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NCERT की नई पॉलिटिकल साइंस टीम में RSS से जुड़े 4 नाम सामने

नई दिल्ली। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 11वीं और 12वीं की पॉलिटिकल साइंस यानी राजनीतिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तकों को तैयार करने वाली टीम का पुनर्गठन किया है। नई टीम में कुल 20 सदस्यों को शामिल किया गया है। इनमें विश्वविद्यालयों के शिक्षाविदों, स्कूल शिक्षकों और NCERT से जुड़े अकादमिक विशेषज्ञों को […]

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  • August 20, 2026 7:30 pm IST, Published 59 minutes ago

नई दिल्ली। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 11वीं और 12वीं की पॉलिटिकल साइंस यानी राजनीतिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तकों को तैयार करने वाली टीम का पुनर्गठन किया है। नई टीम में कुल 20 सदस्यों को शामिल किया गया है। इनमें विश्वविद्यालयों के शिक्षाविदों, स्कूल शिक्षकों और NCERT से जुड़े अकादमिक विशेषज्ञों को जगह दी गई है। हालांकि, इस नई टीम में ऐसे चार सदस्यों की मौजूदगी चर्चा का विषय बन गई है, जिनके राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) या उससे जुड़े संगठनों से संबंध बताए जा रहे हैं।

20 सदस्यीय टीम में चार सदस्यों का RSS कनेक्शन

नई पाठ्यपुस्तक विकास टीम की कमान राजनीतिक विश्लेषक और शिक्षाविद संदीप शास्त्री को सौंपी गई है। टीम को वरिष्ठ माध्यमिक स्तर की राजनीतिक विज्ञान की पुस्तकों को नए पाठ्यक्रम और शैक्षणिक जरूरतों के अनुरूप तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, टीम में यदुनाथ देशपांडे, प्रशांत दिवेकर, वंदना मिश्रा और रवि रमेशचंद्र शुक्ला ऐसे सदस्य हैं, जिनके RSS, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) या RSS से जुड़े संस्थानों से संबंध बताए गए हैं। इन सदस्यों की शैक्षणिक और संगठनात्मक पृष्ठभूमि को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में भी चर्चा शुरू हो गई है।

हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि किसी संगठन से पूर्व या वर्तमान जुड़ाव होना अपने आप में इस बात का प्रमाण नहीं है कि पाठ्यपुस्तकों की सामग्री किसी विशेष राजनीतिक विचारधारा के अनुरूप ही तैयार की जाएगी। अंतिम पुस्तकों में क्या सामग्री शामिल होगी, इसका आकलन उनके प्रकाशित होने के बाद ही किया जा सकेगा।

नई टीम में किन विशेषज्ञों को मिली जगह?

नई समिति में देश के अलग-अलग प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों और संस्थानों से जुड़े कई विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU), दिल्ली विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय दिल्ली, चाणक्य विश्वविद्यालय, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU), जिंदल ग्लोबल लॉ स्कूल और अन्य संस्थानों से जुड़े शिक्षाविद इस टीम का हिस्सा हैं।

टीम में प्रकाश कंडपाल, निधि गुप्ता, चेतन सिंघई, सुकांक्षिका वत्स, सतीश कुमार, दिवांशु श्रीवास्तव, प्रणव गुप्ता, नंद किशोर और स्वप्ना प्रभु सहित कई अन्य विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। इसके अलावा NCERT और स्कूल शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सदस्यों को भी टीम में जगह दी गई है।

NCERT के निदेशक दिनेश प्रसाद सकलानी की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, टीम को सामाजिक विज्ञान, भाषाओं, भारतीय ज्ञान प्रणाली, पर्यावरण शिक्षा, नवाचार आधारित शिक्षण पद्धति और शिक्षण-अधिगम सामग्री से जुड़े विशेषज्ञ समूहों से भी आवश्यक मार्गदर्शन लेने का प्रावधान है।

भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक जुड़ाव पर जोर

नई टीम के गठन के पीछे NCERT का एक प्रमुख उद्देश्य पाठ्यपुस्तकों को वर्तमान शैक्षणिक प्राथमिकताओं के अनुरूप तैयार करना बताया गया है। नई किताबों में सांस्कृतिक जड़ों, भारतीय ज्ञान प्रणालियों और समावेशिता को अधिक स्थान देने की बात सामने आई है।

