नई दिल्ली। बर्फ से ढकी ऊंची-ऊंची पर्वत चोटियां देखने में जितनी आकर्षक और रोमांचक लगती हैं, उतनी ही खतरनाक भी हो सकती हैं। पर्वतारोहण की दुनिया में कुछ ऐसे पहाड़ हैं जिन्हें ‘डेथ माउंटेन’ या ‘कातिल पहाड़’ कहा जाता है। इन पहाड़ों ने पिछले कई दशकों में सैकड़ों पर्वतारोहियों की जान ली है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन दुर्गम स्थानों पर मरने वाले लोगों के शव अक्सर वर्षों, यहां तक कि दशकों तक उसी अवस्था में पड़े रहते हैं, जिस अवस्था में उनकी मृत्यु हुई थी।
विशेषज्ञों के अनुसार 8,000 मीटर (करीब 26,247 फीट) से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों को पर्वतारोहण की भाषा में ‘डेथ जोन’ कहा जाता है। यहां ऑक्सीजन का स्तर समुद्र तल की तुलना में बेहद कम होता है। शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती, जिससे दिमाग और फेफड़ों की कार्यक्षमता प्रभावित होने लगती है। यही कारण है कि इस क्षेत्र में पहुंचने वाले पर्वतारोहियों को भ्रम, थकान, बेहोशी और कई बार मौत तक का सामना करना पड़ता है।
क्यों पत्थर जैसे दिखने लगते हैं शव?
डेथ जोन में तापमान कई बार माइनस 40 से माइनस 60 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। इतनी अधिक ठंड में मानव शरीर कुछ ही समय में जम जाता है। बर्फीली हवाएं और अत्यधिक शुष्क वातावरण शवों को प्राकृतिक रूप से संरक्षित कर देते हैं। यही वजह है कि वर्षों बाद भी मृत पर्वतारोहियों के कपड़े, जूते और शरीर की संरचना लगभग वैसी ही दिखाई देती है जैसी मृत्यु के समय थी। कई शव तो पर्वतारोहियों के लिए रास्ता पहचानने का स्थायी संकेत बन चुके हैं।
1. माउंट एवरेस्ट – दुनिया की सबसे ऊंची लेकिन सबसे खतरनाक चोटी
दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर अब तक हजारों लोग चढ़ाई कर चुके हैं, लेकिन सैकड़ों पर्वतारोही अपनी जान भी गंवा चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि एवरेस्ट के ऊपरी हिस्सों में आज भी कई शव मौजूद हैं। अत्यधिक ऊंचाई और कठिन मौसम के कारण शवों को नीचे लाना बेहद जोखिम भरा और महंगा होता है। इसलिए अधिकांश मामलों में शव वहीं छोड़ दिए जाते हैं।
2. के-2 – पर्वतारोहियों की अंतिम परीक्षा
पाकिस्तान और चीन की सीमा पर स्थित के-2 को दुनिया का सबसे कठिन पर्वत माना जाता है। इसकी ढलान बेहद खड़ी और मौसम अत्यंत अनिश्चित होता है। पर्वतारोहण विशेषज्ञ इसे एवरेस्ट से भी ज्यादा चुनौतीपूर्ण मानते हैं। यहां मौत का अनुपात दुनिया की कई अन्य चोटियों की तुलना में अधिक रहा है।
3. अन्नपूर्णा – खूबसूरती के पीछे छिपा खतरा
नेपाल स्थित अन्नपूर्णा पर्वत श्रृंखला अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन पर्वतारोहियों के लिए यह अत्यंत खतरनाक मानी जाती है। हिमस्खलन और अचानक बदलते मौसम के कारण यहां कई हादसे हो चुके हैं। वर्षों तक इसे दुनिया की सबसे घातक चोटियों में गिना जाता रहा है।
4. नंगा पर्वत – ‘किलर माउंटेन’ की पहचान
पाकिस्तान में स्थित नंगा पर्वत को लंबे समय से ‘किलर माउंटेन’ कहा जाता है। शुरुआती अभियानों में यहां बड़ी संख्या में पर्वतारोहियों की मौत हुई थी। तेज हवाएं, बर्फीले तूफान और कठिन चढ़ाई इसे बेहद जोखिम भरा बनाते हैं।
5. कंचनजंगा – रहस्यमयी और खतरनाक
भारत-नेपाल सीमा पर स्थित कंचनजंगा दुनिया की तीसरी सबसे ऊंची चोटी है। स्थानीय मान्यताओं और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यह पर्वत हमेशा से रहस्य और रोमांच का केंद्र रहा है। यहां मौसम अचानक बदल जाता है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।
शवों को नीचे लाना क्यों होता है मुश्किल?
ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों में किसी शव को नीचे लाने के लिए विशेष अभियान चलाना पड़ता है। इसमें कई पर्वतारोहियों और गाइडों की मदद लेनी पड़ती है। खराब मौसम, कम ऑक्सीजन और जानलेवा ढलानों के कारण यह प्रक्रिया बेहद जोखिमपूर्ण होती है। कई बार शव को नीचे लाने में लाखों रुपये खर्च हो जाते हैं। इसी वजह से अधिकांश शव वहीं बर्फ में दबे रह जाते हैं।
रोमांच और जोखिम का संगम
पर्वतारोहण साहस, धैर्य और जुनून का खेल है, लेकिन दुनिया के ये ‘कातिल पहाड़’ याद दिलाते हैं कि प्रकृति के सामने इंसान कितना छोटा है। हर साल सैकड़ों लोग इन ऊंचाइयों को छूने का सपना लेकर निकलते हैं, लेकिन कुछ के लिए यह सफर आखिरी साबित होता है। डेथ जोन की बर्फ में जमे शव आज भी उन कहानियों के गवाह हैं, जो जीत और हार के बीच कहीं खो गईं।