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बिहार टेंडर घोटाले में ED की कार्रवाई तेज, IAS संतोष मल्ल से पूछताछ जारी

इस मामले की जांच केवल ED तक सीमित नहीं है। बिहार पुलिस की विशेष निगरानी इकाई (SVU) भी कथित टेंडर अनियमितताओं की पड़ताल कर रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जून 2026 में SVU ने रिशु श्री समेत सात लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। इसके अलावा, राज्य सरकार...

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  • October 29, 2026 6:08 pm IST, Published 46 minutes ago

पटना: बिहार में कथित टेंडर घोटाले की जांच तेज होने के साथ ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंच गई है। इसी सिलसिले में वरिष्ठ IAS अधिकारी संतोष मल्ल से पटना स्थित ED कार्यालय में पूछताछ की जा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, संतोष मल्ल गुरुवार को दोपहर करीब एक बजे जांच एजेंसी के कार्यालय पहुंचे। उनसे सरकारी टेंडरों में कथित अनियमितताओं और ठेकेदार रिशु श्री से जुड़े मामले में सवाल किए जा रहे हैं। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि सरकारी ठेकों की प्रक्रिया में नियमों का पालन हुआ था या कुछ कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।

इस मामले में ED की जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है। इससे पहले बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के अध्यक्ष और IAS अधिकारी धर्मेंद्र कुमार से भी कई घंटे तक पूछताछ की गई थी। इसके अलावा, सूत्रों के मुताबिक, IAS अधिकारी अभिलाषा कुमारी शर्मा और सुनील यादव से भी अलग-अलग दिनों में सवाल-जवाब किए जा चुके हैं। इस प्रकरण में अब तक बिहार के पांच IAS अधिकारियों को समन भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, किसी अधिकारी को पूछताछ के लिए बुलाया जाना अपने आप में उसके दोषी होने का प्रमाण नहीं है। संबंधित लोगों की भूमिका जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

जांच के केंद्र में ठेकेदार रिशु श्री और उससे जुड़ी कंपनियां हैं। आरोपों के अनुसार, कुछ सरकारी टेंडरों को हासिल करने के लिए ठेकेदारों और संबंधित अधिकारियों के बीच कथित मिलीभगत की आशंका है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या कुछ निविदाओं की शर्तें इस तरह तैयार की गई थीं, जिनसे चुनिंदा कंपनियों को फायदा मिल सके। इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि सरकारी खरीद और निर्माण कार्यों से जुड़ी प्रक्रियाओं में निर्धारित नियमों का उल्लंघन हुआ था या नहीं।

ED इस मामले में कथित वित्तीय लेन-देन और संभावित अनियमितताओं की कड़ियां जोड़ने का प्रयास कर रही है। एजेंसी यह जानना चाहती है कि यदि किसी टेंडर में नियमों के विपरीत लाभ पहुंचाया गया, तो उसमें किन व्यक्तियों की क्या भूमिका थी। सरकारी अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच हुए संपर्कों की प्रकृति भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच के दौरान जुटाए गए सबूतों और आगे की कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही निकाला जा सकेगा।

मामले में मोबाइल फोन और डिजिटल रिकॉर्ड को भी महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, ठेकेदार रिशु श्री के मोबाइल फोन, चैट और अन्य डिजिटल दस्तावेजों से कुछ अधिकारियों के साथ संपर्क से संबंधित जानकारियां मिलने की बात सामने आई है। अब जांच एजेंसी इन रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही है, ताकि बातचीत के संदर्भ और उद्देश्य को समझा जा सके। जांच का एक प्रमुख पहलू यह पता लगाना है कि संबंधित संवाद सामान्य प्रशासनिक कामकाज से जुड़े थे या किसी विशेष टेंडर में अनुचित लाभ पहुंचाने की कथित कोशिश का हिस्सा थे।

इस मामले की जांच केवल ED तक सीमित नहीं है। बिहार पुलिस की विशेष निगरानी इकाई (SVU) भी कथित टेंडर अनियमितताओं की पड़ताल कर रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जून 2026 में SVU ने रिशु श्री समेत सात लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। इसके अलावा, राज्य सरकार अभिलाषा कुमारी शर्मा और योगेश कुमार सागर को निलंबित कर चुकी है। इन कदमों के बाद मामले ने प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर भी ध्यान खींचा है।

फिलहाल, ED की पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों की जांच के जरिए कथित टेंडर घोटाले की पूरी प्रक्रिया को समझने का प्रयास किया जा रहा है। जांच एजेंसी यह स्पष्ट करना चाहती है कि सरकारी ठेकों के आवंटन में किसी प्रकार की अनियमितता हुई या नहीं और यदि हुई, तो उससे किन लोगों को लाभ मिला। आने वाले दिनों में पूछताछ, दस्तावेजों की जांच और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई तय हो सकती है। जब तक आरोपों की पुष्टि नहीं होती, तब तक सभी संबंधित व्यक्तियों के मामले में कानूनी प्रक्रिया और निर्दोषता की धारणा का सम्मान करना जरूरी है।

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