अनंतनाग: जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और महबूबा मुफ़्ती ने कश्मीरी पंडितों की वापसी और पुनर्वास के मुद्दे पर महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में केवल सरकार ही नहीं, बल्कि स्थानीय समाज की भी सक्रिय भूमिका होनी चाहिए। उनके अनुसार, कश्मीरी पंडितों की सम्मानजनक और सुरक्षित वापसी के लिए आपसी विश्वास और सामाजिक सहयोग सबसे महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।
अनंतनाग में मीडिया से बातचीत के दौरान महबूबा मुफ़्ती ने कहा कि कश्मीरी पंडित समुदाय और स्थानीय मुस्लिम समाज के बीच वर्षों पुराना सामाजिक और सांस्कृतिक संबंध रहा है। उनका मानना है कि इस रिश्ते को फिर से मजबूत करने की दिशा में प्रयास किए जाने चाहिए, ताकि घाटी में सौहार्द और विश्वास का वातावरण और बेहतर हो सके।
उन्होंने कश्मीरी पंडितों से अपील करते हुए कहा कि बीते वर्षों की कड़वी यादों से आगे बढ़कर भविष्य की संभावनाओं पर ध्यान देना चाहिए। उनके अनुसार, समाज और समुदायों के बीच संवाद बढ़ाने से आपसी दूरी कम होगी और पुनर्वास की प्रक्रिया को भी गति मिलेगी।
महबूबा मुफ़्ती ने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि घाटी में रह रहे कश्मीरी पंडितों के लिए बेहतर सुरक्षा, आवास, रोजगार और अन्य आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं। उन्होंने कहा कि यदि अनुकूल माहौल तैयार किया जाता है तो भविष्य में और अधिक कश्मीरी पंडित जम्मू-कश्मीर लौटने के लिए प्रेरित हो सकते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि पुनर्वास का मुद्दा केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि सामाजिक और भावनात्मक पहलुओं से भी जुड़ा हुआ है। इसलिए सभी पक्षों को मिलकर ऐसे कदम उठाने चाहिए, जिससे लोगों का भरोसा मजबूत हो और स्थायी समाधान की दिशा में प्रगति हो सके।
जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी पंडितों की वापसी का विषय लंबे समय से चर्चा और नीति निर्माण का हिस्सा रहा है। विभिन्न राजनीतिक दल और सामाजिक संगठन समय-समय पर इस मुद्दे पर अपने विचार रखते रहे हैं। महबूबा मुफ़्ती के हालिया बयान को भी इसी व्यापक बहस का हिस्सा माना जा रहा है। फिलहाल, कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास और उनकी सुरक्षित वापसी को लेकर सरकार तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रयास जारी हैं। इस बीच महबूबा मुफ़्ती की अपील ने एक बार फिर इस महत्वपूर्ण मुद्दे को सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।