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अजमेर जेल हत्याकांड: राजस्थान हाईकोर्ट ने मांगी रिपोर्ट

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुआ चौंकाने वाला खुलासा जयपुर: राजस्थान उच्च न्यायालय ने अजमेर जेल में हुए डकैत जगन गुर्जर की हत्या के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एस.पी. शर्मा और न्यायमूर्ति मनीष शर्मा की खंडपीठ ने जेल व्यवस्था में सुधार से जुड़े एक मामले का स्वप्रेरित […]

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  • July 3, 2026 6:53 am IST, Published 2 hours ago

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

जयपुर: राजस्थान उच्च न्यायालय ने अजमेर जेल में हुए डकैत जगन गुर्जर की हत्या के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एस.पी. शर्मा और न्यायमूर्ति मनीष शर्मा की खंडपीठ ने जेल व्यवस्था में सुधार से जुड़े एक मामले का स्वप्रेरित संज्ञान लेते हुए यह निर्देश जारी किए हैं।

हाईकोर्ट ने उठाए गंभीर सवाल

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने जेल प्रशासन से घटना से जुड़ी सीसीटीवी रिकॉर्डिंग प्रस्तुत करने को कहा है। अदालत ने विशेष रूप से यह जानने की कोशिश की है कि क्या इस घटना के लिए किसी अधिकारी की जिम्मेदारी तय की गई है। कोर्ट ने इस बात पर चिंता जताई कि मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जेल में लगे सीसीटीवी कैमरों में घटना की कोई भी फुटेज रिकॉर्ड नहीं हुई है, जो जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करती है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट से हुआ हत्या का खुलासा

जगन गुर्जर के शव का पांच सदस्यीय मेडिकल बोर्ड द्वारा पोस्टमार्टम किया गया, जिसकी रिपोर्ट ने हत्या की पुष्टि कर दी है। रिपोर्ट के अनुसार:

  • जगन की मौत गला दबाने के कारण हुई है।

  • उसकी गर्दन पर लगभग 29 सेंटीमीटर लंबा गहरा दबाव का निशान पाया गया है।

  • गर्दन के बाएं हिस्से पर एक और अलग चोट का निशान भी मिला है।

  • रिपोर्ट में यह तथ्य भी सामने आया है कि जगन ने अपना बचाव करने के लिए कोई संघर्ष नहीं किया, जिससे मामले में संदेह गहरा गया है।

क्या था पूरा मामला?

ज्ञात हो कि 29 जून को अजमेर जेल में बंद डकैत जगन गुर्जर की उसी की बैरक में रहने वाले कुलदीप नामक कैदी ने तौलिए से गला दबाकर हत्या कर दी थी। मृतक के परिजनों ने पहले ही इस मामले में उसे जहर देने का आरोप लगाया था, जिसके बाद अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आए खुलासों ने इस पूरे मामले को और अधिक गंभीर बना दिया है। फिलहाल, उच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद प्रशासन पर इस हत्याकांड की निष्पक्ष जांच का भारी दबाव है।

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