पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर सामने आया है। राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को उनके ही गढ़ भवानीपुर सीट पर करारी हार का सामना करना पड़ा। बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी ने उन्हें 15,114 वोटों से मात दी। यह वही भवानीपुर सीट है जिसे लंबे समय से ममता बनर्जी का अभेद किला माना जाता रहा है।
इस हार ने सिर्फ एक सीट नहीं छीनी, बल्कि राज्य की राजनीति में सत्ता संतुलन पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। खास बात यह है कि शुभेंदु अधिकारी ने इससे पहले 2021 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम सीट पर भी ममता बनर्जी को हराया था। इस बार भी उन्होंने नंदीग्राम से जीत दर्ज की और साथ ही भवानीपुर में भी इतिहास रच दिया।
शुभेंदु अधिकारी अब ऐसे पहले नेता बन गए हैं जिन्होंने किसी सिटिंग मुख्यमंत्री को दो बार चुनावी मैदान में हराया हो । यह उपलब्धि उन्हें राज्य की राजनीति में बेहद मजबूत खिलाड़ी के रूप में स्थापित करती है।
लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने एक नया विवाद भी खड़ा कर दिया है। चुनाव परिणाम के बाद ममता बनर्जी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके साथ हिंसा की गई। उन्होंने दावा किया कि, “तीन बजे से वे हमें मार रहे हैं, मुझे लात मारी गई, CCTV बंद कर दिया गया। हमारे एजेंट को अंदर नहीं जाने दिया गया। मैं खुद सिर्फ 5 मिनट के लिए अंदर गई थी… हर जगह शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।”
इन आरोपों ने चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं और राजनीतिक माहौल को और ज्यादा गर्म कर दिया है। अब नजरें चुनाव आयोग और आगे की राजनीतिक प्रतिक्रिया पर टिकी हैं । क्या यह सिर्फ एक चुनावी हार है या पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़े बदलाव की शुरुआत?