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आस्था पर डाका, धार्मिक स्थलों में चढ़ावे की चोरी और गबन के बढ़ते मामले

भारत में धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालु केवल धन नहीं चढ़ाते, बल्कि अपनी आस्था, विश्वास और मनोकामनाएँ भी समर्पित करते हैं। मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे, चर्च और अन्य धार्मिक संस्थाओं में प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये का चढ़ावा आता है। लेकिन पिछले एक दशक में अनेक ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें इसी चढ़ावे की चोरी, गबन या वित्तीय […]

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  • June 19, 2026 9:00 pm IST, Published 1 hour ago

भारत में धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालु केवल धन नहीं चढ़ाते, बल्कि अपनी आस्था, विश्वास और मनोकामनाएँ भी समर्पित करते हैं। मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे, चर्च और अन्य धार्मिक संस्थाओं में प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये का चढ़ावा आता है। लेकिन पिछले एक दशक में अनेक ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें इसी चढ़ावे की चोरी, गबन या वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगे। यह समस्या किसी एक धर्म या देश तक सीमित नहीं है, भारत से लेकर सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, थाईलैंड और अमेरिका तक ऐसे मामलों ने लोगों का विश्वास झकझोरा है।

अयोध्या राम मंदिर-करोड़ों के चढ़ावे पर सवाल

जून 2026 में देश के सबसे चर्चित धार्मिक स्थल, राम मंदिर अयोध्या, में चढ़ावे के कथित गबन का मामला सामने आया। आरोपों के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन सदस्यीय विशेष जांच दल लीनी एसआईटी गठित किया। जांच में ट्रस्ट सदस्यों, कर्मचारियों और नकदी गिनने की व्यवस्था से जुड़े लोगों से पूछताछ की गई। फिलहाल जांच जारी है और किसी अदालत ने अभी तक किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया है। इसलिए इसे अभी केवल आरोप और जांच का मामला माना जाएगा।

तिरुपति में कर्मचारी पर चोरी का आरोप

देश के सबसे समृद्ध मंदिरों में गिने जाने वाले तिरुमला तिरुपति देवस्थानम में भी दान गिनने वाले विभाग (पराकामनी) के एक कर्मचारी पर नकदी चोरी का आरोप लगा। सीसीटीवी और आंतरिक जांच के आधार पर कार्रवाई हुई। इससे यह स्पष्ट हुआ कि अत्याधुनिक व्यवस्था वाले संस्थानों में भी निगरानी की निरंतर आवश्यकता है।

बेंगलुरु का गली आंजनेय स्वामी मंदिर

2025 में सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में मंदिर कर्मचारियों पर दान राशि निकालने के आरोप लगे। जांच में वित्तीय अनियमितताएँ सामने आने के बाद कर्नाटक सरकार ने मंदिर का प्रशासन अपने नियंत्रण में ले लिया। जांच में वर्षों तक लेखा-जोखा ठीक से न रखने और दान राशि के प्रबंधन में गंभीर कमियाँ पाई गईं।

स्वरवेद महामंदिर का मामला

वाराणसी स्थित स्वरवेद महामंदिर में एक लेखाकार पर लगभग 60 लाख रुपये के गबन का आरोप लगा। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर आपराधिक विश्वासघात और जालसाजी जैसी धाराओं में मामला दर्ज किया। यह मामला बताता है कि धार्मिक संस्थाओं में वित्तीय नियंत्रण और ऑडिट कितना आवश्यक है।

छोटे मंदिर भी सुरक्षित नहीं

मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, गुजरात और कर्नाटक सहित अनेक राज्यों में दानपात्र तोड़कर नकदी चोरी करने की घटनाएँ लगातार सामने आती रही हैं। कई मामलों में सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि कुछ मामलों में चोरी की गई राशि भी बरामद हुई।

सबरीमला में सोने की अनियमितताओं की जांच

केरल के प्रसिद्ध सबरीमला मंदिर में स्वर्ण-मंडित संरचनाओं से जुड़े कथित सोना गबन और वित्तीय अनियमितताओं की जांच ने भी व्यापक ध्यान आकर्षित किया। अदालत की निगरानी में जांच एजेंसियों ने कई पहलुओं की पड़ताल की। मामला अभी विभिन्न जांचों और न्यायिक प्रक्रियाओं में है।

