय को इसकी रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए, ताकि इनर्ट के निस्तारण के कारण बायोमाइनिंग कार्य प्रभावित न हो।

वर्तमान में गाज़ीपुर में प्रतिदिन लगभग 7,000 मीट्रिक टन कचरे की बायोमाइनिंग की जा रही है। कार्यों में और तेजी लाने की आवश्यकता पर गंभीरता से ध्यान देते हुए मंत्री महोदय ने अधिकारियों एवं एजेंसी को निर्देश दिए कि 31 जुलाई 2026 तक प्रतिदिन की क्षमता बढ़ाकर 12,000 मीट्रिक टन की जाए तथा इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए स्पष्ट जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।

श्री सूद ने निरंतर निगरानी सुनिश्चित करने के लिए कहा की कि गाज़ीपुर लैंडफिल परियोजना की अब प्रत्येक सप्ताह समीक्षा की जाएगी तथा वह स्वयं अगले महीने पुनः स्थल का दौरा कर आज दिए गए निर्देशों के अनुपालन एवं कार्यों की प्रगति की समीक्षा करेंगे।

श्री आशीष सूद ने यह भी कहा की दिल्ली की जनता अस्थायी नहीं बल्कि स्थायी समाधान की हकदार है। वर्तमान सरकार के कार्यभार संभालने के बाद गाज़ीपुर में जवाबदेही और नियमित निगरानी के साथ कार्यों में उल्लेखनीय तेजी आई है। आज हमने सभी प्रमुख बाधाओं की पहचान की है, उनके समाधान के लिए स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित की है और बायोमाइनिंग को तेज़ करने के निर्देश दिए हैं। हमारा उद्देश्य केवल कूड़े के पहाड़ की ऊंचाई कम करना नहीं, बल्कि वैज्ञानिक एवं समयबद्ध तरीके से दिल्ली की लेगेसी कचरा समस्या का स्थायी समाधान करना है।

शहरी विकास मंत्री ने पुनः दोहराया कि दिल्ली सरकार गाज़ीपुर, भलस्वा और ओखला के लेगेसी लैंडफिल स्थलों को वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन, नियमित निगरानी के माध्यम से पूर्णतः समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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