लखनऊ: समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास और किसानों की जमीन के अधिग्रहण को लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार का दावा है कि 84 हजार हेक्टेयर जमीन भू-माफियाओं से वापस ली गई है, तो उसी जमीन का इस्तेमाल उद्योग स्थापित करने के लिए किया जाना चाहिए। अखिलेश ने पूछा कि सरकार उस भूमि पर उद्योग लगाने की दिशा में आगे क्यों नहीं बढ़ रही है और औद्योगिक गलियारों के लिए किसानों की जमीन लेने की जरूरत क्यों पड़ रही है|
अखिलेश यादव ने किसानों की जमीन के अधिग्रहण की स्थिति में उचित मुआवजे की मांग भी उठाई। उन्होंने कहा कि यदि औद्योगिक गलियारे के लिए किसानों की भूमि ली जा रही है तो केवल मौजूदा सर्किल रेट के आधार पर भुगतान नहीं होना चाहिए, बल्कि जमीन की वास्तविक बाजार कीमत को ध्यान में रखकर किसानों को मुआवजा दिया जाना चाहिए। उनका कहना है कि विकास परियोजनाओं के लिए जमीन लेने से पहले किसानों के हितों और उनकी संपत्ति के उचित मूल्य का ध्यान रखना जरूरी है।
सपा प्रमुख का यह बयान उत्तर प्रदेश में औद्योगिक निवेश और भूमि से जुड़े मुद्दों पर सरकार की नीतियों की आलोचना के तौर पर सामने आया है। हाल के दिनों में अखिलेश यादव ने प्रदेश में निवेश और रोजगार को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने दावा किया है कि निवेश आकर्षित करने को लेकर किए जा रहे दावों और जमीन पर दिखाई देने वाले औद्योगिक विकास के बीच अंतर है। हालांकि, ये आरोप अखिलेश यादव की राजनीतिक टिप्पणी हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के तौर पर नहीं देखा जा सकता।
भूमि अधिग्रहण और मुआवजे का सवाल उत्तर प्रदेश में औद्योगिक परियोजनाओं के साथ लगातार जुड़ा रहा है। किसानों की जमीन का मूल्य तय करने में सर्किल रेट एक महत्वपूर्ण आधार होता है, लेकिन बाजार मूल्य और सर्किल रेट के बीच अंतर होने पर विवाद की स्थिति भी पैदा हो सकती है। लखनऊ में इस साल जिला प्रशासन ने ग्रामीण क्षेत्रों की कृषि भूमि के सर्किल रेट में संशोधन किया है। संशोधित दरों में कई प्रमुख मार्गों और एक्सप्रेसवे के आसपास की जमीन के मूल्य में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई है।
लखनऊ जिला प्रशासन के अनुसार, 2026 में संशोधित सर्किल रेट के तहत कुछ प्रमुख सड़क मार्गों के आसपास कृषि भूमि की दर एक करोड़ रुपये से लेकर 1.30 करोड़ रुपये प्रति हेक्टेयर तक पहुंची है। प्रशासन ने इन बदलावों के पीछे प्रचलित सर्किल रेट और बाजार दर के बीच अंतर को कम करने का तर्क दिया था। इससे यह स्पष्ट है कि जमीन के सरकारी मूल्यांकन और बाजार कीमत के बीच अंतर का मुद्दा व्यावहारिक स्तर पर भी मौजूद है।
अखिलेश यादव ने अपने बयान में औद्योगिक गलियारों के निर्माण को लेकर सरकार की प्राथमिकताओं पर भी सवाल उठाया। उनका तर्क है कि यदि पहले से उपलब्ध सरकारी या वापस ली गई भूमि पर उद्योग लगाए जा सकते हैं, तो किसानों की कृषि भूमि का अधिग्रहण कम किया जा सकता है। उन्होंने सरकार से यह भी पूछा कि उद्योग लगाने के लिए उपलब्ध भूमि का इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा है और इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के कितने अवसर पैदा हुए हैं।
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उद्योग, रोजगार और किसानों से जुड़े मुद्दे राजनीतिक बहस के केंद्र में हैं। सपा प्रमुख का ताजा बयान भी इसी व्यापक राजनीतिक बहस का हिस्सा है। एक तरफ सरकार औद्योगिक निवेश और बुनियादी ढांचे के विस्तार को विकास का आधार बता रही है, वहीं विपक्ष किसानों की जमीन, मुआवजे और रोजगार के अवसरों को लेकर सवाल उठा रहा है। आने वाले समय में औद्योगिक परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण और किसानों को मिलने वाले मुआवजे का मुद्दा प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण विषय बना रह सकता है।