• होम
  • दिल्ली/NCR
  • क्रेडिट कार्ड सेटलमेंट के नाम पर बढ़ा ऑनलाइन फ्रॉड, रहें सतर्क

क्रेडिट कार्ड सेटलमेंट के नाम पर बढ़ा ऑनलाइन फ्रॉड, रहें सतर्क

नई दिल्ली: देशभर में साइबर ठगी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और अब ठगों ने लोगों को निशाना बनाने के लिए एक नया तरीका अपनाया है। हाल के दिनों में क्रेडिट कार्ड सेटलमेंट के नाम पर लोगों के साथ धोखाधड़ी के कई मामले सामने आए हैं। साइबर अपराधी खुद को बैंक अधिकारी, रिकवरी एजेंट […]

Advertisement
Gauravshali Bharat
Gauravshali Bharat News
  • June 30, 2026 11:30 pm IST, Published 2 hours ago

नई दिल्ली: देशभर में साइबर ठगी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और अब ठगों ने लोगों को निशाना बनाने के लिए एक नया तरीका अपनाया है। हाल के दिनों में क्रेडिट कार्ड सेटलमेंट के नाम पर लोगों के साथ धोखाधड़ी के कई मामले सामने आए हैं। साइबर अपराधी खुद को बैंक अधिकारी, रिकवरी एजेंट या फाइनेंस कंपनी का प्रतिनिधि बताकर ग्राहकों से संपर्क करते हैं और उन्हें कम राशि में बकाया क्रेडिट कार्ड बिल या ईएमआई का सेटलमेंट कराने का लालच देते हैं। इसके बाद वे एक फर्जी लिंक भेजते हैं या मोबाइल में ऐप डाउनलोड करने के लिए कहते हैं। जैसे ही ग्राहक लिंक पर क्लिक करता है या अपनी बैंकिंग जानकारी दर्ज करता है, उसका बैंक खाता खाली हो सकता है।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह ठगी तेजी से बढ़ रही है क्योंकि कई लोग आर्थिक दबाव के चलते क्रेडिट कार्ड का बकाया कम राशि में निपटाने का विकल्प तलाशते हैं। अपराधी इसी मनोविज्ञान का फायदा उठाकर लोगों को अपने जाल में फंसा लेते हैं।

कैसे होती है यह ठगी?

ठग सबसे पहले मोबाइल कॉल, एसएमएस, व्हाट्सएप या ईमेल के जरिए ग्राहक से संपर्क करते हैं। वे दावा करते हैं कि बैंक की ओर से विशेष ऑफर चल रहा है और ग्राहक का लाखों रुपये का बकाया बहुत कम रकम देकर बंद कराया जा सकता है। विश्वास जीतने के लिए वे ग्राहक का नाम, बैंक का नाम या कार्ड की कुछ सामान्य जानकारी भी बताते हैं।

इसके बाद ग्राहक को एक लिंक भेजा जाता है, जहां भुगतान करने या अपनी जानकारी अपडेट करने के लिए कहा जाता है। कई मामलों में ठग स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एक्सेस ऐप डाउनलोड करवाते हैं। जैसे ही ग्राहक ऐसा करता है, उसके मोबाइल और बैंकिंग ऐप तक अपराधियों की पहुंच बन जाती है। इसके बाद खाते से रकम निकाल ली जाती है।

बैंक कभी नहीं भेजते ऐसे लिंक

बैंकिंग विशेषज्ञों का कहना है कि कोई भी बैंक अपने ग्राहकों को किसी अनजान लिंक के माध्यम से भुगतान करने के लिए नहीं कहता। यदि किसी ग्राहक को क्रेडिट कार्ड सेटलमेंट या बकाया राशि से जुड़ा कोई प्रस्ताव मिलता है तो उसकी पुष्टि केवल बैंक की आधिकारिक शाखा, ग्राहक सेवा, आधिकारिक वेबसाइट या मोबाइल ऐप से ही करनी चाहिए।

यदि कोई व्यक्ति फोन पर ओटीपी, कार्ड नंबर, सीवीवी, यूपीआई पिन या नेट बैंकिंग पासवर्ड मांगता है, तो समझ लेना चाहिए कि वह साइबर ठग हो सकता है।

इन संकेतों से पहचानें फर्जी कॉल

साइबर विशेषज्ञों के अनुसार कुछ सामान्य संकेतों से फर्जी कॉल की पहचान की जा सकती है।

तुरंत भुगतान करने का दबाव बनाना।

कम समय में विशेष ऑफर खत्म होने की बात कहना।

अनजान लिंक पर क्लिक करने के लिए कहना।

ओटीपी, यूपीआई पिन या सीवीवी मांगना।

स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एक्सेस ऐप डाउनलोड करवाना।

निजी बैंकिंग जानकारी साझा करने के लिए कहना।

यदि ऐसा कोई कॉल आए तो तुरंत कॉल काट दें और बैंक के आधिकारिक हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करें।

ऐसे करें अपनी सुरक्षा

ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचने के लिए कुछ सावधानियां अपनाना बेहद जरूरी है।

केवल बैंक की आधिकारिक वेबसाइट या मोबाइल ऐप का ही उपयोग करें।

किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें।

ओटीपी, सीवीवी, यूपीआई पिन या पासवर्ड किसी के साथ साझा न करें।

मोबाइल में केवल विश्वसनीय ऐप ही इंस्टॉल करें।

बैंक खाते और क्रेडिट कार्ड के ट्रांजेक्शन अलर्ट हमेशा चालू रखें।

संदिग्ध कॉल या मैसेज मिलने पर तुरंत बैंक और साइबर हेल्पलाइन को सूचना दें।

ठगी का शिकार होने पर क्या करें?

यदि किसी व्यक्ति के साथ ऐसी धोखाधड़ी हो जाती है तो सबसे पहले अपने बैंक को सूचना देकर कार्ड और खाते को तुरंत ब्लॉक कराएं। इसके बाद राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत करें। जितनी जल्दी शिकायत की जाएगी, धनराशि वापस मिलने की संभावना उतनी अधिक हो सकती है।

डिजिटल लेनदेन में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव

डिजिटल बैंकिंग ने जहां लोगों की जिंदगी आसान बनाई है, वहीं साइबर अपराधियों के लिए भी नए अवसर पैदा किए हैं। इसलिए किसी भी आकर्षक ऑफर, भारी छूट या कम राशि में क्रेडिट कार्ड सेटलमेंट के दावे पर आंख मूंदकर भरोसा करना नुकसानदायक साबित हो सकता है। बैंकिंग से जुड़ी हर जानकारी की पुष्टि केवल आधिकारिक माध्यमों से करें और किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ अपनी वित्तीय जानकारी साझा करने से बचें।

विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता, सतर्कता और डिजिटल सुरक्षा नियमों का पालन ही साइबर ठगी से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है। यदि प्रत्येक उपभोक्ता थोड़ी सावधानी बरते, तो ऐसे अधिकांश ऑनलाइन फ्रॉड से आसानी से बचा जा सकता है।

Advertisement