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UPI से बिजली बिल भरने वालों के लिए बड़ी खबर, जानें नया चार्ज

नई UPI MDR व्यवस्था को लेकर बढ़ी चर्चा : नई UPI चार्ज व्यवस्था को लेकर इन दिनों लोगों के बीच काफी चर्चा है। खासकर बिजली, पानी, गैस, टेलीकॉम, बीमा और रेलवे जैसी सेवाओं का भुगतान UPI से करने वाले उपभोक्ता यह जानना चाहते हैं कि 15 अक्टूबर 2026 के बाद उन्हें अतिरिक्त रकम देनी होगी […]

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Gauravshali Bharat News
  • September 17, 2026 3:23 pm IST, Published 1 hour ago

नई UPI MDR व्यवस्था को लेकर बढ़ी चर्चा : नई UPI चार्ज व्यवस्था को लेकर इन दिनों लोगों के बीच काफी चर्चा है। खासकर बिजली, पानी, गैस, टेलीकॉम, बीमा और रेलवे जैसी सेवाओं का भुगतान UPI से करने वाले उपभोक्ता यह जानना चाहते हैं कि 15 अक्टूबर 2026 के बाद उन्हें अतिरिक्त रकम देनी होगी या नहीं।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 15 अक्टूबर 2026 से चुनिंदा Person-to-Merchant (P2M) UPI लेनदेन पर Merchant Discount Rate यानी MDR की नई व्यवस्था लागू होनी है। सामान्य पात्र मर्चेंट पेमेंट में ₹2,000 से अधिक की राशि पर 0.4 प्रतिशत MDR का प्रावधान है, जिसकी अधिकतम सीमा ₹300 प्रति लेनदेन बताई गई है।

हालांकि, हर UPI भुगतान पर 0.4 प्रतिशत शुल्क नहीं लगेगा। कुछ आवश्यक सेवाओं को अलग श्रेणी में रखा गया है। इनमें उपयोगिता सेवाओं से जुड़े भुगतान भी शामिल हैं।

बिजली बिल पर कितना लगेगा UPI MDR?

बिजली बिल को लेकर सबसे ज्यादा भ्रम इसी बात का है कि यदि बिल ₹2,000 से अधिक हुआ तो क्या ग्राहक को 0.4 प्रतिशत अतिरिक्त भुगतान करना पड़ेगा।

उपलब्ध NPCI FAQ की रिपोर्टिंग के अनुसार, निर्धारित उपयोगिता बिल भुगतान को सामान्य 0.4 प्रतिशत MDR से अलग श्रेणी में रखा गया है। ₹2,000 से अधिक के पात्र बिजली, पानी और पाइप्ड गैस जैसे उपयोगिता भुगतान पर ₹5 का फ्लैट MDR लागू होने की जानकारी सामने आई है।

उदाहरण के तौर पर यदि किसी उपभोक्ता का बिजली बिल ₹5,000 है और वह निर्धारित UPI माध्यम से भुगतान करता है, तो संबंधित मर्चेंट/बिलर पर ₹5 का MDR लागू हो सकता है। यह ₹5 उपभोक्ता से अलग से वसूलने वाला ग्राहक शुल्क नहीं है। रिपोर्टों के अनुसार MDR का भुगतान मर्चेंट पक्ष करता है।

इसलिए सोशल मीडिया पर चल रही ऐसी बातों से सावधान रहना जरूरी है कि ₹5,000 के बिजली बिल पर ग्राहक को ₹20 यानी 0.4 प्रतिशत अतिरिक्त देना पड़ेगा। बिजली जैसे निर्धारित यूटिलिटी भुगतान के लिए अलग फ्लैट रेट की व्यवस्था बताई गई है।

₹2,000 या उससे कम के भुगतान पर क्या होगा?

नई व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ₹2,000 की सीमा है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक ₹2,000 तक के पात्र मर्चेंट UPI भुगतान पर MDR शून्य रहेगा। इसी तरह Person-to-Person यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले UPI ट्रांसफर पर भी नई MDR व्यवस्था लागू नहीं होती।

इसका मतलब यह है कि केवल ₹2,000 से अधिक का भुगतान देखकर यह मान लेना सही नहीं होगा कि हर बार 0.4 प्रतिशत कटेगा। भुगतान किस श्रेणी में आता है, यह भी महत्वपूर्ण होगा।

उदाहरण के लिए—

₹2,000 तक पात्र मर्चेंट भुगतान: MDR नहीं

सामान्य पात्र P2M भुगतान ₹2,000 से अधिक: 0.4 प्रतिशत, निर्धारित सीमा तक

निर्धारित यूटिलिटी बिल ₹2,000 से अधिक: फ्लैट ₹5 MDR

P2P UPI ट्रांसफर: MDR नहीं

कुछ छोटे मर्चेंट: निर्धारित शर्तों के तहत MDR से बाहर

₹5 का चार्ज ग्राहक देगा या बिजली विभाग?

