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नेपाल की बाढ़ में दिखा विशाल शालिग्राम, क्या है पूरा सच?

नई दिल्ली/काठमांडू: नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बीच सोशल मीडिया पर एक विशाल काले पत्थर की तस्वीर और वीडियो तेजी से वायरल हो रही है। इस पत्थर पर गोलाकार और चक्र जैसी आकृति दिखाई दे रही है। वायरल पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि यह कोई सामान्य चट्टान नहीं, बल्कि हजारों-लाखों वर्षों […]

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  • August 28, 2026 10:00 pm IST, Published 54 minutes ago

नई दिल्ली/काठमांडू: नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बीच सोशल मीडिया पर एक विशाल काले पत्थर की तस्वीर और वीडियो तेजी से वायरल हो रही है। इस पत्थर पर गोलाकार और चक्र जैसी आकृति दिखाई दे रही है। वायरल पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि यह कोई सामान्य चट्टान नहीं, बल्कि हजारों-लाखों वर्षों से हिमालय की बर्फ और चट्टानों के नीचे दबा हुआ विशाल शालिग्राम पत्थर है, जो बाढ़ और तेज बहाव के कारण नदी के सामने आ गया।

तस्वीर के साथ किए जा रहे दावों में इसे करीब 4000 करोड़ वर्ष पुराना तक बताया जा रहा है और इसे भगवान विष्णु तथा शिव युग से जोड़कर भी पेश किया जा रहा है। हालांकि, इन दावों को लेकर सावधानी जरूरी है। उपलब्ध वैज्ञानिक जानकारी के मुताबिक शालिग्राम वास्तव में नेपाल की काली गंडकी नदी क्षेत्र में मिलने वाले जीवाश्मीकृत अमोनाइट से जुड़े होते हैं। इनकी धार्मिक मान्यता बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन वायरल तस्वीर में दिख रहे पूरे विशाल पत्थर को शालिग्राम बताने या उसकी निश्चित उम्र 4000 करोड़ वर्ष बताने की अभी वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हुई है।

बाढ़ के बीच क्यों चर्चा में आया यह पत्थर?

नेपाल में हालिया विनाशकारी बाढ़ और हिमालयी क्षेत्र में हुई ग्लेशियर टूटने की घटनाओं के बाद सोशल मीडिया पर कई तस्वीरें और वीडियो तेजी से प्रसारित हो रहे हैं। 26 अगस्त 2026 को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास एक बड़े ग्लेशियर के टूटने से बाढ़ और मलबे का भयावह प्रवाह आया। विशेषज्ञों के मुताबिक ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे गिरा, जिससे बर्फ, चट्टान और पानी का तेज बहाव पैदा हुआ।

इसी प्राकृतिक आपदा की पृष्ठभूमि में काली गंडकी नदी और शालिग्राम से जुड़ी तस्वीरों ने लोगों का ध्यान खींचा है। वायरल पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि तेज बहाव के कारण नदी में दबा कोई विशाल शालिग्राम बाहर दिखाई देने लगा है।

हालांकि, किस स्थान पर यह तस्वीर ली गई और तस्वीर में दिख रहा पत्थर वास्तव में वही बताया गया शालिग्राम है या कोई अन्य प्राकृतिक चट्टान, इसकी स्वतंत्र वैज्ञानिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।

शालिग्राम आखिर क्या होता है?

शालिग्राम को हिंदू धर्म, विशेष रूप से वैष्णव परंपरा में अत्यंत पवित्र माना जाता है। प्राकृतिक रूप से मिलने वाले इन पत्थरों को भगवान विष्णु का स्वरूप माना जाता है। इनकी खास पहचान अक्सर इनके भीतर या सतह पर दिखाई देने वाली गोलाकार, सर्पिल अथवा चक्र जैसी संरचनाओं से होती है।

प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय के अनुसार, शालिग्राम अमोनाइट जीवाश्मों से जुड़े काले चूना-पत्थर के रूप हैं। इन पर दिखाई देने वाली चक्र जैसी आकृतियां अमोनाइट के खोल की पसलियों से संबंधित हो सकती हैं। यही प्राकृतिक आकृतियां धार्मिक परंपरा में भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र से जोड़ी जाती हैं।

कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से जुड़े शोध में भी बताया गया है कि हिमालयी नेपाल की काली गंडकी घाटी से मिलने वाले जीवाश्म अमोनाइट को शालिग्राम के रूप में धार्मिक महत्व प्राप्त है और दक्षिण एशिया में लंबे समय से इनकी पूजा की परंपरा रही है।

क्या यह पत्थर करोड़ों साल पुराना हो सकता है?

