नई दिल्ली/काठमांडू। भारत और नेपाल के बीच दशकों पुराने सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में नेपाल सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। नेपाल ने भारतीय वाहनों को सीमा से लगभग 9 किलोमीटर तक बिना भंसार (कस्टम) शुल्क प्रवेश की अनुमति देने का निर्णय लिया है। इस फैसले से सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों, व्यापारियों, पर्यटकों और धार्मिक यात्रियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। नई व्यवस्था का उद्देश्य दोनों देशों के बीच आवागमन को आसान बनाना और स्थानीय स्तर पर व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है।
नेपाल सरकार द्वारा लागू किए गए नए नियमों के अनुसार भारतीय वाहन अब सीमा पार करने के बाद नेपाल के तराई क्षेत्र में लगभग 9 किलोमीटर तक बिना किसी अतिरिक्त भंसार शुल्क के प्रवेश कर सकेंगे। हालांकि, इसके लिए कुछ शर्तें भी निर्धारित की गई हैं। वाहन चालक को सीमा पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत सुविधा पास बनवाना होगा और वाहन को उसी दिन सूर्यास्त से पहले भारत लौटना होगा। यदि वाहन तय समय के भीतर वापस नहीं लौटता है तो उस पर लागू नियमों के अनुसार शुल्क और अन्य कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
ऑनलाइन प्रक्रिया से मिलेगी सुविधा
नेपाल सरकार ने इस व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और सरल बनाने के लिए डिजिटल प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया है। अब वाहन चालकों को सीमा पर लंबी औपचारिकताओं का सामना नहीं करना पड़ेगा। क्यूआर कोड और मोबाइल स्कैनर आधारित ऑनलाइन व्यवस्था के माध्यम से कुछ ही मिनटों में वाहन प्रवेश की प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी। इससे सीमा चौकियों पर लगने वाली भीड़ कम होगी और समय की बचत होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्रणाली लागू होने से भ्रष्टाचार की संभावनाएं भी कम होंगी और सीमा पार आवागमन अधिक व्यवस्थित होगा। यह व्यवस्था सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले हजारों लोगों के लिए रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बनाएगी।
व्यापार और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
नेपाल सरकार के इस फैसले का सबसे बड़ा लाभ सीमावर्ती क्षेत्रों में व्यापार करने वाले छोटे व्यापारियों को मिलने की संभावना है। भारत और नेपाल के बीच स्थानीय स्तर पर होने वाला व्यापार पहले की तुलना में अधिक सुगम होगा। आवश्यक वस्तुओं के आवागमन में आसानी आएगी, जिससे स्थानीय बाजारों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं।
इसके अलावा नेपाल जाने वाले भारतीय पर्यटकों और धार्मिक यात्रियों के लिए भी यह फैसला राहत भरा माना जा रहा है। हर वर्ष बड़ी संख्या में भारतीय श्रद्धालु नेपाल स्थित पशुपतिनाथ मंदिर, जनकपुर धाम और अन्य धार्मिक स्थलों के दर्शन के लिए जाते हैं। अब सीमित दूरी तक बिना अतिरिक्त शुल्क के वाहन ले जाने की सुविधा से उनकी यात्रा पहले से अधिक आसान हो जाएगी।
सीमावर्ती परिवारों को भी राहत
भारत और नेपाल के बीच सदियों पुराने सामाजिक और पारिवारिक रिश्ते रहे हैं। दोनों देशों के सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों के बीच ‘रोटी-बेटी’ का संबंध आज भी मजबूत माना जाता है। शादी-विवाह, पारिवारिक कार्यक्रम, धार्मिक आयोजन और सामाजिक गतिविधियों के लिए लोगों का लगातार दोनों देशों के बीच आना-जाना लगा रहता है।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद ऐसे लोगों को बार-बार भंसार शुल्क की औपचारिकताओं से राहत मिलेगी। इससे सामाजिक संबंध और मजबूत होंगे तथा स्थानीय स्तर पर लोगों के बीच संपर्क बढ़ेगा।
घरेलू सामान पर भी राहत
नेपाल सरकार ने आम नागरिकों को राहत देने के उद्देश्य से कस्टम ड्यूटी से जुड़े कुछ नियमों में भी संशोधन किया है। नई व्यवस्था के तहत निर्धारित सीमा तक घरेलू उपयोग के सामान को बिना अतिरिक्त भंसार शुल्क के नेपाल ले जाने की अनुमति दी जाएगी। इससे सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं के आवागमन में सुविधा मिलेगी।
सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य स्थानीय नागरिकों की परेशानियों को कम करना और सीमा पर अनावश्यक औपचारिकताओं को सरल बनाना है।
दोनों देशों के संबंध होंगे और मजबूत
भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा व्यवस्था लंबे समय से दोनों देशों की विशेष पहचान रही है। दोनों देशों के नागरिक बिना वीजा के एक-दूसरे के यहां आ-जा सकते हैं। ऐसे में वाहन संबंधी नियमों में दी गई यह नई राहत द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे सीमावर्ती क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी, स्थानीय रोजगार बढ़ेंगे और पर्यटन उद्योग को भी लाभ होगा। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग की भावना भी मजबूत होगी।
क्या हैं नए नियम?
भारतीय वाहन सीमा से लगभग 9 किलोमीटर तक बिना भंसार शुल्क प्रवेश कर सकेंगे।
वाहन चालक को सीमा पर सुविधा पास बनवाना होगा।
वाहन को उसी दिन सूर्यास्त से पहले भारत लौटना अनिवार्य होगा।
क्यूआर कोड आधारित डिजिटल प्रवेश प्रणाली लागू की जाएगी।
सीमावर्ती व्यापार, पर्यटन और धार्मिक यात्राओं को बढ़ावा मिलेगा।
सीमावर्ती नागरिकों को दैनिक आवागमन और सामाजिक कार्यक्रमों में सुविधा मिलेगी।
नेपाल सरकार का यह निर्णय भारत-नेपाल संबंधों को नई मजबूती देने वाला कदम माना जा रहा है। सीमा क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए यह फैसला राहत लेकर आएगा, वहीं व्यापार, पर्यटन और सामाजिक संपर्क को भी नई गति मिलेगी। यदि नई व्यवस्था का प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन किया जाता है तो आने वाले समय में दोनों देशों के बीच आर्थिक और सांस्कृतिक सहयोग पहले से कहीं अधिक मजबूत हो सकता है।