सुप्रीम कोर्ट का आसाराम को झटका

 फिलहाल जमानत देने से इनकार, राजस्थान सरकार से मांगा जवाब नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को नाबालिग से रेप मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम बापू को फिलहाल कोई राहत देने से इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने सजा पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए राजस्थान […]

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  • July 1, 2026 6:01 am IST, Published 2 hours ago

 फिलहाल जमानत देने से इनकार, राजस्थान सरकार से मांगा जवाब

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को नाबालिग से रेप मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम बापू को फिलहाल कोई राहत देने से इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने सजा पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए राजस्थान सरकार को नोटिस जारी कर 2 हफ्ते में जवाब मांगा है।

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में जमानत नहीं दी जा रही है। अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि यदि भविष्य में ऐसी कोई गंभीर स्थिति सामने आती है जिससे आसाराम के जीवन को वास्तविक खतरा हो, तभी उनकी जमानत याचिका पर विचार किया जाएगा। साथ ही, कोर्ट ने जेल प्रशासन को निर्देश दिया है कि आसाराम को सभी आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

याचिका का आधार और दलीलें

आसाराम के वकील डी.एस. नायडू ने अदालत में दलील दी थी कि याचिकाकर्ता की उम्र 80 साल से अधिक है और वे कई गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं, जिसके आधार पर उन्हें जमानत दी जानी चाहिए। यह याचिका राजस्थान हाईकोर्ट के उस हालिया फैसले को चुनौती देते हुए दायर की गई थी, जिसमें अदालत ने 2013 के रेप मामले में उनकी उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा था।

हाईकोर्ट के फैसले का संक्षिप्त विवरण

  • सजा बरकरार: 27 मई को राजस्थान हाईकोर्ट ने आसाराम की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा था।

  • कुछ आरोपों से राहत: हाईकोर्ट ने आसाराम को गैंगरेप और कुछ पॉक्सो (POCSO) धाराओं समेत कई गंभीर आरोपों से बरी कर दिया था, लेकिन नाबालिग से रेप (धारा 376(2)(एफ)) के तहत दोषसिद्धि को कायम रखा।

  • सह-आरोपियों को रिहाई: इस मामले में सह-आरोपी संचिता गुप्ता (शिल्पी) और शरत चंद्र को हाईकोर्ट ने सभी आरोपों से बरी कर दिया था।

बता दें कि 25 अप्रैल 2018 को जोधपुर की ट्रायल कोर्ट ने आसाराम को नाबालिग छात्रा के साथ रेप का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। अब देखना यह होगा कि दो सप्ताह बाद राजस्थान सरकार का जवाब आने के बाद सुप्रीम कोर्ट इस मामले में क्या रुख अपनाता है।

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