यहीं वायरल दावे का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा सामने आता है। सोशल मीडिया पोस्ट में पत्थर को 4000 करोड़ वर्ष पुराना बताया जा रहा है। यह दावा वैज्ञानिक दृष्टि से बेहद संदिग्ध है।

पृथ्वी की अनुमानित आयु करीब 4.54 अरब वर्ष, यानी लगभग 454 करोड़ वर्ष मानी जाती है। ऐसे में किसी पत्थर या जीवाश्म की उम्र 4000 करोड़ वर्ष बताना पृथ्वी की वर्तमान वैज्ञानिक आयु से भी कई गुना अधिक होगा। इसलिए वायरल पोस्ट में दिया गया यह आंकड़ा वैज्ञानिक रूप से स्वीकार्य नहीं माना जा सकता।

शालिग्राम से जुड़े अमोनाइट जीवाश्म इससे कहीं कम, लेकिन फिर भी अत्यंत प्राचीन भूवैज्ञानिक काल से संबंधित हैं। विभिन्न स्रोत इन जीवाश्मों को जुरासिक और क्रिटेशियस काल से जोड़ते हैं।

इसलिए यह कहना ज्यादा उचित होगा कि शालिग्राम से जुड़े जीवाश्म करोड़ों वर्षों पुराने हो सकते हैं, लेकिन वायरल पोस्ट में दिया गया 4000 करोड़ वर्ष का आंकड़ा गलत या अतिरंजित है।

तस्वीर में दिख रही चक्र जैसी आकृति का रहस्य

वायरल तस्वीर की सबसे आकर्षक बात उस पत्थर पर दिखाई दे रही गोलाकार आकृति है। पहली नजर में यह किसी विशाल शंख या चक्र जैसी दिखाई देती है। यही वजह है कि सोशल मीडिया यूजर्स इसे शालिग्राम से जोड़ रहे हैं।

वैज्ञानिक दृष्टि से अमोनाइट के जीवाश्मों में प्राकृतिक सर्पिल संरचनाएं मिलती हैं। शालिग्राम की धार्मिक पहचान में भी ऐसी आकृतियों को विशेष महत्व दिया जाता है।

लेकिन केवल तस्वीर देखकर किसी बड़े पत्थर को निश्चित रूप से शालिग्राम घोषित करना उचित नहीं होगा। इसके लिए भूवैज्ञानिक जांच, स्थान की पुष्टि और पत्थर की संरचना का वैज्ञानिक परीक्षण जरूरी होगा।

क्या बाढ़ ने सच में कोई प्राचीन रहस्य उजागर किया?

यह संभव है कि भारी बारिश और तेज नदी प्रवाह से पहले से मौजूद कोई चट्टानी हिस्सा ज्यादा स्पष्ट दिखाई देने लगा हो। काली गंडकी नदी स्वयं शालिग्राम जीवाश्मों के लिए प्रसिद्ध है। इसलिए बाढ़ के दौरान किसी असामान्य आकार की चट्टान या जीवाश्म का दिखाई देना पूरी तरह असंभव नहीं है।

लेकिन वायरल तस्वीर के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना कि हिमालय के नीचे दबा 4000 करोड़ वर्ष पुराना विशाल शालिग्राम बाहर निकल आया, अभी प्रमाणित तथ्य नहीं है।

विशेषज्ञों के अनुसार, हाल की नेपाल बाढ़ का प्रमुख संबंध हिमालयी ग्लेशियर के टूटने, बर्फ-चट्टान के मलबे और अचानक आए तेज जलप्रवाह से है।

आस्था और विज्ञान दोनों के लिए महत्वपूर्ण

शालिग्राम केवल एक पत्थर नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की धार्मिक आस्था से जुड़ा विषय है। वहीं भूवैज्ञानिक दृष्टि से भी ये जीवाश्म हिमालय के उस प्राचीन भूगर्भीय इतिहास की झलक देते हैं, जब आज का हिमालय क्षेत्र समुद्री परिस्थितियों से जुड़ा हुआ था।

इसी कारण वायरल तस्वीर को लेकर लोगों की जिज्ञासा स्वाभाविक है। मगर सोशल मीडिया पर किसी तस्वीर के साथ लिखे दावे को तुरंत तथ्य मान लेना सही नहीं है।

फिलहाल तस्वीर में दिख रहे विशाल पत्थर को शालिग्राम बताने का दावा स्वतंत्र रूप से प्रमाणित नहीं है। हां, काली गंडकी नदी क्षेत्र में वास्तविक शालिग्राम जीवाश्मों का मिलना और उनका धार्मिक महत्व वैज्ञानिक तथा ऐतिहासिक स्रोतों से स्थापित है।

निष्कर्ष

नेपाल की बाढ़ के बीच वायरल हुआ यह विशाल पत्थर निश्चित रूप से लोगों के लिए कौतूहल का विषय बन गया है। इसकी आकृति शालिग्राम जैसी प्रतीत होती है, लेकिन तस्वीर के आधार पर इसकी पहचान और उम्र तय नहीं की जा सकती। खासकर 4000 करोड़ वर्ष पुराना होने का दावा वैज्ञानिक तथ्यों से मेल नहीं खाता।

इसलिए फिलहाल इसे “नेपाल में दिखा विशाल शालिग्राम” के दावे वाली वायरल तस्वीर के रूप में देखना ज्यादा उचित है, न कि प्रमाणित 4000 करोड़ वर्ष पुराने शालिग्राम के रूप में।

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