नई दिल्ली। ऑनलाइन सट्टेबाजी पर कानूनी शिकंजा कसने के बावजूद भारत में इसका अवैध कारोबार लगातार सक्रिय है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश में ऑनलाइन सट्टेबाजी का अवैध बाजार करीब 10 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। प्रतिबंधों से बचने के लिए कई सट्टेबाजी मंच विदेशों से संचालित किए जा रहे हैं और यूजर्स तक पहुंच बनाने के लिए नए डोमेन, विदेशी सर्वर, निजी मैसेजिंग समूह और एजेंटों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में सक्रिय 15 अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी मंचों पर 540 करोड़ से अधिक विजिट दर्ज की गईं। इसका औसत निकालें तो हर दिन करीब 1.48 करोड़ बार इन मंचों तक पहुंच बनाई गई। इसके अलावा करीब 854 इन्फ्लुएंसर भी सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म के प्रचार से जुड़े पाए गए हैं।
ऑनलाइन मनी गेमिंग और सट्टेबाजी पर रोक लगाने के लिए संसद ने 2025 में कानून पारित किया था, जो 1 मई 2026 से प्रभावी हुआ। इसके तहत पैसे से जुड़े ऑनलाइन खेलों और सट्टेबाजी की गतिविधियों, उनके प्रचार तथा भुगतान की सुविधा पर प्रतिबंध लगाया गया है।
इसके बावजूद विदेशों से संचालित प्लेटफॉर्म भारतीय यूजर्स तक पहुंच बनाने के लिए अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि निजी मैसेजिंग समूहों, सरोगेट विज्ञापनों, इन्फ्लुएंसर और एजेंटों के माध्यम से लोगों को इन प्लेटफॉर्म तक पहुंचाया जा रहा है।
जांच से बचने के लिए म्यूल बैंक खातों, नए डोमेन और विदेशी सर्वरों का इस्तेमाल किए जाने की भी बात रिपोर्ट में कही गई है। ऐसे नेटवर्क के कारण प्रतिबंधित प्लेटफॉर्मों को बंद करना और उनके संचालन पर पूरी तरह रोक लगाना चुनौती बना हुआ है।
रिपोर्ट के मुताबिक, दुनियाभर में करीब 8 करोड़ वयस्क सट्टेबाजी की लत से जूझ रहे हैं। इसका असर केवल सट्टा खेलने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसके परिवार और आसपास के लोगों पर भी पड़ सकता है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एक व्यक्ति की सट्टेबाजी की आदत से औसतन छह अन्य लोग प्रभावित हो सकते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार करीब 60 प्रतिशत यूजर्स पैसे गंवाते हैं। लगातार आर्थिक नुकसान होने से परिवार की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ सकता है। इसका असर इलाज, शिक्षा और रोजमर्रा की जरूरतों पर भी पड़ने की आशंका रहती है।
ऑनलाइन सट्टेबाजी और पैसे वाले खेलों में यूजर को लंबे समय तक जोड़े रखने के लिए अलग-अलग डिजिटल तकनीकों का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है। इनमें भ्रामक डिजाइन, लत बढ़ाने वाले एल्गोरिदम, बॉट और एजेंट शामिल हैं।
जीत मिलने पर यूजर को इनाम और आर्थिक लाभ का अनुभव होता है। वहीं, हार के बाद कई लोग पिछली रकम वापस हासिल करने की कोशिश में दोबारा और पहले से बड़ा दांव लगाने लगते हैं। इस तरह नुकसान की भरपाई करने की कोशिश धीरे-धीरे सट्टेबाजी की आदत को बढ़ा सकती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, सट्टेबाजी की समस्या बढ़ने के तीन प्रमुख संकेत हैं—अपने व्यवहार पर नियंत्रण खोना, सट्टेबाजी को अन्य गतिविधियों से अधिक प्राथमिकता देना और नुकसान होने के बावजूद इसे जारी रखना।
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की आसान उपलब्धता, डिजिटल भुगतान और सोशल मीडिया के जरिए होने वाले प्रचार के कारण इस समस्या से निपटने के लिए केवल कानूनी कार्रवाई ही नहीं, बल्कि जागरूकता और डिजिटल प्लेटफॉर्म की निगरानी भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
प्रतिबंध के बावजूद सामने आ रहे आंकड़े बताते हैं कि विदेशों से संचालित अवैध सट्टेबाजी नेटवर्क पर कार्रवाई और यूजर्स को ऐसे मंचों से दूर रखने की चुनौती अभी बनी हुई है।