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PM आवास के पास झुग्गी बस्तियां खाली करने का आदेश

 दिल्ली हाईकोर्ट ने दी 6 हफ्ते की डेडलाइन नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को प्रधानमंत्री आवास के पास स्थित तीन झुग्गी बस्तियों को खाली करने का आदेश दिया है। अदालत ने वहां रहने वाले लोगों को 6 सप्ताह के भीतर वैकल्पिक स्थान पर जाने के निर्देश दिए हैं। बताया गया है कि प्रस्तावित वैकल्पिक […]

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  • August 26, 2026 5:21 am IST, Published 40 minutes ago

 दिल्ली हाईकोर्ट ने दी 6 हफ्ते की डेडलाइन

नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को प्रधानमंत्री आवास के पास स्थित तीन झुग्गी बस्तियों को खाली करने का आदेश दिया है। अदालत ने वहां रहने वाले लोगों को 6 सप्ताह के भीतर वैकल्पिक स्थान पर जाने के निर्देश दिए हैं। बताया गया है कि प्रस्तावित वैकल्पिक जगह प्रधानमंत्री आवास से करीब 45 किलोमीटर दूर है।

चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि निर्धारित समयसीमा के भीतर जमीन खाली की जानी चाहिए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि तय अवधि में जमीन खाली नहीं की जाती है तो दिल्ली सरकार पुलिस की सहायता लेकर जमीन खाली करा सकती है।

6 हफ्ते में खाली करनी होगी जमीन

हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक, झुग्गी बस्तियों में रहने वाले लोगों को छह सप्ताह के भीतर वैकल्पिक स्थान पर स्थानांतरित होना होगा। अदालत ने संबंधित प्रशासन को आदेश के अनुपालन के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा है।

वैकल्पिक पुनर्वास स्थल प्रधानमंत्री आवास से करीब 45 किलोमीटर दूर बताया गया है। इस दूरी को लेकर प्रभावित लोगों के लिए आने-जाने और रोजगार जैसी चुनौतियां भी महत्वपूर्ण हो सकती हैं।

पुलिस की मदद से हटाया जा सकता है अतिक्रमण

अदालत ने कहा कि यदि तय समय सीमा के बाद भी संबंधित जमीन खाली नहीं की जाती है, तो दिल्ली सरकार पुलिस बल की सहायता से जमीन खाली कराने की कार्रवाई कर सकती है। हालांकि, इस कार्रवाई के दौरान अदालत के निर्देशों और लागू कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा।

पुनर्वास को लेकर क्या है स्थिति?

मामले में प्रभावित झुग्गीवासियों के पुनर्वास और वैकल्पिक स्थान से जुड़े पहलुओं पर भी ध्यान दिया गया है। अदालत के आदेश के बाद अब संबंधित विभागों के सामने निर्धारित समय में पुनर्वास और स्थानांतरण की प्रक्रिया पूरी करने की जिम्मेदारी होगी।

हाईकोर्ट का यह आदेश राजधानी में सरकारी जमीन, अतिक्रमण और झुग्गी पुनर्वास से जुड़े मामलों के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मामले में प्रशासन की कार्रवाई और प्रभावित परिवारों की स्थिति पर नजर रहेगी।

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