नई दिल्ली। वैश्विक बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख और डॉलर की मजबूती के बीच शुक्रवार को सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना ₹5,350 प्रति 10 ग्राम तक लुढ़क गया, जबकि चांदी ₹8,899 प्रति किलोग्राम टूट गई। इस तेज गिरावट ने सर्राफा बाजार से लेकर निवेशकों तक सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। कई निवेशक इसे चिंता का विषय मान रहे हैं, तो कुछ विशेषज्ञ इसे लंबी अवधि के निवेश के लिए अवसर बता रहे हैं।
एक दिन में बड़ी गिरावट, बाजार में बढ़ी बेचैनी
शुक्रवार सुबह MCX पर सोना करीब 2.06 प्रतिशत की गिरावट के साथ ₹1,46,240 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं चांदी 3.73 प्रतिशत टूटकर ₹2,28,721 प्रति किलोग्राम के स्तर तक पहुंच गई। कीमती धातुओं में आई इस भारी गिरावट ने बाजार में हलचल पैदा कर दी है। पिछले कुछ सप्ताह से सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव बना हुआ था, लेकिन शुक्रवार को गिरावट ने नया रिकॉर्ड बना दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली, डॉलर में मजबूती और वैश्विक आर्थिक संकेतों ने इस गिरावट को और तेज कर दिया है। सर्राफा कारोबारियों के अनुसार, कीमतों में आई कमजोरी के बावजूद खुदरा ग्राहकों की खरीदारी अभी सीमित बनी हुई है क्योंकि लोग आगे और गिरावट की संभावना देख रहे हैं।
अमेरिकी फेड के संकेतों का असर
सोने और चांदी की कीमतों में आई इस कमजोरी के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति मानी जा रही है। फेड द्वारा ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रखने के संकेत दिए गए हैं। जब ब्याज दरें बढ़ती हैं तो निवेशकों का रुझान सोने जैसी गैर-ब्याज वाली परिसंपत्तियों से हटकर बॉन्ड और अन्य वित्तीय साधनों की ओर बढ़ जाता है।
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि निवेशकों को उम्मीद थी कि फेड जल्द ही ब्याज दरों में नरमी दिखाएगा, लेकिन हालिया संकेतों ने उन उम्मीदों को कमजोर कर दिया है। यही वजह है कि बुलियन बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ गया।
डॉलर की मजबूती ने बढ़ाया दबाव
अमेरिकी डॉलर इंडेक्स पिछले एक वर्ष के उच्च स्तरों के आसपास बना हुआ है। डॉलर मजबूत होने पर सोना और चांदी अन्य देशों के निवेशकों के लिए महंगे हो जाते हैं, जिससे उनकी मांग घटती है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दोनों धातुओं की कीमतों में कमजोरी देखी जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक डॉलर मजबूत बना रहेगा, तब तक सोने और चांदी पर दबाव बने रहने की संभावना है। हालांकि यदि वैश्विक आर्थिक हालात बिगड़ते हैं या डॉलर में कमजोरी आती है तो इन धातुओं को फिर से समर्थन मिल सकता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार तीसरे सप्ताह गिरावट
वैश्विक बाजार में भी सोना लगातार तीसरे सप्ताह गिरावट की ओर बढ़ रहा है। स्पॉट गोल्ड में कमजोरी बनी हुई है जबकि चांदी की कीमतों में भी तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। निवेशकों का रुझान फिलहाल जोखिम वाली परिसंपत्तियों की ओर बढ़ा है, जिससे सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने की मांग प्रभावित हुई है।
चांदी पर दोहरी मार पड़ रही है। एक ओर निवेशकों की बिकवाली जारी है, वहीं दूसरी ओर औद्योगिक मांग में नरमी के संकेत भी सामने आ रहे हैं। इससे चांदी में सोने की तुलना में अधिक गिरावट दर्ज की जा रही है।
क्या निवेशकों के लिए अवसर है?
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अल्पकालिक निवेशकों को अभी सतर्क रहने की जरूरत है क्योंकि बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। हालांकि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मौजूदा स्तर आकर्षक माने जा सकते हैं।
सोना हमेशा से आर्थिक संकट, महंगाई और भू-राजनीतिक तनाव के समय सुरक्षित निवेश माना जाता रहा है। इसलिए कई वित्तीय सलाहकार मानते हैं कि कीमतों में आई यह गिरावट चरणबद्ध निवेश का अवसर दे सकती है। निवेशकों को एकमुश्त निवेश करने के बजाय धीरे-धीरे खरीदारी करने की सलाह दी जा रही है ताकि जोखिम कम किया जा सके।
शादी-ब्याह के सीजन पर भी असर
सोने और चांदी की कीमतों में आई गिरावट का असर आभूषण बाजार पर भी देखने को मिल सकता है। ज्वेलर्स का मानना है कि यदि कीमतें मौजूदा स्तर पर बनी रहती हैं तो शादी-ब्याह और त्योहारों के सीजन में मांग बढ़ सकती है। इससे घरेलू बाजार को कुछ राहत मिल सकती है।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी चेतावनी दे रहे हैं कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में किसी भी बदलाव के कारण कीमतों में फिर से तेजी आ सकती है। इसलिए खरीदारी करने वाले ग्राहकों को बाजार पर लगातार नजर बनाए रखनी चाहिए।
आगे क्या रहेगा बाजार का रुख?
विश्लेषकों के अनुसार आने वाले दिनों में अमेरिकी महंगाई के आंकड़े, रोजगार रिपोर्ट, डॉलर इंडेक्स और फेडरल रिजर्व की अगली नीति बैठक सोने-चांदी की दिशा तय करेंगे। यदि ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद मजबूत होती है तो कीमती धातुओं में तेजी लौट सकती है। वहीं डॉलर की मजबूती और सख्त मौद्रिक नीति जारी रहने पर दबाव बना रह सकता है।
फिलहाल सोना और चांदी दोनों ही महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तरों के आसपास कारोबार कर रहे हैं। ऐसे में निवेशकों के लिए यह समय जल्दबाजी के बजाय सोच-समझकर निर्णय लेने का है। कीमतों में आई भारी गिरावट ने जहां पुराने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है, वहीं नए निवेशकों के लिए संभावित अवसर के दरवाजे भी खोल दिए हैं। यही कारण है कि पूरे बुलियन बाजार की नजर अब वैश्विक आर्थिक संकेतों और अमेरिकी फेड की अगली चाल पर टिकी हुई है।