नई दिल्ली: पैकेट बंद खाद्य पदार्थ खरीदने वाले उपभोक्ताओं के लिए आने वाले समय में पैकेजिंग पर एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पैकेज्ड फूड पर फ्रंट-ऑफ-पैक लाल चेतावनी लेबल लगाने का प्रस्ताव रखा है। इसका मकसद ऐसे खाद्य उत्पादों के बारे में उपभोक्ताओं को आसानी से जानकारी देना है, जिनमें नमक, चीनी या संतृप्त वसा की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक है।
अगर यह प्रस्ताव नियमों का हिस्सा बनता है, तो चिप्स, स्नैक्स, बिस्किट, इंस्टेंट फूड और अन्य पैकेज्ड उत्पादों के सामने ही लाल रंग का चेतावनी संकेत दिखाई दे सकता है। यानी खरीदारी के दौरान ग्राहक को पैकेट पलटकर छोटे अक्षरों में पोषण संबंधी जानकारी खोजने की जरूरत कम हो सकती है।
सुप्रीम कोर्ट के सवालों के बाद FSSAI का प्रस्ताव
पैकेज्ड खाद्य पदार्थों पर स्पष्ट चेतावनी लेबल लगाने का मुद्दा पिछले कुछ समय से चर्चा में है। अगस्त 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI और केंद्र से इस विषय पर देरी को लेकर सवाल किए थे। अदालत ने विशेष रूप से बच्चों और आम उपभोक्ताओं को अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों के बारे में स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराने की जरूरत पर जोर दिया था।
इसके बाद FSSAI ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अनुपालन हलफनामे में फ्रंट-ऑफ-पैक चेतावनी लेबल का प्रस्ताव रखा। प्रस्ताव का उद्देश्य पोषण संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी को पैकेट के सामने प्रमुखता से दिखाना है, ताकि उपभोक्ता कम समय में यह समझ सके कि किसी उत्पाद में संबंधित पोषक तत्वों की मात्रा अधिक है या नहीं।
पैकेट पर कैसा होगा लाल निशान?
प्रस्ताव के अनुसार चेतावनी संकेत लाल रंग के षट्भुज यानी Hexagon के रूप में हो सकता है। इसमें संबंधित पोषक तत्व के अधिक होने की चेतावनी दी जाएगी। रिपोर्टों के मुताबिक प्रस्ताव में HIGH FAT, HIGH SUGAR और HIGH SALT जैसे संकेतों का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है। अत्यधिक मीठे पेय के लिए भी अलग चेतावनी का प्रस्ताव बताया गया है।
इस तरह का लेबल पैकेट के सामने होने से उपभोक्ता को उत्पाद की पोषण संबंधी स्थिति का एक त्वरित संकेत मिल सकेगा। खास तौर पर उन लोगों के लिए यह उपयोगी हो सकता है जो खरीदारी के समय विस्तृत न्यूट्रिशन टेबल पढ़ने में समय नहीं दे पाते।
पहले चरण में हर ज्यादा चीनी वाले पैकेट पर नहीं लगेगा निशान
यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। मौजूदा प्रस्ताव को लेकर रिपोर्टों में बताया गया है कि पहले चरण में चेतावनी लेबल उन पैकेज्ड उत्पादों पर लागू करने की योजना है, जिनमें निर्धारित सीमा से दो या अधिक संबंधित पोषक तत्व अधिक पाए जाते हैं। यानी सिर्फ एक पोषक तत्व की मात्रा अधिक होने पर शुरुआती चरण में हर उत्पाद पर लाल निशान लगना जरूरी नहीं होगा।
यही वजह है कि कुछ विशेषज्ञों ने प्रस्ताव के इस हिस्से पर सवाल उठाए हैं। उनका तर्क है कि कई ऐसे उत्पाद हो सकते हैं जिनमें केवल चीनी या केवल नमक की मात्रा ज्यादा हो, लेकिन वे शुरुआती चरण की दो-घटक वाली शर्त के कारण चेतावनी लेबल से बाहर रह जाएं।
किन चीजों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?
