नयी दिल्ली: सत्य निकेतन इलाके में इमारत गिरने की घटना ने इलाके में अफरा-तफरी का माहौल पैदा कर दिया। हादसे के बाद राहत और बचाव कार्य तेजी से शुरू किया गया। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटनास्थल का जायजा लेते हुए बचाव अभियान और अब तक हुई कार्रवाई की जानकारी दी। मुख्यमंत्री के मुताबिक, मलबे का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा हटाया जा चुका है। राहत एवं बचाव दल लगातार मलबे में फंसे लोगों की तलाश और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने में जुटे रहे।
मुख्यमंत्री ने बताया कि हादसे के बाद अब तक 12 लोगों को मलबे से निकाला गया है। इनमें छह लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि छह लोग घायल हैं। घायलों को तत्काल उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। प्रशासन की ओर से राहत कार्यों की निगरानी की जा रही है और यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है कि मलबे में कोई अन्य व्यक्ति फंसा न रह गया हो।
रेखा गुप्ता ने कहा कि हादसे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दिशा-निर्देश मिल रहे हैं। सरकार की प्राथमिकता राहत और बचाव कार्य को पूरा करना तथा प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराना है। प्रशासनिक और बचाव एजेंसियों को मौके पर पूरी सतर्कता के साथ काम करने के निर्देश दिए गए हैं।
हादसे के बाद आसपास की इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी प्रशासन ने कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि आसपास मौजूद खतरनाक इमारतों को खाली कराया गया है, ताकि किसी दूसरे हादसे की आशंका को टाला जा सके। दुर्घटनाग्रस्त इमारत के बगल में स्थित एक अन्य इमारत को भी गिराने का निर्णय लिया गया है। प्रशासन का मानना है कि कमजोर या असुरक्षित ढांचे को हटाना लोगों की सुरक्षा के लिहाज से जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि दिल्ली में अब इमारतों का व्यापक ऑडिट कराया जाएगा। इसका उद्देश्य ऐसी इमारतों की पहचान करना होगा, जिनकी संरचना कमजोर है या जिनसे लोगों की सुरक्षा को खतरा हो सकता है। ऑडिट के दौरान भवनों की स्थिति, निर्माण से जुड़े नियमों के पालन और सुरक्षा मानकों की जांच किए जाने की बात कही गई है।
सत्य निकेतन की घटना ने एक बार फिर राजधानी में पुरानी और जर्जर इमारतों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। घनी आबादी वाले इलाकों में कमजोर भवनों की मौजूदगी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। ऐसे में प्रशासन के सामने न केवल तत्काल राहत कार्य पूरा करने की चुनौती है, बल्कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की भी जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के संकेत देते हुए कहा कि जिन अधिकारियों की अनदेखी सामने आएगी, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। सरकार यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि इमारत की सुरक्षा को लेकर पहले कोई शिकायत या चेतावनी थी या नहीं और संबंधित विभागों ने उस पर क्या कार्रवाई की।
फिलहाल राहत और बचाव अभियान पर सबसे ज्यादा जोर है। मलबा पूरी तरह हटाए जाने के बाद घटना की विस्तृत जांच से हादसे के कारणों और जिम्मेदारियों की तस्वीर साफ होने की उम्मीद है। प्रशासन की ओर से आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने और लोगों को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
यह घटना राजधानी में भवन सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत को भी सामने लाती है। आने वाले दिनों में होने वाला इमारतों का ऑडिट यह तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है कि किन भवनों को मरम्मत की जरूरत है और किन्हें खाली कराना या हटाना जरूरी है। सरकार की ओर से जवाबदेही तय करने की बात के बाद अब निगाहें जांच की रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई पर रहेंगी।