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सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत, भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में हाईकोर्ट जाएं पहले

नई दिल्ली: बिहार के भोजपुर में चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल हस्तक्षेप से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को पहले संबंधित हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की सलाह दी है। शीर्ष अदालत ने यह भी पूछा कि याचिका दाखिल करने का अधिकार किस आधार पर लिया गया है। इस टिप्पणी के […]

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  • June 30, 2026 1:32 pm IST, Published 2 hours ago

नई दिल्ली: बिहार के भोजपुर में चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल हस्तक्षेप से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को पहले संबंधित हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की सलाह दी है। शीर्ष अदालत ने यह भी पूछा कि याचिका दाखिल करने का अधिकार किस आधार पर लिया गया है। इस टिप्पणी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि मामले की सुनवाई फिलहाल उसके समक्ष नहीं होगी।

जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की पीठ के समक्ष दायर याचिका में इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग की गई थी। साथ ही एक सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित करने और कथित मुठभेड़ में शामिल पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का भी अनुरोध किया गया था। याचिका सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विशाल तिवारी की ओर से दायर की गई थी। उनका कहना था कि भरत भूषण तिवारी की मौत एक संदिग्ध परिस्थितियों में हुई घटना है, जिसकी निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच आवश्यक है। याचिका में दावा किया गया कि मामले के तथ्यों की गहराई से जांच किए बिना सच्चाई सामने नहीं आ सकती

हालांकि सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सबसे पहले याचिकाकर्ता की वैधानिक स्थिति पर सवाल उठाया। अदालत ने पूछा कि संबंधित मामले में याचिका दाखिल करने का उनका अधिकार और आधार क्या है। इसके बाद पीठ ने कहा कि यदि मामले में न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता है तो सबसे पहले संबंधित हाईकोर्ट का रुख किया जाना चाहिए। इस बीच भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर बिहार की राजनीति भी गरमा गई है। विपक्ष लगातार राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है। मृतक के परिजन भी न्यायिक जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

बिहार सरकार की ओर से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि सरकार ने घटना को गंभीरता से लिया है और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए न्यायिक आयोग गठित करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच में यदि कोई भी व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इस बीच पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार भरत तिवारी के शरीर में कुल पांच गोलियां लगी थीं। गोलियों के निशान शरीर के अलग-अलग हिस्सों, विशेषकर दोनों पैरों और जांघों पर पाए गए हैं। रिपोर्ट सामने आने के बाद घटना की परिस्थितियों को लेकर बहस और तेज हो गई है। अब इस मामले में अगला कानूनी कदम हाईकोर्ट में उठाए जाने की संभावना है साथ ही न्यायिक आयोग की जांच और उसकी रिपोर्ट पर भी सभी की निगाहें टिकी हैं।

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