यदि प्रस्ताव लागू होता है, तो इसका असर बड़े पैमाने पर पैकेज्ड और प्रोसेस्ड फूड इंडस्ट्री पर पड़ सकता है। चिप्स, नमकीन, स्नैक फूड, कुछ बिस्किट, इंस्टेंट नूडल्स, तैयार खाद्य पदार्थ और मीठे पेय जैसे उत्पादों में इस्तेमाल होने वाले नमक, चीनी और वसा की मात्रा को लेकर कंपनियों को ज्यादा पारदर्शिता दिखानी पड़ सकती है।
हालांकि किसी विशेष ब्रांड या उत्पाद पर लाल निशान लगेगा या नहीं, यह उसके पोषण प्रोफाइल और अंतिम रूप से तय किए जाने वाले नियमों पर निर्भर करेगा। इसलिए फिलहाल किसी भी खास ब्रांड के सभी उत्पादों को सीधे तौर पर चेतावनी श्रेणी में रखना सही नहीं होगा।
कंपनियों के सामने आएगी नई चुनौती
नए फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग नियमों से खाद्य कंपनियों के लिए भी चुनौती बढ़ सकती है। यदि किसी उत्पाद के सामने लाल चेतावनी दिखाई देती है, तो खरीदारी के समय उपभोक्ता का ध्यान तुरंत उस पर जा सकता है। इससे कंपनियों को अपने उत्पादों की रेसिपी, पोषण प्रोफाइल और पैकेजिंग रणनीति पर दोबारा विचार करना पड़ सकता है।
कुछ कंपनियां नमक, चीनी या वसा की मात्रा कम करके अपने उत्पादों को नए पोषण मानकों के अनुरूप बनाने की कोशिश कर सकती हैं। दूसरी ओर, उद्योग जगत की ओर से यह सवाल भी उठाया गया है कि नए नियमों को लागू करने से पहले वैज्ञानिक आधार, व्यावहारिकता और हितधारकों से परामर्श को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
उपभोक्ताओं के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?
फ्रंट-ऑफ-पैक चेतावनी का सबसे बड़ा उद्देश्य जानकारी को आसान और तुरंत समझ में आने वाला बनाना है। वर्तमान में किसी पैकेज्ड फूड की पोषण तालिका अक्सर पैकेट के पीछे या किसी अन्य हिस्से में होती है। वहां कैलोरी, चीनी, वसा, नमक और अन्य पोषक तत्वों की जानकारी दी जाती है, लेकिन उसे समझने में समय लग सकता है।
लाल चेतावनी संकेत इस प्रक्रिया को आसान बनाने की कोशिश है। खासकर बच्चों के लिए खरीदे जाने वाले स्नैक्स और पेय पदार्थों के मामले में माता-पिता को उत्पाद की पोषण संबंधी स्थिति का एक त्वरित संकेत मिल सकता है। FSSAI ने भी अपने प्रस्ताव का उद्देश्य उपभोक्ताओं को सरल, प्रमुख और आसानी से समझ आने वाली चेतावनी उपलब्ध कराना बताया है।
अभी क्या तय होना बाकी है?
सबसे जरूरी बात यह है कि यह फिलहाल प्रस्ताव है, अंतिम रूप से लागू हो चुका नियम नहीं। FSSAI ने सुप्रीम कोर्ट के सामने अपनी योजना रखी है और आगे नियमों की अंतिम प्रक्रिया, मानक और क्रियान्वयन का तरीका महत्वपूर्ण होगा।
इसके अलावा यह भी देखना होगा कि लाल चेतावनी किन उत्पादों पर अनिवार्य होगी, पोषक तत्वों की सीमा कैसे तय होगी, नियम कितने चरणों में लागू होंगे और किन उत्पादों को छूट मिलेगी। रिपोर्टों के अनुसार प्रस्ताव को 2024 के भारतीय आहार संबंधी दिशानिर्देशों में निर्धारित पोषण सीमाओं से जोड़ने की योजना है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर FSSAI का प्रस्ताव पैकेज्ड फूड खरीदने वाले करोड़ों उपभोक्ताओं के लिए बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। अगर लाल चेतावनी लेबल व्यवस्था लागू होती है, तो चिप्स, स्नैक्स और अन्य पैकेज्ड खाद्य पदार्थ खरीदते समय लोगों को सामने ही यह संकेत मिल सकेगा कि उत्पाद में नमक, चीनी या वसा का स्तर ज्यादा है। हालांकि अंतिम नियम और उसकी शर्तें स्पष्ट होने के बाद ही यह पता चलेगा कि कौन-कौन से उत्पाद वास्तव में इस व्यवस्था के दायरे में आएंगे।
नोट: ऊपर दी गई जानकारी 29-30 अगस्त 2026 तक उपलब्ध रिपोर्टों और FSSAI के सुप्रीम कोर्ट में रखे प्रस्ताव पर आधारित है।