नई दिल्ली। सरकारी स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता और शिक्षकों की कार्यप्रणाली पर अब पहले से ज्यादा सख्त नजर रखी जाएगी। शिक्षा विभाग ने शिक्षकों की मॉनिटरिंग के लिए डिजिटल मोड में एक नई व्यवस्था तैयार करने की तैयारी शुरू कर दी है। इस व्यवस्था के तहत स्कूलों में जाकर शिक्षक क्या पढ़ा रहे हैं, किस तरह पढ़ा रहे हैं और कक्षा में विद्यार्थियों की पढ़ाई किस स्तर पर हो रही है, इसकी रिपोर्ट तैयार की जाएगी। खास बात यह है कि यह पूरी प्रक्रिया केवल औपचारिक निरीक्षण तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसकी रिपोर्ट विभाग के स्तर पर तैयार किए जा रहे डिजिटल डैशबोर्ड पर दर्ज की जाएगी।
जानकारी के मुताबिक, नवंबर से शिक्षकों की मॉनिटरिंग की यह व्यवस्था शुरू होने की संभावना है। शिक्षा विभाग की ओर से इसके लिए विशेष डिजिटल डैशबोर्ड तैयार किया जा रहा है। इस डैशबोर्ड के जरिए अधिकारियों को अलग-अलग स्कूलों में शिक्षकों के कामकाज और कक्षा में शिक्षण की स्थिति की जानकारी मिल सकेगी। इससे विभाग को यह समझने में मदद मिलेगी कि स्कूलों में निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुसार पढ़ाई हो रही है या नहीं और शिक्षकों की ओर से अपनाई जा रही शिक्षण पद्धति कितनी प्रभावी है।
हर दिन तीन स्कूलों का करना होगा भ्रमण
नई मॉनिटरिंग व्यवस्था के तहत चयनित शिक्षकों को उनके जिले से बाहर स्थित स्कूलों में भेजे जाने की योजना है। इन शिक्षकों का काम केवल स्कूल का निरीक्षण करना नहीं होगा, बल्कि उन्हें कक्षा में चल रही पढ़ाई को करीब से समझना होगा। बताया गया है कि एक दिन में एक शिक्षक को तीन स्कूलों का भ्रमण करना होगा।
निरीक्षण के दौरान यह देखा जाएगा कि संबंधित स्कूल में शिक्षक विद्यार्थियों को क्या पढ़ा रहे हैं और किस तरीके से पढ़ा रहे हैं। इसके अलावा कक्षा में बच्चों की भागीदारी, शिक्षण सामग्री के इस्तेमाल और पढ़ाई के वातावरण जैसी चीजों पर भी ध्यान दिया जा सकता है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य स्कूलों में केवल शिक्षक की मौजूदगी सुनिश्चित करना नहीं, बल्कि कक्षा में वास्तविक रूप से किस तरह की पढ़ाई हो रही है, इसकी जानकारी विभाग तक पहुंचाना है।
रिपोर्ट सीधे शिक्षा विभाग तक पहुंचेगी
मॉनिटरिंग करने वाले शिक्षकों को अपनी रिपोर्ट विशेष रूप से तैयार किए गए डिजिटल डैशबोर्ड पर भेजनी होगी। इसके बाद इस रिपोर्ट को शिक्षा मंत्री और विभागीय अधिकारियों के स्तर पर देखा जा सकेगा।
डिजिटल डैशबोर्ड के इस्तेमाल से मॉनिटरिंग प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने की कोशिश की जा रही है। अभी स्कूल निरीक्षण के बाद रिपोर्ट अलग-अलग माध्यमों से अधिकारियों तक पहुंचती है, लेकिन डिजिटल व्यवस्था लागू होने के बाद सूचनाओं को एक ही प्लेटफॉर्म पर दर्ज करने की योजना है।
इससे विभाग के पास अलग-अलग स्कूलों और शिक्षकों से संबंधित मॉनिटरिंग रिपोर्ट का रिकॉर्ड भी उपलब्ध रहेगा। भविष्य में इसी रिकॉर्ड के आधार पर स्कूलों की स्थिति और शिक्षण व्यवस्था का मूल्यांकन किया जा सकता है।
तबादले के बाद बढ़ेंगे अतिरिक्त शिक्षक
शिक्षा विभाग ने यह भी आकलन किया है कि शिक्षकों के तबादले की प्रक्रिया पूरी होने के बाद कई स्कूलों में अतिरिक्त शिक्षक उपलब्ध हो सकते हैं। इन अतिरिक्त शिक्षकों को मॉनिटरिंग व्यवस्था में इस्तेमाल करने की योजना बनाई गई है।
