शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, अभियान के दौरान केवल ई-कचरा एकत्र करने पर ही ध्यान नहीं दिया गया, बल्कि सरकारी कार्यालयों में प्रशासनिक सुधार और स्वच्छता को भी प्राथमिकता दी गई। विभाग और उससे जुड़े स्वायत्त संस्थानों में 41,181 फाइलों की समीक्षा की गई। इनमें से 31,010 अनावश्यक फाइलों को हटाया गया। इस प्रक्रिया से कार्यालयों में लगभग 1,84,828 वर्ग फुट अतिरिक्त जगह उपलब्ध हुई। इसके अलावा कबाड़ के निपटान से सरकार को 67.27 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ।
अभियान के तहत शिक्षा विभाग के स्कूलों और कार्यालयों में सात लाख से अधिक स्वच्छता गतिविधियां आयोजित की गईं। इनका उद्देश्य कार्यस्थलों को साफ-सुथरा बनाने के साथ लंबित प्रशासनिक कार्यों को कम करना और सरकारी कामकाज को अधिक प्रभावी बनाना था। अभियान की तैयारी और क्रियान्वयन के दौरान 16 सितंबर से 31 अक्टूबर तक देशभर के स्कूलों में ई-कचरे को लेकर 6.29 लाख से अधिक कार्यशालाएं भी आयोजित की गईं।
इस अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा 28 अक्टूबर को आयोजित राष्ट्रव्यापी ई-कचरा जागरूकता कार्यक्रम रहा। इसमें विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के स्कूलों ने हिस्सा लिया। लगभग 1.89 लाख स्कूलों में सुबह की प्रार्थना सभा के दौरान ई-कचरे से संबंधित प्रश्नोत्तरी आयोजित की गई। इसके जरिए विद्यार्थियों को इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के सुरक्षित इस्तेमाल, पुन: उपयोग और रीसाइक्लिंग के बारे में जानकारी दी गई।

नई दिल्ली में आयोजित ‘वेस्ट टू वंडर’ प्रदर्शनी में विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मक प्रतिभा भी दिखाई। इसमें बेकार हो चुके इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और उनके पुर्जों से उपयोगी तथा आकर्षक वस्तुएं तैयार की गईं। शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने 28 अक्टूबर को प्रदर्शनी का दौरा कर विद्यार्थियों के प्रयासों को देखा। इस कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि अनुपयोगी इलेक्ट्रॉनिक सामान का सही इस्तेमाल करके उपयोगी उत्पाद भी तैयार किए जा सकते हैं। राष्ट्रीय स्तर पर एकत्र किए गए ई-कचरे को निर्धारित प्रक्रिया के तहत केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) से प्रमाणित रिसाइकलर को सौंपा गया। इस दौरान प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग की सचिव निवेदिता शुक्ला वर्मा और स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव टी.के. अनिल कुमार ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इससे पहले 14 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय ई-कचरा दिवस के अवसर पर कर्तव्य भवन-2 में ई-कचरे से तैयार एक विशेष भित्ति चित्र और संग्रह बिन स्थापित किया गया था। इस कलाकृति को स्कूली विद्यार्थियों द्वारा एकत्र किए गए लगभग 60 किलोग्राम इलेक्ट्रॉनिक कचरे से तैयार किया गया। यह पहल पर्यावरण संरक्षण और रचनात्मक पुन: उपयोग का उदाहरण बनी। कुल मिलाकर ‘विशेष अभियान 6’ ने स्वच्छता, प्रशासनिक सुधार और पर्यावरण जागरूकता को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया। दो करोड़ से अधिक विद्यार्थियों और शिक्षकों की भागीदारी ने इस पहल को व्यापक स्वरूप दिया। सरकार का उद्देश्य है कि स्कूलों के माध्यम से बच्चों में ऐसी आदतें विकसित हों, जिनसे भविष्य में ई-कचरे का जिम्मेदार प्रबंधन हो और पर्यावरण को सुरक्षित रखने में समाज की भागीदारी बढ़े।