नयी दिल्लीः भारत में कॉरपोरेट सेक्टर से जुड़ी व्यवस्थाओं में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। संसदीय समिति ने कंपनी कानून के कुछ महत्वपूर्ण प्रावधानों में संशोधन की सिफारिश की है। इन सिफारिशों के तहत किसी कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) और व्होल-टाइम डायरेक्टर (WTD) बनने की न्यूनतम आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके साथ ही अधिकतम आयु सीमा 70 वर्ष से बढ़ाकर 75 वर्ष करने की भी सिफारिश की गई है।
यदि सरकार इन सुझावों को स्वीकार कर कानून में संशोधन करती है, तो युवा उद्यमियों और अनुभवी कॉरपोरेट नेताओं—दोनों के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं। माना जा रहा है कि यह कदम भारत के कॉरपोरेट ढांचे को वैश्विक मानकों के और करीब ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। वर्तमान नियमों के अनुसार किसी कंपनी का मैनेजिंग डायरेक्टर या व्होल-टाइम डायरेक्टर बनने के लिए न्यूनतम आयु 21 वर्ष निर्धारित है। संसदीय समिति का मानना है कि आज के समय में 18 वर्ष की आयु में ही कई युवा स्टार्टअप शुरू कर रहे हैं, कारोबार चला रहे हैं और नई तकनीकों के जरिए सफल कंपनियां खड़ी कर रहे हैं।
समिति का तर्क है कि यदि कोई व्यक्ति 18 वर्ष की आयु में कानूनी रूप से वयस्क माना जाता है और कई महत्वपूर्ण अधिकारों का उपयोग कर सकता है, तो उसे कंपनी के नेतृत्व की जिम्मेदारी निभाने का अवसर भी मिलना चाहिए। सिफारिशों में अधिकतम आयु सीमा 70 वर्ष से बढ़ाकर 75 वर्ष करने का सुझाव भी शामिल है। मौजूदा व्यवस्था में 70 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति को मैनेजिंग डायरेक्टर या व्होल-टाइम डायरेक्टर नियुक्त करने के लिए विशेष प्रक्रिया अपनानी पड़ती है।
समिति का मानना है कि आज के समय में कई वरिष्ठ उद्योगपति और पेशेवर 70 वर्ष के बाद भी पूरी क्षमता के साथ कंपनियों का सफल संचालन कर रहे हैं। ऐसे में आयु सीमा बढ़ाने से कंपनियां अनुभवी नेतृत्व का लाभ लंबे समय तक उठा सकेंगी। भारत दुनिया के सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम में शामिल है। बड़ी संख्या में युवा उद्यमी कम उम्र में ही नए बिजनेस मॉडल विकसित कर रहे हैं।
इस बदलाव से निवेशकों और स्टार्टअप कंपनियों के बीच भी बेहतर तालमेल बनने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि कई युवा संस्थापक औपचारिक रूप से नेतृत्व की भूमिका निभा सकेंगे। संसदीय समिति का मानना है कि कई देशों में कॉरपोरेट नेतृत्व के लिए आयु संबंधी नियम अधिक लचीले हैं। भारत में भी नियमों को समय के अनुरूप अपडेट करने से कारोबार करने में आसानी बढ़ेगी और देश का कॉरपोरेट ढांचा अंतरराष्ट्रीय प्रथाओं के अधिक करीब पहुंचेगा।
फिलहाल यह केवल संसदीय समिति की सिफारिश है। इसे लागू करने के लिए सरकार को प्रस्ताव पर विचार करना होगा और आवश्यकता पड़ने पर कंपनी कानून में संशोधन करना होगा। संसद की मंजूरी मिलने के बाद ही ये बदलाव प्रभावी हो सकेंगे।
यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले योग्य युवा भी कंपनी के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचने का अवसर प्राप्त कर सकेंगे। वहीं, अनुभवी कॉरपोरेट पेशेवरों को भी लंबे समय तक अपनी सेवाएं देने का अवसर मिलेगा। ऐसे में यह बदलाव भारत के कॉरपोरेट क्षेत्र में नई ऊर्जा और अनुभव के संतुलन को मजबूत करने वाला कदम साबित हो सकता है।