इसके लिए शिक्षकों का चयन किया जाएगा और उन्हें आवश्यक प्रशिक्षण देने के बाद मॉनिटरिंग के काम में लगाया जा सकता है। यानी विभाग की योजना मौजूदा मानव संसाधन का इस्तेमाल करते हुए स्कूलों की निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की है।
इस पहल से यह भी उम्मीद की जा रही है कि जिन स्कूलों में शिक्षकों की संख्या आवश्यकता से अधिक है, वहां उपलब्ध अतिरिक्त मानव संसाधन का उपयोग दूसरे महत्वपूर्ण शैक्षिक कार्यों में किया जा सकेगा।
पहली जांच के बाद फिर होगा क्रॉस चेक
नई व्यवस्था की सबसे अहम बातों में से एक क्रॉस चेकिंग बताई जा रही है। मॉनिटरिंग के दौरान जिस स्कूल में शिक्षक जाकर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगा, उसकी जांच के लिए बाद में किसी दूसरे शिक्षक को उसी विद्यालय में भेजे जाने की व्यवस्था की जा सकती है।
इसका उद्देश्य रिपोर्ट में किसी प्रकार की गलती या पक्षपात की संभावना को कम करना है। यदि पहली रिपोर्ट और दूसरी जांच में अंतर मिलता है तो विभाग के पास मामले को दोबारा देखने का आधार उपलब्ध होगा।
इससे मॉनिटरिंग प्रक्रिया केवल रिपोर्ट जमा करने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि रिपोर्ट की विश्वसनीयता जांचने का भी प्रयास किया जाएगा।
शिक्षकों के लिए बदलेगा मॉनिटरिंग का तरीका
अब तक स्कूलों की निगरानी मुख्य रूप से विभागीय अधिकारियों और निरीक्षण टीमों के माध्यम से होती रही है। नई व्यवस्था में शिक्षकों को भी मॉनिटरिंग प्रक्रिया का हिस्सा बनाए जाने की तैयारी है। इससे शिक्षकों के बीच अपने अनुभव साझा करने और अलग-अलग स्कूलों की शिक्षण पद्धतियों को समझने का अवसर मिल सकता है।
हालांकि, इस व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि मॉनिटरिंग करने वाले शिक्षकों को किस तरह का प्रशिक्षण दिया जाता है और रिपोर्ट तैयार करने के लिए डिजिटल डैशबोर्ड पर किस प्रकार के मानक तय किए जाते हैं।
यदि निरीक्षण के लिए स्पष्ट मानक तय किए जाते हैं तो विभाग को स्कूलों की वास्तविक स्थिति का बेहतर आकलन मिल सकता है। वहीं, शिक्षकों पर अनावश्यक प्रशासनिक दबाव न पड़े, इसके लिए मॉनिटरिंग प्रक्रिया को सरल और उद्देश्यपूर्ण रखना भी जरूरी होगा।
शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही बढ़ाने की कोशिश
शिक्षा विभाग की इस पहल को सरकारी स्कूलों में जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। डिजिटल डैशबोर्ड के माध्यम से मॉनिटरिंग रिपोर्ट को एक जगह उपलब्ध कराने से अधिकारियों के लिए स्कूलों की स्थिति पर नजर रखना आसान हो सकता है।
सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा कि नवंबर से शुरू होने वाली प्रस्तावित व्यवस्था जमीन पर कितनी प्रभावी साबित होती है। यदि स्कूलों में होने वाली वास्तविक पढ़ाई, शिक्षकों की कार्यप्रणाली और विद्यार्थियों की शैक्षिक स्थिति की सही तस्वीर डिजिटल रिपोर्ट के जरिए सामने आती है, तो इससे शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस कदम उठाने में मदद मिल सकती है।
फिलहाल शिक्षा विभाग स्तर पर इस व्यवस्था को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया चल रही है। नवंबर में डिजिटल मॉनिटरिंग शुरू होने के बाद यह साफ होगा कि नई व्यवस्था स्कूलों की पढ़ाई और शिक्षकों की जवाबदेही पर कितना असर डालती है।