नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने ग्रामीण भारत में रोजगार गारंटी के ढांचे में बड़ा बदलाव करते हुए आज, 1 जुलाई 2026 से ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ यानी ‘VB-G RAM G’ अधिनियम, 2025 को पूरे देश में लागू कर दिया है। इसके साथ ही, दो दशक पुरानी मनरेगा (MGNREGA) योजना अब इतिहास बन गई है।
125 दिन की रोजगार गारंटी: अब ग्रामीण परिवारों को साल में 100 की जगह 125 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी मिलेगी।
बढ़ी हुई मजदूरी: देशभर में औसत दैनिक मजदूरी ₹298.8 से बढ़कर ₹327.4 हो गई है।
पुराने जॉब कार्ड का उपयोग: जब तक नए ‘ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड’ नहीं मिल जाते, तब तक श्रमिक अपने पुराने ई-केवाईसी (e-KYC) सत्यापित जॉब कार्ड के जरिए ही काम कर सकेंगे।
बजट और तैयारी: केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मजदूरी के समय पर भुगतान और कार्यों की निरंतरता के लिए 95,692.31 करोड़ रुपये का अंतरिम बजट आवंटित किया है।
कार्य का दायरा: ग्राम पंचायतें पहले की तरह ही कार्यों का चयन और निगरानी करेंगी। इसमें जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, ग्रामीण बुनियादी ढांचे, कृषि और महिला सशक्तीकरण पर विशेष जोर दिया गया है।
तकनीकी एकीकरण: इस योजना को ‘पीएम गति शक्ति’ राष्ट्रीय मास्टर प्लान के साथ जोड़ा गया है और पारदर्शिता के लिए मोबाइल ऐप-आधारित डैशबोर्ड व जियोस्पेशियल तकनीक का उपयोग किया जाएगा।
कार्यान्वयन: अब तक 24 राज्यों ने अपनी योजनाएं अधिसूचित कर दी हैं, और राष्ट्रीय स्तर पर इसका औपचारिक शुभारंभ 2 जुलाई को आंध्र प्रदेश के तिरुपति जिले के मुक्कावरिपल्ली गांव में होगा।
सरकार का लक्ष्य इस नई व्यवस्था के जरिए ग्रामीण आजीविका को ‘विकसित भारत @2047’ के विजन के अनुरूप भविष्य के लिए तैयार और अधिक उत्पादक बनाना है।