नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में लोग भारतीय तिरंगे के सामने दिखाई दे रहे हैं। वीडियो के साथ दावा किया जा रहा है कि यह दृश्य अफगानिस्तान का है, जहां लोगों ने भारतीय तिरंगा लहराया और भारत के राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के प्रति सम्मान जताया। वायरल पोस्ट में इसे भारत और अफगानिस्तान के बीच बढ़ती नजदीकी और कथित तौर पर ‘अखंड भारत’ से जोड़कर भी पेश किया जा रहा है।
वीडियो पर लिखे संदेश और पोस्ट के कैप्शन ने इसे और ज्यादा भावनात्मक बना दिया है। कई यूजर्स इसे देखकर इसे भारत के लिए गर्व का क्षण बता रहे हैं। हालांकि, जब इस वीडियो की पड़ताल की गई तो कहानी कुछ और ही सामने आई। वायरल वीडियो अफगानिस्तान का नहीं है। यह वीडियो उत्तर प्रदेश के देवबंद में गणतंत्र दिवस समारोह से जुड़ा है।
वायरल वीडियो में क्या दिख रहा है?
वीडियो में एक बड़ी भीड़ नजर आती है। लोग एक स्थान पर एकत्रित हैं और सामने भारतीय तिरंगा दिखाई देता है। वीडियो के साथ सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि अफगानिस्तान में लोगों ने भारत का राष्ट्रगान बजाया और तिरंगा फहराकर भारत के प्रति अपना समर्थन जताया।
कुछ पोस्ट में इसे भारत-अफगानिस्तान संबंधों से जोड़ते हुए लिखा गया कि अफगानिस्तान में भारतीय तिरंगे को सम्मान मिल रहा है। इसी वजह से वीडियो तेजी से शेयर हुआ और बड़ी संख्या में लोगों ने इसे वास्तविक घटना मान लिया।
लेकिन किसी भी वायरल वीडियो को केवल कैप्शन या वीडियो पर लिखे टेक्स्ट के आधार पर सही मान लेना जोखिम भरा हो सकता है। इस मामले में भी वीडियो की लोकेशन को लेकर गलत दावा किया गया।
कहां का है वायरल वीडियो?
फैक्ट-चेक में सामने आया कि यह वीडियो उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के देवबंद स्थित दारुल उलूम परिसर से संबंधित है। वीडियो को गणतंत्र दिवस यानी 26 जनवरी 2026 के कार्यक्रम से जोड़ा गया है।
द क्विंट की WebQoof टीम ने वीडियो के फ्रेम की रिवर्स इमेज सर्च की। जांच के दौरान इसी वीडियो से संबंधित पोस्ट सामने आई, जिसे 27 जनवरी को शेयर किया गया था। इसके अलावा स्थानीय रिपोर्टों में भी देवबंद में गणतंत्र दिवस के मौके पर राष्ट्रीय ध्वज फहराए जाने और राष्ट्रगान बजाए जाने की जानकारी सामने आई थी।
AFP की फैक्ट-चेक रिपोर्ट ने भी वीडियो को अफगानिस्तान का मानने से इनकार किया। रिपोर्ट के मुताबिक वीडियो रिकॉर्ड करने वाले व्यक्ति ने बताया कि उसने इसे गणतंत्र दिवस के मौके पर देवबंद स्थित दारुल उलूम परिसर में शूट किया था। AFP ने वीडियो में दिखाई देने वाली इमारतों की तुलना Google Maps की तस्वीरों से भी की और लोकेशन देवबंद से मेल खाती पाई।
राष्ट्रगान और तिरंगे को लेकर क्या है सच्चाई?
