नई दिल्ली: भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने वेतनभोगी कर्मचारियों और निवेशकों के लिए बड़ा प्रस्ताव पेश किया है। इसके तहत कंपनियां कर्मचारियों की सहमति से उनकी सैलरी का एक हिस्सा सीधे म्यूचुअल फंड यूनिट्स के रूप में दे सकेंगी। इस कदम का उद्देश्य कर्मचारियों को निवेश के नए विकल्प उपलब्ध कराना और लंबी अवधि की वित्तीय भागीदारी को बढ़ावा देना है।
प्रस्ताव के मुताबिक यह सुविधा फिलहाल सूचीबद्ध कंपनियों, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) में पंजीकृत फर्मों और म्यूचुअल फंड कंपनियों तक सीमित रहेगी। इसके अलावा म्यूचुअल फंड कंपनियां अपने एजेंटों और वितरकों को मिलने वाले कमीशन का कुछ हिस्सा नकद के बजाय म्यूचुअल फंड यूनिट्स के रूप में दे सकेंगी।
प्रस्ताव के तहत कर्मचारियों को अपनी पसंद की म्यूचुअल फंड स्कीम चुनने का विकल्प मिलेगा। हालांकि, इस व्यवस्था पर टैक्स में किसी तरह की छूट या लाभ मिलेगा या नहीं, इस पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
बाजार के जानकारों का मानना है कि इस कदम से मध्यम वर्ग के निवेश पैटर्न में बड़ा बदलाव आ सकता है। वर्तमान में पीएफ और एनपीएस जैसी योजनाओं में निवेश का बड़ा हिस्सा सीमित रिटर्न वाले साधनों में जाता है, जहां औसतन 7 से 8 प्रतिशत तक का रिटर्न मिलता है। अब कर्मचारियों को म्यूचुअल फंड जैसे बाजार आधारित निवेश विकल्पों तक सीधी पहुंच मिल सकती है।
अनुमान है कि देश के 7 से 8 करोड़ वेतनभोगी कर्मचारी इस नई व्यवस्था के दायरे में आ सकते हैं। म्यूचुअल फंड में निवेश के जरिए कर्मचारियों को बेहतर रिटर्न के साथ आसान निकासी की सुविधा भी मिल सकती है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो यह भारत में सैलरी स्ट्रक्चर और निवेश व्यवस्था में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।