इसका सीधा असर कक्षा 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों की राजनीतिक विज्ञान की पढ़ाई पर पड़ सकता है। राजनीतिक विज्ञान जैसे विषय में संविधान, लोकतंत्र, राजनीतिक संस्थाओं, चुनाव, संघवाद, अधिकारों, सामाजिक आंदोलनों और भारत की राजनीतिक यात्रा जैसे विषय महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए नई पुस्तकों में विषयों की प्रस्तुति और उनके संदर्भ को लेकर शिक्षकों और विद्यार्थियों की भी खास नजर रहेगी।

नई शिक्षा नीति के बाद NCERT लगातार पाठ्यक्रम और पुस्तकों में बदलाव की दिशा में काम कर रहा है। ऐसे में पॉलिटिकल साइंस की नई किताबों को भी व्यापक पाठ्यक्रम सुधार की प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है।

कक्षा 11 की किताब नवंबर तक तैयार करने का लक्ष्य

नई टीम को समयबद्ध तरीके से पाठ्यपुस्तक तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, कक्षा 11वीं की पॉलिटिकल साइंस की नई किताब को 30 नवंबर 2026 तक तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं कक्षा 12वीं की किताब को 30 जुलाई 2027 तक अंतिम रूप देने की समयसीमा बताई गई है।

इसका मतलब है कि पहले चरण में 11वीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए नई पुस्तक सामने आ सकती है, जबकि 12वीं की पुस्तक अगले शैक्षणिक चक्र के लिए तैयार की जाएगी। किताबों के अंतिम प्रकाशन से पहले विषय विशेषज्ञों, शिक्षकों और संबंधित अकादमिक समूहों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहने की संभावना है।

पुरानी किताबों से कितना अलग होगा नया कंटेंट?

यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि NCERT की पाठ्यपुस्तकों में पिछले कुछ वर्षों में कई बदलावों को लेकर बहस होती रही है। 2023 में कक्षा 12वीं की पॉलिटिकल साइंस की किताब से महात्मा गांधी, हिंदू-मुस्लिम एकता और RSS पर प्रतिबंध से संबंधित कुछ सामग्री हटाए जाने को लेकर भी व्यापक चर्चा हुई थी। उस समय NCERT ने पाठ्यक्रम के rationalisation यानी युक्तिसंगतीकरण की प्रक्रिया का हवाला दिया था।

अब नई टीम के गठन के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि नई किताबों में राजनीतिक घटनाओं, संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं को किस दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया जाता है। हालांकि, अभी नई पाठ्यपुस्तकों की पूरी सामग्री सार्वजनिक नहीं हुई है, इसलिए उनके अंतिम स्वरूप को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

विद्यार्थियों और शिक्षकों की नजर नई किताबों पर

कक्षा 11वीं और 12वीं की पॉलिटिकल साइंस की किताबें CBSE और NCERT आधारित शिक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। बोर्ड परीक्षाओं के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थी भी इन पुस्तकों को आधार सामग्री के रूप में इस्तेमाल करते हैं।

इसी वजह से नई पुस्तकों में तथ्यात्मक शुद्धता, संविधान की मूल भावना, ऐतिहासिक संदर्भ और विभिन्न विचारों का संतुलित प्रस्तुतीकरण बेहद महत्वपूर्ण माना जाएगा। शिक्षाविदों के बीच भी यही उम्मीद रहेगी कि पाठ्यपुस्तकें विद्यार्थियों को किसी एक विचारधारा तक सीमित करने के बजाय विभिन्न दृष्टिकोणों को समझने और लोकतांत्रिक तरीके से उनका विश्लेषण करने की क्षमता विकसित करें।

फिलहाल NCERT की नई टीम के गठन ने राजनीतिक विज्ञान की आगामी पुस्तकों को लेकर उत्सुकता बढ़ा दी है। चार सदस्यों के RSS या उससे जुड़े संगठनों से संबंधों को लेकर चर्चा जरूर तेज है, लेकिन असली तस्वीर नई किताबों के प्रकाशित होने के बाद ही स्पष्ट होगी। कक्षा 11वीं की किताब के लिए नवंबर 2026 और कक्षा 12वीं के लिए जुलाई 2027 की समयसीमा इस पूरी प्रक्रिया को लेकर सबसे अहम तारीखें रहेंगी।

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