यह सवाल सबसे महत्वपूर्ण है। MDR का पूरा नाम Merchant Discount Rate है और यह मूल रूप से मर्चेंट पक्ष से संबंधित शुल्क है।

उपलब्ध रिपोर्टों में स्पष्ट किया गया है कि नए ढांचे में MDR का भुगतान ग्राहक द्वारा अलग से नहीं किया जाना है। सरकार/NPCI की व्यवस्था में मर्चेंट से जुड़े शुल्क और ग्राहक से लिए जाने वाले शुल्क को अलग रखा गया है।

इसलिए बिजली बिल का भुगतान करने वाले ग्राहक को केवल UPI के जरिए भुगतान करने के कारण बिल की राशि के ऊपर अलग से ₹5 जोड़कर देने की बात इस व्यवस्था का उद्देश्य नहीं है।

हालांकि, वास्तविक भुगतान के समय संबंधित बिलर, बैंक, भुगतान ऐप और मर्चेंट श्रेणी की लागू व्यवस्था देखना जरूरी होगा।

सामान्य दुकानदारों के लिए नियम अलग

यहां यह समझना भी जरूरी है कि बिजली बिल और सामान्य दुकानदार को किए गए भुगतान को एक ही नियम में नहीं रखा गया है।

यदि कोई व्यक्ति किसी सामान्य पात्र मर्चेंट को ₹3,000 का UPI भुगतान करता है, तो रिपोर्ट किए गए नए ढांचे के अनुसार 0.4 प्रतिशत MDR यानी ₹12 मर्चेंट पक्ष पर लागू हो सकता है। ₹50,000 के भुगतान पर यही दर ₹200 होगी और ₹75,000 या उससे अधिक के लेनदेन पर ₹300 की अधिकतम सीमा बताई गई है।

इसके विपरीत बिजली, पानी, गैस जैसी निर्धारित उपयोगिता सेवाओं के लिए ₹2,000 से अधिक भुगतान पर फ्लैट ₹5 की व्यवस्था बताई गई है।

किन सेवाओं में अलग व्यवस्था है?

नई MDR व्यवस्था में सभी सेवाओं के लिए एक समान दर नहीं रखी गई है। रिपोर्टों के अनुसार रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, ईंधन और कुछ उपयोगिता सेवाओं को अलग श्रेणी में रखा गया है। इन श्रेणियों में ₹2,000 से अधिक के पात्र भुगतान पर ₹5 का फ्लैट MDR लागू होने की जानकारी है।

वहीं पूंजी बाजार से संबंधित कुछ भुगतान के लिए अलग दर का प्रावधान बताया गया है। इससे स्पष्ट है कि UPI की नई व्यवस्था को केवल यह कहकर नहीं समझा जा सकता कि अब हर ₹2,000 से ऊपर के भुगतान पर 0.4 प्रतिशत कटेगा।

उपभोक्ताओं को क्या ध्यान रखना चाहिए?

उपभोक्ताओं के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि वे UPI भुगतान करते समय अंतिम भुगतान राशि और स्क्रीन पर दिखाई जा रही किसी अतिरिक्त फीस को ध्यान से देखें। यदि कोई मर्चेंट नए MDR के नाम पर ग्राहक से अलग से शुल्क मांगता है, तो भुगतान की रसीद और संबंधित जानकारी सुरक्षित रखना उपयोगी होगा।

NPCI के अनुसार UPI एक त्वरित बैंक-टू-बैंक भुगतान प्रणाली है और इसके माध्यम से बिजली जैसे उपयोगिता बिलों का भुगतान भी किया जा सकता है।

निष्कर्ष

15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाली नई UPI MDR व्यवस्था को लेकर सबसे बड़ा भ्रम यह है कि हर ₹2,000 से अधिक के भुगतान पर ग्राहक से 0.4 प्रतिशत शुल्क लिया जाएगा। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक ऐसा नहीं है। सामान्य पात्र P2M लेनदेन में 0.4 प्रतिशत MDR का प्रावधान है, जबकि बिजली, पानी और पाइप्ड गैस जैसे निर्धारित यूटिलिटी भुगतान के लिए ₹5 का फ्लैट MDR बताया गया है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह MDR मर्चेंट पक्ष का शुल्क है, न कि ग्राहक से सीधे वसूला जाने वाला UPI शुल्क। इसलिए बिजली बिल ₹5,000 हो या उससे अधिक, केवल नई MDR व्यवस्था के आधार पर ग्राहक को 0.4 प्रतिशत अतिरिक्त भुगतान करना होगा—ऐसा निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा।

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