नई दिल्ली : हाल के दिनों में सोशल मीडिया और कुछ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एक दावा तेजी से वायरल हो रहा है कि घरों में इस्तेमाल होने वाले एयर कंडीशनर (AC) में LPG गैस भरी जा रही है, जिसके कारण आग लगने और विस्फोट जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं। नोएडा समेत कई शहरों में हुई आग की घटनाओं को भी इस दावे से जोड़कर प्रस्तुत किया जा रहा है। ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या वास्तव में AC में LPG गैस भरी जाती है और क्या इससे बड़ा खतरा पैदा हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस दावे को पूरी तरह सही मानना उचित नहीं है। आधुनिक एयर कंडीशनरों में रेफ्रिजरेंट गैस का उपयोग किया जाता है, जो अलग-अलग प्रकार की होती है। इनमें R32, R410A और कुछ नए मॉडलों में R290 जैसी गैसों का इस्तेमाल किया जाता है। R290 का रासायनिक स्वरूप प्रोपेन है, जो LPG से मिलता-जुलता है और ज्वलनशील श्रेणी में आता है, लेकिन इसे विशेष सुरक्षा मानकों के तहत सीमित मात्रा में प्रयोग किया जाता है।
क्या AC में LPG गैस भरी जाती है?
HVAC विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्य घरेलू AC में सीधे घरेलू LPG सिलेंडर की गैस नहीं भरी जाती। हालांकि कुछ आधुनिक और ऊर्जा दक्ष एयर कंडीशनरों में ऐसे रेफ्रिजरेंट का उपयोग होता है, जिनमें ज्वलनशील गुण होते हैं। इन्हें अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुसार डिजाइन किया जाता है और सही इंस्टॉलेशन तथा रखरखाव होने पर ये सुरक्षित माने जाते हैं।
समस्या तब उत्पन्न होती है जब कुछ गैर-प्रमाणित तकनीशियन लागत कम करने के उद्देश्य से गलत या अवैध तरीके से रेफ्रिजरेंट गैस की जगह अन्य ज्वलनशील गैस भर देते हैं। इससे आग या विस्फोट का खतरा कई गुना बढ़ सकता है।
नोएडा जैसी घटनाओं से क्यों बढ़ी चिंता?
हाल के समय में बहुमंजिला इमारतों में AC यूनिट से आग लगने की कुछ घटनाएं सामने आई हैं। हालांकि हर घटना के पीछे गैस ही कारण हो, यह जरूरी नहीं है। कई मामलों में शॉर्ट सर्किट, खराब वायरिंग, ओवरलोड, समय पर सर्विसिंग न होना या तकनीकी खराबी भी आग लगने का प्रमुख कारण बनती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी घटना की जांच पूरी होने से पहले उसके कारणों को लेकर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।
किन कारणों से बढ़ सकता है खतरा?
यदि रेफ्रिजरेंट गैस का रिसाव हो और उसके आसपास चिंगारी या आग का स्रोत मौजूद हो, तो ज्वलनशील गैस वाले सिस्टम में दुर्घटना की आशंका बढ़ सकती है।
कैसे करें अपनी सुरक्षा?
सरकार और विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
ऊर्जा और HVAC क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में बिकने वाले एयर कंडीशनरों को निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप तैयार किया जाता है। यदि उपभोक्ता सही इंस्टॉलेशन, नियमित मेंटेनेंस और प्रमाणित तकनीशियन की सेवाएं लेते हैं तो जोखिम काफी हद तक कम हो जाता है।
विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हर दावे को बिना पुष्टि के सही न मानें। किसी भी तकनीकी जानकारी के लिए संबंधित कंपनी, अधिकृत सेवा केंद्र या विशेषज्ञ की राय लेना बेहतर होता है।
AC में LPG गैस भरे जाने का दावा पूरी तरह सही नहीं कहा जा सकता। वास्तविकता यह है कि एयर कंडीशनरों में विभिन्न प्रकार के रेफ्रिजरेंट का उपयोग होता है, जिनमें कुछ ज्वलनशील हो सकते हैं, लेकिन वे निर्धारित सुरक्षा मानकों के अंतर्गत उपयोग किए जाते हैं। सबसे बड़ा खतरा तब पैदा होता है जब गलत गैस का इस्तेमाल किया जाए या रखरखाव में लापरवाही बरती जाए।
इसलिए घबराने के बजाय जागरूक रहना अधिक जरूरी है। सही तकनीशियन से सर्विस, नियमित मेंटेनेंस और सुरक्षा नियमों का पालन करके एयर कंडीशनर का सुरक्षित उपयोग किया जा सकता है। सोशल मीडिया पर वायरल दावों की पुष्टि किए बिना उन पर विश्वास करने से बचें और केवल विश्वसनीय जानकारी पर ही भरोसा करें।