विदेशों के चर्चित मामले

सिंगापुर-सिटी हार्वेस्ट चर्च-सिंगापुर के प्रसिद्ध सिटी हार्वेस्ट चर्च में चर्च निधि के दुरुपयोग का मामला विश्वभर में चर्चा का विषय बना। चर्च के संस्थापक और अन्य अधिकारियों को दोषी ठहराया गया तथा उन्हें कारावास की सजा सुनाई गई। यह धार्मिक संस्थाओं में वित्तीय जवाबदेही का बड़ा उदाहरण माना जाता है।

दक्षिण कोरिया-दक्षिण कोरिया के योइदो फुल गॉस्पेल चर्च से जुड़े वित्तीय गबन के मामले में चर्च नेतृत्व के विरुद्ध कार्रवाई हुई। अदालत ने दोषसिद्धि के बाद कारावास (कुछ मामलों में निलंबित) और आर्थिक दंड भी लगाया।

थाईलैंड-2017 से शुरू हुई थाई टेंपल फ्रॉड जांच में सरकारी अनुदानों और मंदिरों के धन के दुरुपयोग के आरोपों में कई वरिष्ठ बौद्ध भिक्षुओं और अधिकारियों की गिरफ्तारी हुई। जांच के बाद कानूनों में भी बदलाव किए गए ताकि वित्तीय निगरानी मजबूत हो सके।

अमेरिका-अमेरिका में भी पिछले दशक में अनेक चर्चों के पादरियों और वित्तीय अधिकारियों पर दान राशि के गबन के मामले दर्ज हुए। कई मामलों में अदालतों ने जेल, जुर्माना और धन की वसूली के आदेश दिए।

क्यों बढ़ रहे हैं ऐसे मामले

  • विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे कई कारण हैं-
  • नकद चढ़ावे की बड़ी मात्रा।
  • नियमित स्वतंत्र ऑडिट का अभाव।
  • ट्रस्टों में पारदर्शिता की कमी।
  • सीमित तकनीकी निगरानी।
  • एक ही व्यक्ति या छोटे समूह के हाथों में वित्तीय नियंत्रण।

क्या कहता है कानून

भारत में यदि धार्मिक स्थल की दान राशि की चोरी या गबन सिद्ध होता है तो भारतीय न्याय संहिता के अंतर्गत चोरी, आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी और जालसाजी जैसी धाराओं में कार्रवाई की जा सकती है। अपराध की प्रकृति और राशि के अनुसार जुर्माना, संपत्ति की जब्ती और कई वर्षों के कारावास तक का प्रावधान है।

समाधान क्या है

  • विशेषज्ञ धार्मिक संस्थानों में निम्न सुधारों की सलाह देते हैं-
  • प्रत्येक दानपात्र पर 24×7 सीसीटीवी निगरानी।
  • नकद के स्थान पर डिजिटल दान को बढ़ावा।
  • वार्षिक स्वतंत्र ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक करना।
  • ट्रस्टों की आय-व्यय वेबसाइट पर प्रकाशित करना।
  • नकदी गिनती में बहुस्तरीय निगरानी और बैंकिंग प्रणाली का उपयोग।
  • समय-समय पर सामाजिक और सरकारी लेखा परीक्षण।

धार्मिक संस्थाएँ केवल पूजा-अर्चना के केंद्र नहीं, बल्कि समाज के विश्वास की धुरी भी हैं। जब चढ़ावे की चोरी या गबन के मामले सामने आते हैं, तो आर्थिक नुकसान से अधिक आस्था को चोट पहुँचती है। इसलिए धार्मिक संस्थानों के लिए पारदर्शिता, जवाबदेही और आधुनिक वित्तीय प्रबंधन अब विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता बन चुके हैं।

 

लेखक

डाॅ. चेतन आनंद

(कवि एवं पत्रकार)

 

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