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मेटा ने मानी चूक, आपत्तिजनक चाइल्ड कंटेंट मामले में जकरबर्ग ने मांगी माफी

नई दिल्ली: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म मेटा एक बार फिर बच्चों से जुड़े आपत्तिजनक कंटेंट और डीपफेक सामग्री को लेकर विवादों के केंद्र में है। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मार्क जकरबर्ग ने प्लेटफॉर्म पर मौजूद चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटेरियल (CSAM) और डीपफेक कंटेंट से जुड़े मामलों पर खेद व्यक्त करते हुए सार्वजनिक रूप से […]

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  • August 5, 2026 6:00 pm IST, Published 1 hour ago

नई दिल्ली: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म मेटा एक बार फिर बच्चों से जुड़े आपत्तिजनक कंटेंट और डीपफेक सामग्री को लेकर विवादों के केंद्र में है। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मार्क जकरबर्ग ने प्लेटफॉर्म पर मौजूद चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटेरियल (CSAM) और डीपफेक कंटेंट से जुड़े मामलों पर खेद व्यक्त करते हुए सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है। उन्होंने स्वीकार किया कि प्लेटफॉर्म संचालन के दौरान कुछ गंभीर चूक हुईं, जिनके कारण ऐसे कंटेंट को बढ़ावा मिलने के आरोप लगे।

मेटा की ओर से यह भी कहा गया कि कंपनी अपनी कंटेंट वितरण प्रणाली पर नियंत्रण रखती है और यह तय करती है कि किस तरह की सामग्री किन उपयोगकर्ताओं तक पहुंचेगी। इसी दौरान कंपनी ने स्पष्ट किया कि वह सूचना प्रौद्योगिकी कानून के तहत मिलने वाले “सेफ हार्बर” संरक्षण को लेकर भी अपनी कानूनी स्थिति पर विचार रख रही है।

‘सेफ हार्बर’ वह कानूनी प्रावधान है, जिसके तहत सोशल मीडिया कंपनियों को उपयोगकर्ताओं द्वारा पोस्ट किए गए थर्ड-पार्टी कंटेंट के लिए सीमित कानूनी सुरक्षा मिलती है। लेकिन यदि कोई प्लेटफॉर्म जानबूझकर आपत्तिजनक सामग्री को बढ़ावा देता है या उसके प्रसार में भूमिका निभाता है, तो इस संरक्षण पर सवाल उठ सकते हैं।

मार्क जकरबर्ग ने माना कि कुछ प्रकार के कंटेंट को बढ़ावा देने के लिए आर्थिक लाभ से जुड़ी गतिविधियां हुईं, जो चिंता का विषय हैं। उन्होंने कहा कि कंपनी भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए अपने सिस्टम को और मजबूत करेगी तथा बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देगी।

इसी बीच मेटा के चीफ ग्लोबल अफेयर्स ऑफिसर जोएल कपलान ने अपनी टीम के साथ केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात की। दोनों पक्षों के बीच डिजिटल सुरक्षा, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही और ऑनलाइन आपत्तिजनक सामग्री पर नियंत्रण जैसे विषयों पर चर्चा हुई। इससे पहले मेटा के प्रतिनिधियों ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों से भी बातचीत की।

यह पूरा मामला तब और गंभीर हो गया था, जब राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने मीडिया रिपोर्टों के आधार पर स्वतः संज्ञान लेते हुए मेटा को नोटिस जारी किया। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि प्लेटफॉर्म पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कथित विज्ञापन और सामग्री प्रसारित हो रही थी। आयोग ने कंपनी से विस्तृत जवाब मांगा था, जिसके बाद मेटा ने अपना पक्ष आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया।

बाद में आयोग ने संकेत दिया कि मामले की गहन जांच की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर आगे की कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। इसके साथ ही डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के नियमन पर बनी संसदीय समिति की बैठक में भी सोशल मीडिया कंपनियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए। समिति के सदस्यों ने बच्चों और महिलाओं से जुड़े आपत्तिजनक कंटेंट को लेकर कड़ी नाराजगी जताई और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया।

AI और डीपफेक तकनीक के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के बीच सोशल मीडिया कंपनियों पर निगरानी और पारदर्शिता की जिम्मेदारी पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। ऐसे में आने वाले समय में डिजिटल सुरक्षा, कंटेंट मॉडरेशन और कानूनी जवाबदेही से जुड़े नियमों को और सख्त किया जा सकता है। मेटा की ओर से माफी और सरकार के साथ लगातार हो रही बैठकों को इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, अंतिम निर्णय जांच एजेंसियों और संबंधित संस्थाओं की रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा।

 

 

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