नयी दिल्ली: दिल्ली सरकार ने राजधानी में सिनेमाघरों और मल्टीप्लेक्स के सिनेमैटोग्राफ लाइसेंस जारी करने, नवीनीकरण और निरीक्षण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और समयबद्ध बनाने के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) अधिसूचित की है। नई व्यवस्था के अंतर्गत वर्षों से चली आ रही अलग-अलग विभागों से एनओसी लेने की प्रक्रिया को समाप्त करते हुए एकीकृत सिंगल विंडो सिस्टम लागू किया गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि नई व्यवस्था का उद्देश्य लाइसेंसिंग प्रक्रिया में अनावश्यक देरी और अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय की समस्या को दूर करते हुए आवेदकों को एक स्पष्ट, जवाबदेह और तकनीक आधारित व्यवस्था उपलब्ध कराना है। पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी व समयबद्ध बनाने के लिए दो विशेष समितियों का गठन किया गया है। नई एसओपी वर्ष 2015 में फाइनल हो गई थी, लेकिन पूर्व सरकार ने इसे लागू नहीं किया था।
लाइसेंसिंग संबंधी अंतिम निर्णय डीएलसी के पास
नई एसओपी के अंतर्गत पहली समिति जिला लाइसेंसिंग समिति (डीएलसी) का गठन किया गया है। राजस्व विभाग के जिला प्रशासन के अधीन गठित डीएलसी लाइसेंसिंग संबंधी अंतिम निर्णय लेगी। इसका अध्यक्ष डिप्टी कमिश्नर (रेवेन्यू)/डीएम होगा। समिति में पुलिस, फायर विभाग, नगर निगम/डीडीए के इंजीनियरिंग विंग, दिल्ली जल बोर्ड और जिला मेडिकल अधिकारी सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।
नई एसओपी इस विषय से संबंधित दिल्ली पुलिस के पूर्व स्टैंडिंग ऑर्डर्स का स्थान लेगी। पुरानी व्यवस्था में सिनेमैटोग्राफ लाइसेंस के लिए पुलिस, फायर विभाग, नगर निगम, दिल्ली जल बोर्ड, बिजली वितरण कंपनियों और स्वास्थ्य विभाग सहित विभिन्न एजेंसियों से अलग-अलग एनओसी लेने पड़ते थे। नई व्यवस्था में इस बहु-विभागीय और क्रमिक प्रक्रिया को समाप्त कर दिया गया है। यही समिति निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर लाइसेंसिंग संबंधी अंतिम निर्णय लेगी।
निरीक्षण की जिम्मेदारी डीआईसी संभालेगी
नई एसओपी के तहत दूसरी समिति जिला निरीक्षण समिति (डीआईसी) का गठन किया गया है। अब इसी समिति द्वारा प्रत्येक सिनेमाघर का निरीक्षण संयुक्त रूप से किया जाएगा। समिति में संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल होंगे। समिति द्वारा एकीकृत, ई-साइन की गई और जियोटैग्ड सत्यापन रिपोर्ट तैयार कर ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल पर अपलोड की जाएगी। इससे अलग-अलग एनओसी के स्थान पर एकीकृत सत्यापन रिपोर्ट उपलब्ध होगी। डीआईसी का नेतृत्व एसडीएम करेंगे। इसमें प्रत्येक सदस्य की जिम्मेदारी भी निर्धारित होगी। इससे लाइसेंसिंग का निर्णय एक स्पष्ट संस्थागत व्यवस्था के तहत होगा, जबकि पुलिस और अन्य संबंधित विभागों की तकनीकी एवं सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारियां भी बनी रहेंगी।
हर चरण के लिए तय की गई समय-सीमा
नई एसओपी की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक प्रत्येक चरण के लिए निर्धारित समय-सीमा है। आवेदन की प्रारंभिक जांच सात कार्यदिवस के भीतर, डीआईसी द्वारा 45 दिनों के भीतर निरीक्षण और निरीक्षण रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद डीएलसी द्वारा 30 दिनों के भीतर निर्णय लिया जाना निर्धारित किया गया है। यदि डीएलसी निर्धारित समय-सीमा में निर्णय नहीं देती, लेकिन डीआईसी की रिपोर्ट में सभी वैधानिक और सुरक्षा संबंधी शर्तों का पूर्ण अनुपालन पाया जाता है तो पोर्टल पर लाइसेंस स्वतः जनरेट हो जाएगा। हालांकि जिन मामलों में अनिवार्य वैधानिक या सुरक्षा मानकों का पालन नहीं हुआ है, उनमें यह व्यवस्था लागू नहीं होगी।
लाइसेंसिंग की पूरी प्रक्रिया को ई-डिस्ट्रिक्ट दिल्ली पोर्टल पर शुरू से अंत तक ऑनलाइन होगी। आवेदन, शुल्क भुगतान, निरीक्षण रिपोर्ट, निर्णय और फॉर्म बी में लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। इससे आवेदकों को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने और अनावश्यक कागजी कार्रवाई से राहत मिलेगी।
सुविधा के साथ सुरक्षा पर भी पूरा जोर
दिल्ली सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रक्रिया को सरल बनाने का अर्थ सुरक्षा मानकों में किसी प्रकार की ढील नहीं है। नई व्यवस्था में वार्षिक संयुक्त निरीक्षण, औचक निरीक्षण तथा पुलिस, दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और सिनेमाघर प्रबंधन की भागीदारी से वर्ष में दो बार मॉक ड्रिल का प्रावधान किया गया है। सार्वजनिक सुरक्षा को खतरा होने की स्थिति में लाइसेंस के निलंबन और निरस्तीकरण की कार्रवाई के लिए भी स्पष्ट प्रवर्तन व्यवस्था रखी गई है।
नई एसओपी में पोर्टल आधारित शिकायत निवारण प्रणाली भी बनाई गई है। प्रत्येक जिले में नोडल शिकायत निवारण अधिकारी होगा और शिकायतों के निस्तारण के लिए निर्धारित समय-सीमा होगी। गंभीर या प्रणालीगत मामलों को डिविजनल कमिश्नर के स्तर तक ले जाने की व्यवस्था की गई है। इस पूरी प्रक्रिया में पुलिस से सिनेमैटोग्राफ लाइसेंस जारी करने का अधिकार पूरी तरह छीन लिया गया।
पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित शासन की दिशा में बड़ा कदम
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा है कि नई एसओपी दिल्ली सरकार के सुशासन की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसमें विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय के साथ प्रत्येक स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। नई व्यवस्था नागरिकों और व्यवसायों को निश्चित समय-सीमा में सेवा उपलब्ध कराने के साथ-साथ सार्वजनिक सुरक्षा के मानकों को भी सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। उन्होंने बताया कि नई एसओपी को माननीय सर्वोच्च न्यायालय के उपहार सिनेमा त्रासदी से संबंधित निर्देशों के अनुपालन की दिशा में जारी किया गया है। उन्होंने जानकारी दी कि यह एसओपी वर्ष 2015 में फाइनल हो गई थी और तत्कालीन आम आदमी पार्टी सरकार इसे आसानी से लागू कर सकती थी। लेकिन अकर्मण्यता व दिल्ली विरोधी सोच के कारण उसने इसे लागू नहीं किया।