वायरल वीडियो में भारतीय राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान से जुड़ा दृश्य वास्तव में मौजूद है। लेकिन यह घटना अफगानिस्तान में नहीं हुई थी। यही इस वायरल दावे का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।
यानी वीडियो पूरी तरह से फर्जी या एडिटेड होने की बात नहीं है, बल्कि वास्तविक वीडियो को गलत संदर्भ और गलत लोकेशन के साथ शेयर किया गया है। इस तरह के मामलों में पुरानी या किसी दूसरी जगह की वास्तविक घटना को नए दावे के साथ प्रसारित करने से लोगों में भ्रम पैदा होता है।
अमर उजाला की फैक्ट-चेक रिपोर्ट ने भी वायरल दावे को गलत पाया। रिपोर्ट के अनुसार, वीडियो में उत्तर प्रदेश में गणतंत्र दिवस के मौके पर एक मस्जिद के ऊपर तिरंगा फहराए जाने का दृश्य था, जिसे अफगानिस्तान का बताकर शेयर किया गया।
सोशल मीडिया पर क्यों तेजी से फैला दावा?
इस वीडियो के वायरल होने की एक बड़ी वजह इसका भावनात्मक प्रस्तुतीकरण है। पोस्ट में अफगानिस्तान, भारतीय तिरंगा, राष्ट्रगान और ‘अखंड भारत’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया। ऐसे शब्द सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान तेजी से आकर्षित करते हैं।
इसके अलावा वीडियो पर अलग से लिखे गए संदेश को देखकर कई यूजर्स ने मूल स्रोत या तारीख की जांच किए बिना इसे आगे शेयर कर दिया। यही वजह है कि एक स्थानीय गणतंत्र दिवस कार्यक्रम का वीडियो अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम से जोड़ दिया गया।
फैक्ट-चेक रिपोर्टों के मुताबिक, यह पहली बार नहीं है जब भारत से संबंधित किसी वीडियो को अफगानिस्तान का बताकर प्रसारित किया गया हो। AFP ने भी अफगानिस्तान से जुड़े वायरल कंटेंट में पहले कई बार पुराने या दूसरे स्थानों के वीडियो के गलत इस्तेमाल की ओर ध्यान दिलाया है।
क्या अफगानिस्तान में भारतीय तिरंगा फहराया गया?
इस वायरल वीडियो के आधार पर ऐसा दावा करना गलत है। उपलब्ध जांच के अनुसार वीडियो अफगानिस्तान का नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश के देवबंद का है।
इसलिए वीडियो को ‘अफगानिस्तान में भारत का राष्ट्रगान’ या ‘अफगानिस्तान में भारतीय तिरंगा’ बताकर शेयर करना भ्रामक है। हालांकि वीडियो में दिखाई देने वाली गणतंत्र दिवस की घटना वास्तविक है, लेकिन उसकी लोकेशन को बदलकर पेश किया गया है।
वायरल पोस्ट से क्या सीख मिलती है?
सोशल मीडिया पर किसी भी वीडियो को शेयर करने से पहले उसकी तारीख, स्थान और मूल स्रोत की जांच करना जरूरी है। खासकर जब कोई पोस्ट बेहद भावनात्मक दावा कर रही हो या उसमें देश, धर्म और अंतरराष्ट्रीय संबंधों से जुड़े बड़े दावे किए गए हों।
वीडियो के साथ लिखा कैप्शन हमेशा वीडियो की वास्तविक जानकारी नहीं बताता। कई बार पुराना वीडियो नए घटनाक्रम से जोड़ दिया जाता है। ऐसे में रिवर्स इमेज सर्च, विश्वसनीय समाचार संस्थानों की रिपोर्ट और फैक्ट-चेक प्लेटफॉर्म की जांच मददगार साबित हो सकती है।
निष्कर्ष
अफगानिस्तान में भारतीय तिरंगा लहराने और राष्ट्रगान बजाए जाने का दावा करने वाला वायरल वीडियो भ्रामक संदर्भ के साथ शेयर किया जा रहा है। जांच में सामने आया कि वीडियो अफगानिस्तान का नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के देवबंद में 26 जनवरी 2026 को हुए गणतंत्र दिवस समारोह का है। इसलिए वायरल पोस्ट में किया गया अफगानिस्तान वाला दावा सही नहीं है।