मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में कारोबार के दौरान बुधवार को बड़ी गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स करीब 1,228 अंक टूटकर 73,600 के स्तर के आसपास पहुंच गया, जबकि निफ्टी में भी लगभग 375 अंकों की गिरावट दर्ज की गई और यह 23,070 के आसपास कारोबार करता नजर आया। बाजार में बिकवाली का दबाव इतना व्यापक रहा कि बीएसई सेंसेक्स में शामिल सभी 30 शेयर लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। वित्तीय और बैंकिंग शेयरों में तेज गिरावट ने बाजार की कमजोरी को और बढ़ाया।
बाजार में दबाव की एक प्रमुख वजह बीमा क्षेत्र के नियामक भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण यानी IRDAI की ओर से वितरण व्यवस्था में बदलाव को लेकर जारी प्रस्ताव को माना जा रहा है। नियामक ने ‘Recalibrating Economics of Insurance Distribution’ नाम से प्रस्ताव पेश किया है। इसमें बीमा उत्पादों की बिक्री और वितरण से जुड़ी मौजूदा व्यवस्था में बदलाव की बात कही गई है। प्रस्ताव के तहत बीमा वितरण की लागत को अधिक प्रभावी बनाने, ग्राहकों के हितों की रक्षा करने और बिक्री प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने जैसे मुद्दों पर ध्यान दिया गया है।
प्रस्ताव में बीमा उत्पादों की बिक्री से मिलने वाले कमीशन पर सीमा तय करने का सुझाव भी शामिल है। इसके अलावा बैंकों द्वारा ग्राहकों को उनकी इच्छा के विपरीत बीमा उत्पाद बेचने की शिकायतों पर रोक लगाने और पॉलिसी बिक्री के दौरान इस्तेमाल होने वाले भ्रामक तरीकों यानी ‘डार्क पैटर्न्स’ को नियंत्रित करने की बात कही गई है। नियामक के इन प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य बीमा ग्राहकों के हितों को ध्यान में रखते हुए वितरण व्यवस्था में सुधार करना है।
हालांकि, बाजार में निवेशकों ने इन प्रस्तावों के संभावित कारोबारी प्रभाव को लेकर चिंता जताई। यदि कमीशन और वितरण से जुड़े खर्चों पर नए नियम लागू होते हैं तो बीमा कंपनियों, बैंकों और ब्रोकिंग या वित्तीय वितरण से जुड़ी कंपनियों के राजस्व तथा लाभ पर असर पड़ने की आशंका बाजार में व्यक्त की गई। इसी वजह से वित्तीय क्षेत्र के कई शेयरों में तेज बिकवाली देखने को मिली। बाजार में इस गिरावट का असर केवल बीमा कंपनियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बैंकिंग और अन्य वित्तीय कंपनियों के शेयर भी दबाव में आ गए।
कारोबार के दौरान करीब 12 प्रमुख वित्तीय शेयरों के बाजार पूंजीकरण में सामूहिक रूप से लगभग 1.12 लाख करोड़ रुपये की कमी बताई गई। इनमें बजाज फाइनेंस के शेयर में सबसे अधिक दबाव दिखाई दिया। कंपनी के बाजार मूल्यांकन में करीब 29,000 करोड़ रुपये की कमी दर्ज होने की बात सामने आई। इसके बाद पीबी फिनटेक के बाजार पूंजीकरण में लगभग 20,000 करोड़ रुपये, एचडीएफसी बैंक में करीब 15,000 करोड़ रुपये और एक्सिस बैंक में लगभग 14,000 करोड़ रुपये की गिरावट बताई गई।
बीमा क्षेत्र की कंपनियों के शेयर भी भारी बिकवाली की चपेट में रहे। कुल अनुमानित 1.12 लाख करोड़ रुपये की बाजार पूंजी में कमी में बीमा क्षेत्र से जुड़े शेयरों का हिस्सा करीब 38,100 करोड़ रुपये बताया गया। एचडीएफसी लाइफ के बाजार मूल्यांकन में लगभग 7,600 करोड़ रुपये की गिरावट दर्ज की गई। मैक्स फाइनेंशियल के बाजार पूंजीकरण में करीब 6,800 करोड़ रुपये की कमी आई, जबकि आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ के बाजार मूल्यांकन में लगभग 3,000 करोड़ रुपये की गिरावट बताई गई।
इसके अलावा टर्टलमिंट समेत अन्य वित्तीय कंपनियों के शेयर भी दबाव में रहे। टर्टलमिंट के बाजार मूल्यांकन में करीब 802 करोड़ रुपये की कमी बताई गई। एलएंडटी फाइनेंस, इंडसइंड बैंक, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के शेयरों में भी गिरावट देखने को मिली।
बाजार विशेषज्ञों के लिए अब आगे की दिशा में IRDAI के प्रस्ताव पर होने वाली चर्चा और अंतिम नियम महत्वपूर्ण होंगे। फिलहाल प्रस्ताव के स्तर पर मौजूद बदलावों को लेकर वित्तीय कंपनियों पर संभावित असर का आकलन किया जा रहा है। निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि नियामक की अंतिम व्यवस्था क्या होती है और उसका बीमा वितरण, कमीशन संरचना तथा बैंक-बीमा कारोबार पर कितना प्रभाव पड़ता है। इस बीच, सेंसेक्स और निफ्टी में आई तेज गिरावट ने वित्तीय शेयरों में जारी बिकवाली को बाजार की प्रमुख गतिविधि बना दिया है।