नई दिल्ली। एयर इंडिया में कमांडर बनने के इच्छुक योग्य पायलटों और सीनियर फर्स्ट ऑफिसरों के लिए नई व्यवस्था लागू होने जा रही है। इसके तहत बोइंग 737 विमानों के लिए कमांडर बनने की राह में सीनियर फर्स्ट ऑफिसरों को अनिवार्य रूप से एयर इंडिया एक्सप्रेस में सेवा देनी होगी। यह व्यवस्था कॉमन सीनियरिटी पूल पर आधारित होगी।
एयर इंडिया ने हालांकि अभी इस नए फ्रेमवर्क पर आधिकारिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की है। सूत्रों के अनुसार, इस व्यवस्था के तहत एयर इंडिया एक्सप्रेस में बोइंग 737 विमानों के लिए जाने वाले सीनियर फर्स्ट ऑफिसरों को एकमुश्त 10 लाख रुपये का बोनस दिया जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक एयर इंडिया एक्सप्रेस में बोइंग 737 के मौजूदा कमांडरों को तीन साल की अवधि में कुल 21 लाख रुपये का भुगतान किया जाएगा। कमांडर बनने के बाद पायलटों को एयर इंडिया एक्सप्रेस द्वारा निर्धारित ऑपरेटिंग बेस पर कम से कम दो साल तक सेवा देनी होगी। जरूरत पड़ने पर इस अवधि को छह महीने तक बढ़ाया जा सकता है।
दो साल की निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद पायलट अपनी योग्यता और उपलब्ध विकल्पों के आधार पर ऑपरेटिंग बेस चुन सकेंगे।
एयर इंडिया समूह के दो वरिष्ठ पायलटों के अनुसार, यह व्यवस्था वरिष्ठ पायलटों की भर्ती को लेकर एयरलाइनों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा और पायलटों की कमी के बीच लाई जा रही है।
एयर इंडिया के पास 3,500 से अधिक पायलट, जबकि एयर इंडिया एक्सप्रेस के पास 2,000 से अधिक पायलट हैं। दोनों एयरलाइंस मिलकर करीब 300 विमानों के बेड़े का संचालन करती हैं। खास बात यह है कि एयर इंडिया के मौजूदा बेड़े में बोइंग 737 विमान शामिल नहीं हैं।
सूत्रों का कहना है कि सीनियर फर्स्ट ऑफिसरों को एयर इंडिया एक्सप्रेस में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करने का मुख्य उद्देश्य बोइंग 737 विमानों के लिए कमांडरों का मजबूत पूल तैयार करना है। अगले वर्ष एयर इंडिया एक्सप्रेस के बेड़े में कई नए बोइंग 737 विमान शामिल होने की उम्मीद है।
कमर्शियल पायलट लाइसेंस (CPL) हासिल करने के बाद पायलट को फर्स्ट ऑफिसर बनने से पहले शुरुआती प्रशिक्षण और निर्धारित परीक्षाओं से गुजरना होता है। आमतौर पर फर्स्ट ऑफिसर के रूप में कई वर्षों का अनुभव हासिल करने के बाद पायलट सीनियर फर्स्ट ऑफिसर बनता है और इसके बाद कमांडर के पद पर प्रमोशन होता है।
कमांडर के तौर पर करीब चार से पांच वर्ष की सेवा के बाद पायलट को सीनियर कमांडर के पद पर प्रमोट किया जा सकता है। नई व्यवस्था का उद्देश्य एयर इंडिया समूह के भीतर पायलटों के करियर प्रोग्रेशन को एक साझा वरिष्ठता ढांचे से जोड़ना और भविष्य में बढ़ने वाली विमान संचालन क्षमता के लिए पर्याप्त कमांडर उपलब्ध कराना है।